पर्सनालिटी डेवलपमेंट क्या है और इसका क्या महत्व है

आपने कभी ना कभी तो जरूर सुना होगा कि इस इंसान की पर्सनालिटी बहुत अच्छी है और इसका कम्युनिकेशन भी बहुत अच्छा है लेकिन क्या आपने कभी जानने की कोशिश की है कि पर्सनालिटी डेवलपमेंट क्या है (What is personality development in hindi). जहां पर भी कम्युनिकेशन स्किल के बारे में ट्रेनिंग दिए जाते हैं वहां पर पर्सनालिटी डेवलपमेंट की भी चर्चा जरूर की जाती है. आखिर पर्सनैलिटी डेवलपमेंट का महत्व क्या है और इसके कितने स्टेज होते हैं. अगर आप इसके बारे में कुछ भी नहीं जानते तो भी कोई बात नहीं क्योंकि आज के इस पोस्ट में हम इसी से जुड़ी जानकारी देने वाले हैं.

पर्सनालिटी डेवलपमेंट के कितने प्रकार होते हैं (types of personality development in hindi) यह भी हम इस पोस्ट के माध्यम से जानेंगे ताकि आप भी अपना खुद का डेवलपमेंट करना सीख सकें. आज के दौर में एजुकेशन का काफी महत्व है जो इंसान पढ़ा लिखा ना हो उसकी आजकल कहीं भी कोई कदर नहीं है. यह तो रहने दीजिए सिर्फ पढ़ाई लिखाई करना भी काफी नहीं है जब तक आप किसी प्रोफेशनल कोर्स को नहीं करते तब तक आप को अच्छी नौकरी भी नहीं मिल सकती है. सोसायटी इतनी ज्यादा तेज गति से डेवलप हो रही है कि लोगों को उसके अनुसार बदलाव करना भी काफी जरूरी है. नहीं तो वही बात होती है कि हंसों के बीच में बगुला. अगर आप वक्त के साथ नहीं बदलते तो फिर आप आजकल के दौर के फैशन के साथ घुलमिल नहीं सकेंगे और आप सबसे अलग दिखेंगे. यही वजह है कि लोग खुद की पर्सनालिटी को भी बेहतर बनाने की कोशिश में लगे रहते हैं.

पर्सनालिटी डेवलपमेंट कोर्स से हमें क्या फायदा होता है और हमें यह क्यों करना चाहिए इसके बारे में भी हम आपको आगे इस पोस्ट में बताएंगे. जब किसी बड़ी कंपनी या फिर किसी बड़े इंडस्ट्री में जाते हैं तो वहां पर बात करने का तरीका, चलने का तरीका, लोगों के साथ बर्ताव करने का तरीका, सब कुछ बिल्कुल अलग दिखाई देता है. जो कि लोगों को आदत नहीं होती है और जिसे खुद से डेवलप करना भी काफी मुश्किल होता है इसीलिए हम इसे सीखने का इरादा करते हैं. अगर आपको सच में जानना है कि पर्सनैलिटी डेवलपमेंट PD क्या होता है (What is personality development in hindi) तो इस पोस्ट को पूरा पढ़ें. आपको इससे जुड़ी हर जानकारी मिल जाएगी और आप भी इसके महत्व को समझ जाएंगे.

पर्सनैलिटी डेवलपमेंट PD क्या है –  What is personality development in hindi

personality development kya hai hindi

पर्सनालिटी डेवलपमेंट यानी कि व्यक्तित्व विकास ऐसा क्षेत्र है जहां पर बहुत ज्यादा रिसर्च और प्रैक्टिस किया जाता है. स्टडी का एक ऐसा क्षेत्र है जो गतिशील है और लगातार इसमें विकास होता रहता है और हर दिन कुछ नयी चीज़ सामने आती रहती है. यह दूसरों की मदद करने के लिए सेल्फ हेल्प से परे जाता है.

सेल्फ डेवलपमेंट में ऐसे प्रैक्टिस को शामिल किया जाता है जो खुद की अवेयरनेस को बढ़ावा देने, नए आशाओं के समझ और एहसास में सुधार करके किसी व्यक्ति के जीवन की क्वालिटी में सुधार लाती है.

पर्सनालिटी डेवलपमेंट का सही अर्थ self respect (आत्मसम्मान) को बढ़ाना, Social skill (सामाजिक कौशल) में सुधार और Capability (क्षमता) विकसित करना है.

अगर हम बड़े सामाजिक पैमाने पर देखें तो पर्सनालिटी डेवलपमेंट की परिभाषा और अर्थ यह है कि लोग इसके जरिए खुद की अवेयरनेस और self-respect को बढ़ाते हैं, अपने अंदर छुपे हुए टैलेंट को भी दूसरों को दिखाने में एक्सपर्ट हो जाते हैं. खुद को खुश रखते और दूसरों को भी खुशी देने में माहिर हो जाते हैं.  ये हासिल कैसे किया जाता है तो मैं आपको बता दूं कि यह सोशल और प्रोफेशनल इंटरेक्शन के द्वारा हासिल किया जाता है जिसके अंतर्गत उम्मीदों इच्छाओं और अपने जिंदगी की लक्ष को दूसरों के सामने एक्सप्रेस किया जाता है.

इंसान एक सोशल एनिमल होता है और किसी भी पर्सनैलिटी डेवलपमेंट पहल का एक जरूरी हिस्सा लोगों का स्किल होता है. दूसरों के साथ बिहेव करते समय एक्सेप्टेबल, pleasant, assertive और कॉन्फिडेंट पर्सनालिटी पेश करना एक जरूरी स्किल है जिसे सिखा जा सकता है.

Self-help यानी खुद की मदद करने के लिए सीखने को अनगिनत किताबें उपलब्ध है जो किसी भी इंसान को उसके व्यक्तित्व को समझने में मदद करती है. सेल्फ इंप्रूवमेंट जैसे गोल्स को पूरा करने में मदद करती है और किए गए प्रोग्रेस को जानने में भी मदद करते हैं.

अगर हम इतिहास में झांके तो हमें कई ऐसे लोग मिलेंगे जिनकी जिंदगी हमारे लिए प्रेरणा के स्रोत बन सकते हैं या फिर रोल मॉडल की तरह काम कर सकते हैं इसके अलावा आज के समय में भी कई ऐसी शख्सियत होती हैं जो दूसरों के लिए इंस्पिरेशन के रूप में काम करते हैं. वह सभी एक्स्ट्राऑर्डिनरी सेल्फ मोटिवेशन रखने वाले लोग थे जो कि कभी ना हार मानने की नेचर के थे.

Types of Personality – पर्सनैलिटी के प्रकार

Average:

सबसे आम प्रकार वे लोग हैं जो खुलेपन में कम जबकि न्यूरोटिसिज्म और एक्सट्रोवर्शन में उच्च हैं.

Reserved:

इस प्रकार के लोग दूसरे लोगों के सामने खुले हुए नहीं होते हैं लेकिन वे भावनात्मक रूप से स्थिर होते हैं. ऐसे लोग कम बोलने वाले, सहमत और कर्तव्यनिष्ठ होते हैं.

Role-models:

ये लोग प्राकृतिक रूप से लीडर होते हैं जिनमें neuroticism का लो लेवल होता है और agreeableness, extraversion, openness, conscientiousness में हाई लेवल होते हैं. ऐसे लोग नए विचारों को सुनते हैं और विश्वसनीय होते हैं.

Self-centered:

इस तरह के लोग दिमागी रूप से काफी स्ट्रांग होते हैं लेकिन लोगों से बातचीत करने में सामाजिक होने में, सहमत होने में, और कर्तव्यनिष्ठा में काफी पीछे होते हैं.

Personality Development stages – पर्सनैलिटी डेवलपमेंट के चरण

देखा जाए तो पर्सनालिटी डेवलपमेंट के कुल 5 स्टेटस होते हैं जो इस प्रकार है.
1. Oral Stage
2. Anal Stage
3. Genital (Oedipal) Stage
4. Latency Stage
5. Adolescence Stage.

एरिकसन (1950) का मानना ​​है कि जन्म से लेकर मृत्यु तक पूरे जीवनकाल में पर्सनालिटी को बिल्डअप किया जाता है. इस अवधि को उसके द्वारा आठ stages में विभाजित किया गया है. प्रत्येक stage में अपनी खास विशेषताओं को चिह्नित किया जाता है और इमोशनल क्राइसिस से प्रभावित होता है, व्यक्ति की विशेष संस्कृति और समाज के साथ उसकी बातचीत जिसमें वह एक हिस्सा है.

1. Oral Stage

यह stage शून्य से डेढ़ साल तक चलता है. इस पीरियड में बच्चे का शरीर का सबसे सेंसेटिव पार्ट होता है जिससे वह खुशी और आनंद का एहसास करता है. बच्चे की मां उसकी देखभाल कैसे करती है इससे बच्चों को भरोसा होता है साथ ही उसके आसपास की दुनिया पर वह भरोसा नहीं करता है. अगर उसकी हर ख्वाहिश पूरी होती है रोज संतुष्ट होता है तो एक विश्वास डिवेलप करता है और विश्वास करता है कि दुनिया उसकी देखभाल करेगी.

अगर उस बच्चे की लगातार पूरी नहीं होती है तो इस बार एक अविश्वास बच्चे को एहसास दिलाता है कि उसके आसपास की दुनिया उसके लिए ठीक नहीं है और वह जो चाहता है वह उसे खो देता है. शुरू के 6 महीने जिस वक्त बच्चे दूध पिया करते हैं और जिस वक्त उनके दांत निकलने शुरू होते हैं और बच्चे और मां के लिए काफी मुश्किल भरा वक्त होता है. यदि ठीक तरीके से बच्चे को संभाला जाता है तो बच्चे का विश्वास मजबूत हो जाता है और वह इस बात की उम्मीद करता है की वो हमेशा सुरक्षित है.

2. Anal Stage

जब ओरल स्टेज खत्म होने वाला होता है बच्चा अपने दम पर चलने लगता है, बात करने और खाने में भी सक्षम हो जाता है. वह अपने पास मौजूद किसी चीज को रखने में भी समर्थ हो जाता है. यहां तक कि वह पेशाब और लैट्रिन को रोकने या फिर छोड़ने में भी सक्षम होता है.

अब बच्चों और अधिक खुशी के लिए अपने मुंह पर ही निर्भर करता है. बच्चे को पखाना या फिर पेशाब करने में भी इसी प्रकार की परेशानी नहीं होती जिस तरह के उसे उसके माता पिता देते हैं. बच्चों को सिखाया जाता है कि पेशाब कहां से करना है, कैसे बात करना चाहिए और लैट्रिन के लिए कहां जाना चाहिए. जब बच्चा खुद से शौच के लिए जाने के काबिल हो जाता है तो उसमें फिर शर्म और संदेह भी आने लगता है और विश्वास के विकास की ओर ले जाता है वह अपने कामों पर भी कंट्रोल करने लगता है और यहां तक कि कुछ हद तक अपने आसपास के लोग नियंत्रण होता है.

3. Genital (Oedipal) Stage

इस स्टेज में बच्चे के अंदर इनिशिएटिव डिवेलप और मजबूत होता है. इसमें जो बच्चे नाकामयाब होते हैं वह अपराध के एक मजबूत भावना उनमें विकसित होती है. यह समय बच्चे के जीवन के 3 से 6 साल तक होती है. यानी कि स्कूल जाने के पहले का समय यह होता है. यह पहल कितना मजबूत है यह इस बात पर डिपेंड करता है कि बच्चे को कितनी शारीरिक आजादी दी गई है और उसकी इच्छा कितनी मजबूत है. अगर उसे अपने बिहेवियर या अपने हक के बारे में बुरा महसूस करने के लिए प्रेरित किया जाता है तो वह अपनी खुद की शुरुआत की एक्टिविटीज के बारे में अपराध की भावना के साथ बढ़ सकता है.

एरिकसन (1950) का मानना ​​है कि बच्चा घर पर पहली पहल तब करता है जब वह विपरीत लिंग के अपने माता-पिता में इमोशनल इंटरेस्ट देखता है. माता-पिता अंततः उसे निराश करते हैं. अब यहां माता पिता को अपने बच्चों को इस बारे में मदद करनी चाहिए अगर लड़का है तो पिता को अपने बेटे को समझाना चाहिए और अगर लड़की हो तो उसकी मां को मदद करनी चाहिए.

4. Latency Stage

स्टेज 6 से 11 साल की उम्र को कवर करता है यानी कि जिस वक्त बच्चा स्कूल में पढ़ता होता है. अब बच्चे में लॉजिक भी उत्पन्न हो जाते हैं. लॉजिकली किसी से भी बातचीत कर सकता है. और वैसे डिवाइसेज का भी उपयोग कर सकता है जो कि बड़े लोग इस्तेमाल करते हैं. इस वक्त सेक्सुअल इंटरेस्ट और उसकी इच्छा प्यूबर्टी तक दबी हुई होती है. अगर उसे प्रोत्साहित किया जाए और उसे मौका दिया जाए तो वह एडल्ट मैटेरियल उनको उपयोग करने की क्षमता पर विश्वास हासिल कर लेता है.

एडल्ट मैटेरियल का उपयोग ना कर पाने पर उसमें अलग भावना का विकास होता है. ऐसे बच्चों में साथियों के साथ समस्याएं पैदा हो सकते हैं. उसे अपने साथ पढ़ने वाले लड़कों से बातचीत करने और दूसरों पर कम निर्भर रहने के लिए इनकरेज करना चाहिए.

5. Adolescence Stage

इस स्टेज को उथल पुथल की पीरियड के रूप में माना जाता है. आमतौर पर 12 से 13 साल से शुरू होता है और 18 कल तक बढ़ सकता है. किशोरावस्था, बचपन से मेच्योरिटी तक इस ट्रांजिशनल प्रोसेस के दौरान एडल्ट और कभी-कभी बच्चे की तरफ बिहेव करते हैं. माता-पिता भी एक एडल्ट इंसान की अपनी नई भूमिका होने स्वीकार करने की भावना दिखाते हैं.

इस पीरियड के दौरान वह अपने पर्सनैलिटी डेवलपमेंट करने के लिए कुछ हीरो को फॉलो करने लगता है और उसका फैन बन जाता है और उसके बताए गए रास्ते पर भी चलने लगता है और ऑपोजिट सेक्स के साथ अपनी किस्मत को भी आजमाता है.

Personality Development course – पर्सनैलिटी डेवलपमेंट का कोर्स

कोई भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में पर्सनैलिटी डेवलपमेंट कोर्स का लाभ उठाकर अपने पर्सनालिटी को एक नया आकार दे सकता है चाहे वह सेल्फ कॉन्फिडेंस डिवेलप कर रहा हो या फिर असर्टिव नेचर का हो यह पॉजिटिव इमेज प्रोजेक्ट कर रहा हो.

अगर आप ऑनलाइन जाएंगे तो आपको बहुत तरह के फ्री कोर्सेज उपलब्ध मिलेंगे जो आपके अच्छे पर्सनालिटी को डिवेलप करने में मदद कर सकते हैं. वर्कशॉप, सेमिनार और ट्रेनिंग प्रोग्राम को स्पेशलिस्ट के द्वारा पर्सनैलिटी डेवलपमेंट के कई क्षेत्रों में स्केल प्रदान करने के लिए डिजाइन और ऑर्गेनाइज किया जाता है.

सॉफ्ट स्किल, स्किल ग्रूमिंग, वॉइस एंड एक्सेंट, पब्लिक स्पीकिंग, प्रेजेंटेशन स्किल्स, टाइम मैनेजमेंट, बिजनेस एटिकेट्स, लीडरशिप कम्युनिकेशन स्किल आदि विषयों की एक विस्तृत स्पेक्ट्रम शामिल है. एक अच्छा प्रश्न आईटी दुनिया के लिए अपने आप को एक पॉजिटिव इमेज पेश करने के बारे में है. पर्सनैलिटी डेवलपमेंट का एक अवसर हर पल हर व्यक्ति और हर अवसर में शामिल होता है. अपनी पूरी कैपेबिलिटी का एहसास करने के लिए पर्सनैलिटी डेवलपमेंट का उपयोग जरूर करें.

Importance of Personality Development – पर्सनैलिटी डेवलपमेंट का महत्व

पर्सनालिटी डेवलपमेंट एक इंसान को तैयार करता है और उसे अपने खुद के mark बनाने में मदद करता है. इंसानों को दूसरों का थ्योरी फॉलो करने के लिए उनकी खुद की एक शैली होनी चाहिए. दूसरों की नकल ना करें. आपको आसपास के लोगों उदाहरण स्थापित करने की आवश्यकता है. पर्सनालिटी डेवलपमेंट ना केवल आपको अच्छा और प्रजेंट करने के लायक बनाता है बल्कि आपको मुस्कुराहट के साथ दुनिया का सामना करने में भी मदद करता है.

जिंदगी में होने वाले तनाव और परेशानियों को दूर करने में पर्सनैलिटी डेवलपमेंट एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह पर्सनालिटी को जीवन के पॉजिटिव चीजों को देखने के लिए encourage करता है. मुस्कान के साथ सबसे खराब कंडीशन का भी सामना करने में यह काम करता है. मुस्कान ऐसी चीज है जो आधे से ज्यादा परेशानियों प्राप्ति दूर कर देती है इसके साथ ही आपके तनाव और चिंताओं को भी दूर किया जा सकता है.

पर्सनालिटी डेवलपमेंट आपको जीवन में पॉजिटिव एटीट्यूड डिवेलप करने में मदद करता है. नेगेटिव एटीट्यूड वाला हर इंसान हर कंडीशन में एक प्रॉब्लम पाता है. आसपास के लोगों की आलोचना करने के बजाय पूरी करें और उसी के लिए सॉल्यूशन ढूंढने की कोशिश करें. याद रखेगी कोई समस्या है तो उसका हल भी है. कभी भी अपना आपा ना कोई क्योंकि इससे स्थिति और बदतर हो जाती है.

यह व्यक्ति को समय की पाबंदी करने के लिए मदद करता है. साथी यह सीखने की इच्छा को भी बढ़ाता है, लोगों के दिए हुए राय पर लचीलापन रवैया रखने की एबिलिटी देता है, दूसरों को मदद करने के लिए आगे बढ़ने की पर्सनालिटी डिवेलप करने में मदद करता है. दूसरों के साथ वाले शेयर करने में हमेशा आगे रहे यह सभी बातें एक व्यक्तित्व के विकास में महत्वपूर्ण होती हैं.

Advantages of Personality Development- पर्सनैलिटी डेवलपमेंट के फायदे

पर्सनैलिटी डेवलपमेंट का हमारी जिंदगी में काफी महत्व है यह तो हम जान चुके हैं. यह हमारे जिंदगी को बेहतर बनाने में भी काफी मदद करते हैं यह भी आप अच्छे से समझ गए होंगे. तो चलिए आप जान लेते हैं कि किस किस तरह के हमारी जिंदगी में देते हैं.

  • स्वयं की जागरूकता – Awareness of self
  • खुद का ज्ञान – Self-Knowledge –
  • आत्म-पहचान और आत्म-सम्मान का निर्माण – Building self-identity and self esteem
  • आध्यात्मिक विकास – Spiritual Development
  • कौशल विकास – Talent development
  • क्षमता की पहचान – Identifying potential
  • स्वयं के लिए जिम्मेदारी की स्वीकृति – Acceptance of responsibility for self
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाना – Enhancing the quality of life
  • शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार – Improving physical and mental health
  • आकांक्षा की पूर्ति खिलाड़ी – अपनी जिंदगी में बेचने खिलानाAspiration fulfillment
  • सामाजिक क्षमताओं में सुधार – Improving social abilities

संक्षेप में

आज के पोस्ट में अपनी जाना की पर्सनालिटी डेवलपमेंट क्या है (What is personality development in hindi). इसके साथ ही अपने यह भी जाना कि इसका क्या महत्व है और लोगों में पर्सनालिटी डेवलपमेंट कितने प्रकार के होते हैं. जब कोई बच्चा पैदा होता है तो उसमें किसी तरह का कोई व्यक्तित्व नहीं होता है लेकिन समय के साथ साथ एक अलग ही एक्ट व्यक्तित्व बनता जाता है और जो उसके वयस्क होते होते नजर आने लगता है. सभी इंसानों की पर्सनालिटी एक दूसरे से अलग होती है. लेकिन एक सोशल और फ्रेंडली पर्सनालिटी क्यों उम्मीद हर कोई रखता है. इसलिए आज के पोस्ट में हमने जाना है कि पर्सनालिटी के चरण यानी इसके stages कौन-कौन से हैं.

आज के इस दौर में लोगों को सबसे अलग होना पड़ता है ताकि वह सफलता उस के कदम चूम सके. आज सभी की ख्वाहिश होती है कि वह मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर सके और इसके लिए जीत और पढ़ाई भी करते हैं लेकिन सिर्फ पढ़ाई ही कर लेने से एक अच्छी कंपनी में काम नहीं मिल सकता बल्कि इसके लिए कम्युनिकेशन स्किल भी बहुत अच्छी होनी चाहिए. यही वजह है कि लोग एपर्सनालिटी डेवलपमेंट का कोर्स भी करते हैं. मैं उम्मीद करता हूं कि आपको यह पोस्ट जरूर अच्छी लगी होगी. अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो इसे फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम, और व्हाट्सएप में अधिक से अधिक शेयर करें.

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