MS-DOS क्या है और इसका इतिहास क्या है

बहुत कम लोग ही जानने की कोशिश करते हैं की MS-DOS क्या है (What is MS-DOS in Hindi)? वैसे जो स्कूल,कॉलेज या फिर इंस्टिट्यूट में पढ़ते हैं उन्हें कंप्यूटर सब्जेक्ट में इसके बारे में जानने को मिल जाता है लेकिन बाकि दूसरे लोगों को इसके बारे में सुनने को मिल जाये वही बहुत है. कोई बात नहीं है आज आपने MS-DOS का परिचय क्या है औरMS-DOS कैसे सीखे ये जानने की कोशिश की है तो आपकी ये इच्छा इस पोस्ट के साथ पूरी हो जाएगी. जब कोई कंप्यूटर सिखने के लिए किसी इंस्टिट्यूट को ज्वाइन करता है तो सबसे बेसिक कोर्स DCA में MS-DOS सिखने के लिए मिलता है. वैसे तो देखने में इसका interface पूरा काला होता है लेकिन ये काफी पावरफुल होता है क्यों की इस में हमे कमांड का प्रयोग करना होता है. MS-DOS commands के जरिये हम बहुत सारे कामों को आसानी से पूरा कर सकते हैं. आज भी लोगों को इसकी जरुरत कभी कभी पड़ जाती है.

आपके तो पता ही होगा की ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है.  यूजर और कंप्यूटर हार्डवेयर के बीच कम्युनिकेशन करने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग होता है.  आपने देखा होगा की जब कोई इंसान किसी दूसरे देश में जाता है और उसे उस देश की भाषा नहीं आती तो इसके लिए वो एक transalator को साथ में रखता है ताकि हर भाषा को समझ सके.  ठीक उसी तरह कंप्यूटर को हम अपनी बात बताने के लिए इनपुट डिवाइस के द्वारा डाटा देते हैं जिससे ऑपरेटिंग सिस्टम समझकर डाटा को प्रोसेस करता है और फिर हमे हमारी भाषा में वापस आउटपुट दे देता है.

आज  के समय में MS-DOS का इस्तेमाल नहीं  होता है लेकिन फिर भी इसका command shell जिसे windows command line भी बोलते हैं,  कुछ यूजर के द्वारा प्रयोग किया जाता है. ज्यादातर लोग माइक्रोसॉफ्ट विंडोज में माउस के जरिये ही काम करना पसंद करते हैं.  जबकि MS-DOS में काम करने के लिए commands का इस्तेमाल किया जाता है. यानी की सिर्फ text लिख कर ही कमांड देते हैं और काम करते हैं इस में माउस से काम नहीं होता.

MS-DOS क्या है – What is MS-DOS in Hindi

MS DOS kya hai hindi me

MS-DOS का परिचय

MS-DOS का फुल फॉर्म Microsoft Disk Operating System होता है. ये Microsft द्वारा develop किया गया operating सिस्टम है जो x-86 प्रोसेसर का इस्तेमाल का इस्तेमाल करता है. पहला माइक्रोसॉफ्ट विंडोस ऑपरेटिंग सिस्टम MS-DOS के ऊपर ही run करता था. आज भी विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम DOS को सपोर्ट करता है. इसे command line पर आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसमे सारे कमांड्स text form enter किये जाते हैं graphical user interface नहीं होता.

Disk Operating system के परिवार में MS-DOS सबसे अधिक और सामान्य तोर प्रयोग होने वाला सदस्य है. 1980-1990 के बीच में IBM PC – Compatible computer system में यही ऑपरेटिंग सिस्टम मुख्य choice थी. फिर समय बीतने के साथ ही DOS की जगह graphical user interface ने लिया जैसे Windows Operating System. ये एक single user, single-tasking computer operating system है. ये अभी तक का सबसे सफल ऑपरेटिंग सिस्टम रहा है क्यों की ये बहुत साधारण और छोटे साइज का होता है.

MS-DOS का अविष्कार किसने किया?

MS-DOS को शुरुआत में 86-DOS बोला जाता था. इसे Tim Peterson ने लिखा था जिन्हे इस का father भी बोला जाता है. इसका अधिकार Seattle Computer product के पास था. 86-DOS को माइक्रोसॉफ्ट ने $75000 में खरीद लिया और फिर 1982 में इसने एक IBM PC के साथ MS-DOS 1.0 के नाम से release किया.

MS-DOS का इतिहास – History of MS-DOS  in Hindi

अगस्त 1981 में IBM ने अपना पहला पर्सनल कंप्यूटर the IBM PC लांच किया, जिसमे माइक्रोसॉफ्ट 16 bit ऑपरेटिंग सिस्टम MS-DOS 1.0 के साथ आया . ये माइक्रोसॉफ्ट का पहला ऑपरेटिंग सिस्टम है, और ये  पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाला OS है. MS QDOS (Quick and Dirty Operating System) के नाम को बदलकर ही DOS 1.0 रखा गया, जिसे माइक्रोसॉफ्ट कंपनी ने Seattle कंपनी से खरीद लिया. QDOS को CP/M eight bit operating system के clone के रूप में develop किया गया था, ताकि उस वक़्त प्रयोग होने वाले सबसे पॉपुलर बिज़नेस एप्लीकेशन के कम्पेटिबल हो सके. Wordstar और dBaseउस वक़्त उस वक़्त सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले एप्लीकेशन थे. CP/M (Control Program for Microcomputers) का प्रोग्राम gary Kildal ने लिखा था.

QDOS का प्रोग्राम Tim Peterson ने लिखा था जो Seattle Computer Products कंपनी के एम्प्लोयी थे. इस प्रोग्राम को लिखने में उन्हें 6 weeks का वक़्त लगा. चलिए DOS के इतिहास को और विस्तार से जानते हैं.

1973 : यही वो साल था जब Gary Kildall ने PL/M langauge में एक simple operating system लिखा. उन्होंने इसका नाम CP/M रखा जिसका फुल फॉर्म Control Program/Monotor (Control program for Microcomputer) है.

1979 : इस साल 2 प्रमुख version रिलीज़ किये गए.

  • फरवरी में Apple कंप्यूटर ने DOS 3.2 रिलीज़ किया.
  • Aplle Computer ने DOS 3.2.1 version को रिलीज़ क्या.

1980 : अप्रैल के महीने में Tim Peterson ने Seattle Computer Products के 8086 पर आधारित कंप्यूटर (intel 16-bit 8086 CPU)  ऑपरेटिंग सिस्टम लिखना शुरू किया. जब Digital Research ने CP/M 86 ऑपरेटिंग सिस्टम रिलीज़ करने में देर कर दी तब सततलकपुटेरप्रोडक्टसने अपना खुद का डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने का फैसला कर लिया.  QDOS को CP/M के clone के रूप में डेवेलोप किया गया ताकि उस समय के बिज़नेस एप्लीकेशन जैसे Wordstar और dBase के साथ वो काम कर सके. Digital Research में काम करने वाले Gary Kildall ने CP/M (Control program for Microcomputer) को 7 साल पहले लिखा था और सामान्य तोर पर प्रयोग होने वाला ये पहला ऑपरेटिंग सिस्टम था.

Seattle Computer Products ने अगस्त में QDOS 0.10 (Quick and Dirty Operating System) की रचना की. Peterson के द्वारा लिखी गई DOS 1.0 4000 lines में लिखा हुआ प्रोग्राम था. वैसे इसे लिखने में करीब 6 हफ्ते का समय लगा. QDOS का प्रोग्राम CP/M से थोड़ा अलग था.  बाद में माइक्रोसॉफ्ट ने Peterson को hire कर लिया. इस ऑपरेटिंग सिस्टम को बनाने में काफी कम समय लगा फिर भी ये काफी अच्छा काम किया.

Tim peterson ने सितम्बर में Microsoft को अपना 86-DOS प्रोग्राम दिखाया जिसको उन्होंने 8086 chip के लिए लिखा था.

दिसंबर में Seattle Computer Products ने QDOS का नाम बदलकर 86-DOS रख दिया और इसे 0.3 version के रूप में release किया. माइक्रोसॉफ्ट ने 86-DOS के मार्किट के non-exclusive rights भी खरीद लिए.

1981 : फ़रवरी में पहली बार इस को IBM के prototype  microcomputer में run कराया गया. इसी साल जुलाई के महीने में माइक्रोसॉफ्ट ने Seattle computer से DOS के पुरे अधिकार खरीद लिए  MS-DOS नाम भी रख दिया गया. इसके अगले ही महीने में IBM ने मार्किट में IBM 5150 PC Personal Computer उतारा जिसमे 4.77 MHz Intel 8088 CPU, 64 KB RAM, 40 KB ROM, एक 5.25 inch की Floppy Drive और PC-DOS था जिसकी कीमत US $3000 था. बनावट में ये QDOS का improved version था.

1982 : मई के महीने में माइक्रोसॉफ्ट ने IBM PC के लिए इसका 1.1 रिलीज़ किया. ये double sided floppy disk drive को support करता था. इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ने 1.25 version को release किया जो IBM compatible computers के लिए बनाये गए  1.1 version से मिलता जुलता था.

1983 :मार्च के महीने में MS-DOS 2.0 रिलीज़ किया गया जिसे scratch के द्वारा rewrite किया गया था जो 10 MB hard drives को support और 360 KB Floppy Drive को support करता था.

1984 : IBM PCs के लिए DOS 2.1 version release किया गया.

1986 : माइक्रोसॉफ्ट ने DOS 3.2 version लांच किया जो 3.5 inch और 720 Kb का floppy disk drive को support करता था. John Socha ने इस साल Norton Commander 1.0 version रिलीज़ किया.

1987 : IBM ने $120 में Disk Operating System 3.3 version लांच किया.

1988 : Digital Research ने CP/M को DR DOS में बदल दिया. माइक्रोसॉफ्ट ने Disk Operating System 4.0 के साथ ही graphical/mouse interface भी लांच किया. ये version successful नहीं रहा.

1989 : John Socha ने Norton Commander 3.0 रिलीज़ की. इस वक़्त तक Disk Operating System applications के लिए मार्किट mature हो चूका था.

1990 : Russia के लिए Soviat Market में इस साल माइक्रोसॉफ्ट ने russian Microsoft Soft Disk Operating System 4.01 का version रिलीज़ किया. इस में version 3.3 कम फीचर्स दिए गए थे.

1991 : जून के महीने में डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम 5.0 release की गई जिसने सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले main version DOS 3.3 की जगह ले ली. इस में full screen editor, undelete और unformat की सुविधा भी दी गई.

1993 : माइक्रोसॉफ्ट ने इस साल डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम 6.0 को अपग्रेड किया और साथ Double Space Disk Compression की सुविधा दी. शुरुआत के 40 दिनों में ही इस version की 1 million copies मार्किट में sell हुई.

1994 : फ़रवरी में इसका 6.21 release किया गया. इसमें से lawsuit की वजह से double space disk compression को हटा दिया गया. और फिर Disk Opeartion System 6.22 release किया गया जिसमे Drive Space के नाम से disk compression को वापस लाया गया.

1995 : IBM ने फ़रवरी में PC Disk Operation System 7 को introduce किया जिसमे integrated data compression की शुरुआत की गई और जो stac electronics के द्वारा प्रदान की गई इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ने Disk Opearting System 7 को रिलीज़ किया जो Windows 95 का पार्ट था. जब windows run करता था तो इसमें long filename को support करने की क्षमता विकसित की गई.

1997 : Microsoft ने 7.1 version को release किया गया.  95 और OEM service release 2 का ही एक हिस्सा था. ये FAT 32 hard disk ddrive को support करने के काबिल थी और ये efficient  के साथ साथ large storing capacity देने में capable था.

MS-DOS के फायदे (MS-DOS Advantages in Hindi)

MS-DOS 1980 और 1990 के दशक के बीच सबसे ज्यादा उपयोग होने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम था. ऐसा ऑपरेटिंग सिस्टम जिसे सभा पसंद तो नहीं करते लेकिन ये सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुआ और Bestseller था. इस ने 1990 में Microsoft को मार्किट में खड़ा होने में  बहुत बड़ा योगदान दिया. तो चलिए जान लेते हैं इसके advantages और डिसादवंतागेसके बारे में.

  • ये ऐसा ऑपरेटिंग सिस्टम है जो छोटे capacity वाले सिस्टम में भी काम करता है.
  • पूरा OS single Modern RAM chip में store किया जा सकता है.
  • इस में बहुत आसानी से BIOS को access किया जा सकता है.
  • Process को direct control करने का फीचर देता है.
  • इसका size बहुत कम होता है इसीलिए ये किसी भी windows ऑपरेटिंग सिस्टम की तुलना में बहुत जल्दो boot करता है.
  • Special purpose program लिखना काफी आसान होता है भले ही कितना लम्बा प्रोग्राम हो क्यों की इसमें कोई graphic नहीं होता.
  • DOS बहुत lightweight होता है इसीलिए ये hardware तक direct access देता है.
  • ये single-user operating system है इसीलिए इस में multitasking का overhead नहीं होता.

MS-DOS के नुकसान (Disadvantages of MS-DOS in Hindi)

  • इस में Multitasking support नहीं करता. इस में एक बार में सिर्फ एक ही एप्लीकेशन पर काम कर सकते हैं.
  • जब 640 MB के ऊपर memory को address करना होता है तो इसमें memory access करना difficult होता है.
  • जब भी hardware में कुछ interruption होता है तो खुद ही मैनेज करना पड़ता है.
  • ये एक single user ऑपरेटिंग सिस्टम है. इस में एक वक़्त में सिर्फ एक ही यूजर काम कर सकता है.

MS-DOS कैसे सीखे

जब आप किसी कंप्यूटर इंस्टिट्यूट को ज्वाइन करते हैं  DCA का कोर्स जरूर करे इस में कंप्यूटर से जुडी बेसिक कोर्स कराई जाती है. इसी कोर्स में आपको MS-DOS सिखने को मिल जायेगा इस में मुख्य रूप से कमांड्स होते हैं. इन कमांड्स की जानकारी होने से आप इस में बहुत अच्छी तरह से काम कर सकेंगे.

इसके अलावा आप यूट्यूब में वीडियो देख कर भी MS-DOS सिख सकते हैं. इसके लिए आपको कहीं भी जाने की जरुरत नहीं है. यूट्यूब में इसके लिए कई सारे टूटोरियल उपलब्ध हैं.

संक्षेप में

आज के वक़्त में वैसे तो इस Disk Operating System का उपयोग न के बराबर ही होता है लेकिन फिर भी आप को अपने ऑपरेटिंग सिस्टम command prompt के रूप में ये जरूर मिल जायेगा. जो लोग कंप्यूटर कोर्स करने के लिए जाते हैं तो उन्हें MS-DOS का परिचय दिया ही जाता है साथ ही इसके कमांड्स की नॉलेज जरूर दी जाती है. ये एक तरह से छुपा हुआ रहता है लेकिन अपना काम जरूर करता रहता है. आपको ये पोस्ट MS-DOS क्या है (What is MS-DOS in Hindi) कैसी लगी? इस पोस्ट में हमने ये भी जाना की MS-DOS के फायदे और नुकसान क्या हैं. 

हमने इस पोस्ट में आपको ये भी बताया की MS-DOS कैसे सीखे . हमारे ब्लॉग में आपको नयी नयी जानकारी मिलती रहेगी और हम चाहते हैं की आपको हर तरह की जानकारी हिंदी में दी सके जो आपको तकनीक की दुनिया में मदद करे. इसके लिए हम पूरी मेहनत के साथ पोस्ट लिखते हैं. आप हमारे ब्लॉग से जुड़ने के लिए ईमेल के द्वारा newsletter को सब्सक्राइब जरूर कर लें. अगर आपको ये पोस्ट पसंद आयी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करें. इस पोस्ट को  फेसबुक, व्हाट्सएप्प, इंस्टाग्राम,ट्विटर में शेयर करें.

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