Civil Engineering क्या है और इसके फायदे ?

जब से बच्चे स्कूल में पढ़ना शुरू करते हैं उसी वक़्त से उनको अच्छी करियर बनाने के लिए उसके माता पिता और शिक्षक हौसला देते हैं. वैसे तो कुछ माता पिता बच्चों को भविष्य में क्या पढ़ना है और क्या करना है खुद ही decide कर लेते हैं लेकिन आजकल अधिकतर पेरेंट्स बच्चों पर ही छोड़ देते हैं की उन्हें क्या अच्छा लगता है किस एरिया में इंटरेस्ट है उसी में पढाई करे और उसी के अनुसार जॉब भी करें. अगर आप इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पढाई करना चाहते हैं और जानना चाहते हैं की सिविल इंजीनियरिंग क्या है (What is Civil Engineering in hindi) और इसके फायदे क्या हैं ? तो इस पोस्ट में आपके इससे जुड़े सभी doubts को हम क्लियर करने की कोशिश करेंगे. वैसे तो इंजीनियरिंग कई तरह के होते हैं जैसे मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सॉफ्टवेयर, एयरोनॉटिकल इत्यादि लेकिन हर इंजीनियरिंग का अपना अलग ही महत्व है. आज के पोस्ट के माध्यम से आप समझ पाएंगे कि सिविल इंजीनियरिंग का क्या काम होता है.

हमारे आसपास चारों तरफ हमे अनेक चीज़ें दिखाई देती है जैसे घर में इस्तेमाल होने वाले फ्रिज, टीवी, वाशिंग मशीन, कार, बाइक, बिल्डिंग इत्यादि सभी इंजीनियरिंग का कमाल है.  ये सभी चीज़ें ऐसी कंपनियों मे बनायीं जाती है जो इंजीनियरिंग द्वारा ही निर्मित होती है. इन्ही में से इंसानों की ज़िन्दगी में घर, ब्रिज, सड़कें बहुत जरुरी होती हैं. जो सिविल इंजीनियरिंग के ही देन होती हैं. वैसे कोई भी पढाई आसान नहीं होती लेकिन इतनी कठिन भी नहीं होती की पढ़ी जा न सके. बस थोड़ा मन लगा के पढाई करने की जरुरत होती है.

जब बच्चे हाई स्कूल में होते हैं और थोड़े समझदार हो जाते हैं तो उन्हें भी ये समझ में आ जाता है की 12th के बाद क्या करना होगा. लेकिन फिर भी कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जिनको ये नहीं मालूम होता है की आखिर ये सिविल इंजीनियर किसे कहते हैं (What is Civil engineering in Hindi)? इसकी पढाई कैसे करते हैं और सिविल इंजीनियरिंग के बाद क्या करे. एक और सवाल छात्रों के मन में ये आता है की सिविल इंजीनियर की सैलरी कितनी होती है.

सिविल इंजीनियरिंग क्या है – What is Civil Engineering in Hindi

civil engineering kya hai hindi

ये एक प्रोफेशनल इंजीनियरिंग शाखा है जिस में कोर्स पूरा करने के बाद पढाई करने वाले छात्र सिविल इंजीनियर बनते हैं. इंजीनियरिंग के इस ब्रांच के अंतर्गत बिल्डिंग, घर, सड़क, बाँध, नहर, एयरपोर्ट के डिज़ाइन, निर्माण और maintenance वाले प्रोजेक्ट पर काम किया जाता है. यानी की किसी खाली प्लाट में घर कितने बड़े एरिया में बनेगा उसका डिज़ाइन कैसा होगा,  कितने कमरे होंगे, बाथरूम, किचन और हाल कहाँ पर होगा ये सभी डिज़ाइन किया जाता है. डिज़ाइन के आधार पर सभी जरुरत वाले मटेरियल जैसे ईंट, सीमेंट, बालू, सरिया इत्यादि मंगाया जाता है और इसके निर्माण का काम किया जाता है. इन सभी को पूरा करने में सिविल इंजीनियर का सबसे अहम् रोल होता है.

जिस तरह से घर का निर्माण किया जाता है उसी तरह से डैम, नहर, स्टेडियम, शॉपिंग माल्स, रोड, पाइपलाइन का भी काम किया जाता है. आज आप शहरों को और विकसित होते हुए देखते होंगे, इनमे काफी अच्छी डिजाइनिंग और लेटेस्ट कंस्ट्रक्शन मेथड का इस्तेमाल किया जाता है. पारम्परिक तरीके से इसे भी कुछ भागों में बांटा गया है. मिलिट्री (सैन्य) इंजीनियरिंग के बाद इसे सबसे पुराना इंजीनियरिंग शाखा माना जाता है और इसका नाम civil engineering इसे military engineering से अलग पहचान देता है. Civil Engg. का इस्तेमाल publis sector वाले क्षेत्र नगरपालिका से सरकारी राष्ट्रीय कामो तक, और private sector में पर्सनल घरों से लेकर international companies तक किया जाता है.

सिविल इंजीनियर कैसे बने – How to become a Civil Engineer in India

जो भी सिविल इंजीनियर बनना चाहते हैं उनके पास 2 तरीके हैं जिससे वो सिविल इंजीनियर  हैं.

10th पास करने के बाद सिविल इंजीनियरिंग का Diploma कोर्स करके  

  1. छात्र जब 10th का एग्जाम पास कर लेते हैं तो interested स्टूडेंट राज्य सरकार के Technical Education board द्वारा conduct किये जाने वाले entrance test में बैठना पड़ता है.एंट्रेंस एग्जाम में मिलने वाले रैंकिंग के आधार पर छात्रों को select किया जाता है और फिर उन्हें एडमिशन मिलता है. कुछ ऐसे भी polytechnique कॉलेज हैं जिन में दसवीं क्लास के marks के आधार पर एडमिशन दे दिया जाता है.
  2. एडमिशन मिल जाने के बाद छात्र को 3 साल तक Diploma in Civil Engineering की पढाई करनी होती है जिसके बाद वो किसी जॉब में जूनियर इंजीनियर के पद पर ज्वाइन कर सकते हैं.
  3. इसके अलावा डिप्लोमा इंजीनियर बनने के बाद भी इंजीनियरिंग कॉलेज में डिग्री कोर्स कर सकते हैं. इसके लिए आपको डिग्री कॉलेज में Second Year में एडमिशन लेना पड़ता है.

10+2 के बाद सिविल इंजीनियरिंग का Degree कोर्स करके

  1. Science (Phy+Chem+Math) के साथ 12th पास करने के बाद IIT entrance exam में बैठ सकते हैं. इस में merit के अनुसार B.E में एडमिशन मिलता हैं.  एडमिशन मिलने के बाद 4 साल डिग्री प्रोग्राम ज्वाइन कर के Degree in Civil Engg कर सकते हैं.
  2. सफलतापूर्वक सिविल इंजीनियरिंग का डिग्री कोर्स पूरा कर लेने के बाद सरकारी, सह-सरकारी या प्राइवेट सेक्टर में जाके Engineer के पद पर जॉब ज्वाइन कर सकते हैं. इसके अलावा combined Engineering Services एग्जाम में पास कर के भारतीय सरकार के technical post में नौकरी ले सकते हैं.

सिविल इंजीनियर की सैलरी

प्राइवेट सेक्टर में किसी सिविल इंजीनियर  को शुरुआती वक़्त में 25000 से 35000 तक की सैलरी मिल सकती है. कुछ अनुभव हो जाने के बाद experience के आधार पर 3-4 साल में 100000 per month तक की कमाई कर सकते है. इसके अलावा एक सिविल इंजीनियर freely भी काम कर सकते हैं.

शहरों में अक्सर आप देखते होंगे की बड़े बड़े प्रोजेक्ट्स को बनाने का काम builders और ठेकेदारों को दिया जाता है. अगर आप अपने काम में expert हैं और आप अपने talent के अनुसार काम माहिर हैं तो उसके आधार पर आप को इन projects में काम मिल सकता है. इसके अलावा घरों के निर्माण करने वाले ठेकेदारों से  मिलकर आप अनेकों तरह के काम ले सकते हैं.

Government sector सिविल इंजीनियर को Sub-Division अफसर या असिस्टेंट इंजीनियर की पोस्ट में रखा जाता है. जो की भविष्य में जाकर आगे chiefengineer बन सकते हैं. इस पद पर काम करने वाले को अतिरिक्त अलाउंस भी दिया जाता है जिसमे housing facility, medical भी शामिल हैं.

सिविल इंजीनियर क्या काम करता है – What does a civil engineer do?

  • लम्बी अवधि वाले परियोजना, नक़्शे, सर्वे रिपोर्ट, और दूसरे डाटा को analyse करना ताकि प्रोजेक्ट को अच्छे से Plan और डिज़ाइन की जा सके.
  • प्रोजेक्ट के प्लानिंग और risk analysis stages के दौरान निर्माण लागत, सरकारी नियमों का पालन, पर्यावरण को होने वाले नुकसानों पर विचार करना.
  • प्रोजेक्ट की पूरी तैयारी हो जाने के बाद लोकल, स्टेट, और सुरक्षा विभाग को permit एप्लीकेशन को जमा करना ताकि  वेरिफिकेशन हो जाए की  चल रहा है वो सर्कार के  नियमों का पालन करते हुए चल रहा है.
  • बुनियाद मज़बूत है या नहीं उसके लिए मिटटी पर किये गए टेस्ट को देखन और अच्छे से अवलोकन करन.
  • प्रोजेक्ट की आर्थिक बजट का अनुमान लगाने के लिए material, equipment और labour पर होने वाले खर्च का cost estimation report तैयार करना.
  • Government standard और इंडसट्री के अनुसार जरुरत वाली transportation system, structure और hydraulic system के इस्तेमाल का प्लान डिज़ाइन सॉफ्टवेयर पर तैयार करना.
  • कंस्ट्रक्शन के जगह में reference point, site layout, Building location को स्थापित करने के लिए सर्वे को पूरा करना और देखना.
  • Public और private infrastructure के maintenance, repair और replacement को मैनेज करना.

सिविल इंजीनियरिंग के फायदे – Advantages of civil engineering in hindi

  • सिविल इंजीनियर बनकर आप सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के जॉब कर सकते हैं. इसके अलावा आप चाहे तो आप खुद की consultancy खोल सकते हैं जहाँ से आप के संपर्क में अनेकों बिल्डर और ठेकेदार आएंगे जिनके साथ independently काम कर सकते हैं साथ ही अपने साथ कुछ लोगों को भी काम दे सकते हैं.
  • अगर आप अपनी रूचि से सिविल इंजीनियर बनते हैं तो आपको अपने द्वारा बनाये गए घरों, पुलों, डैम, फ्लाईओवर, इमारतें स्कूल और कॉलेज के बिल्डिंग देखकर संतुष्टि महसूस होती है.
  • एक इंजीनियर होने के नाते आपको नए नए लोगों से मिलने का मौका मिलता है और साथ ही नयी जगहों पर काम करने का भी मौका मिलता है. इससे आपका सर्किल  भी बढ़ता है.
  • आप जिनलोगों के लिए घर बनाते हैं वो आपको ज़िन्दगी भर याद करेंगे और हमेशा आपकी इज़्ज़त भी करेंगे इससे आपको अपने काम करने में बहुत ख़ुशी मिलती है साथ  ईमानदारी के साथ काम करने का प्रोत्साहन भी मिलता है.
  • इस में जैसे जैसे आप अनुभवी होते जाते हैं तो जॉब में आपकी सैलरी बढ़ती जाती है और अगर आप फ्रीलीकाम करते हैं तो इसमें retirement का कोई अनिवार्यता नहीं है.
  • इस में आप जो  हैं वो लोगों के सामने दीखता है और हर रोज़ इन से लोगों का जीवन प्रभावित होता है. जैसे अगर आप एक रोड बनाते हैं और वो  टिकाऊ  है तो जाते आपके काम को अपनी आँखों से देखेंगे और आपकी तारीफ़ करेंगे.
  • Creativity का ढेर सारा मौका इसमें मिलता है. अगर आप एक creative mind रखते हैं तो आप अपने सुझाव से अच्छा ख़ासा नाम कमा सकते हैं.
  • construction कंपनी में काम करने वाले लोग ज्यादा होते हैं और इंजीनियर बहुत कम होते हैं जिससे की सभी इंजीनियर को लोगों द्वारा उनके ज्ञान और पद के अनुसार इज़्ज़त दी जाती है.
  • इस में research के मौके, नए materials  प्रयोग, और नए टेक्नोलॉजी हमेशा अपडेट होते रहते हैं. इससे काम करने में काफी मज़ा आता है.

 

सिविल इंजीनियरिंग  के नुक्सान – Disadvantages of civil engineering in Hindi

  • सिविल इंजीनियरिंग होने के नाते आपको अधिकतर समय आउटडोर काम करना पड़ता ही है. कभी कभी कड़ी धुप में भी काम  पड़ता है, शहर से दूर सुनसान क्षेत्र में जाकर अपने प्रोजेक्ट से जुड़े काम को करना होता है.
  • जॉब के शुरूआती दौर में काम मिलना बहुत मुश्किल होता है क्यों  को अनुभवी बन्दे चाहिए होते हैं कोई भी नहीं चाहता की नए नेनेर को लेकर काम सिखाया जाए.
  • आपने अक्सर देखा और सुना होगा की नया बना हुआ पूल टूट गया या जो नयी सड़क बानी थी उसमे जल्दी गड्ढे पड़ गए. ऐसे में इसमें काम करने वाले इंजीनियर को दोष दिया जाता है. इससे काफी बदनामी होती है.
  • हमारे देश भारत में बाहर होने वाले अधिकार सिविल काम सर्कार द्वारा आयोजित होती है. जिसकी वजह से जिस कॉलिटी काम होना चाहिए वो काम नहीं हो पाता.
  •  जो अच्छे मेरिट वाले स्टूडेंट्स होते हैं वो अधिकतर civil की बजाय दूसरे ब्रांच को ही चुनते हैं, इस वजह से दूसरे ब्रांच के लड़कों को इससे अधिक सैलरी मिलती है.

संक्षेप में

आज भारत में इंजीनियर की कमी नहीं है हर साल लाखों इंजीनियर अपना कोर्स पूरा करके इंजीनियर की डिग्री हासिल करते हैं इसीलिए हमने आज बताया की सिविल इंजीनियरिंग क्या है (What is Civil engineering in Hindi) और साथ ही यह भी समझ गए होंगे कि सिविल इंजीनियरिंग का क्या काम होता है. पढाई पूरी करने के बाद अच्छे पैसे मिले ये कौन नहीं चाहता है इसीलिए हमने यहाँ इसकी भी जानकारी दी की सिविल इंजीनियर की सैलरी कितनी होती है. हमारे आसपास हम नए नए घर की डिज़ाइन, सड़क, और पूल देखते हैं और रोज़ाना इनका उपयोग भी करते हैं. इन से हमे काफी आसानी होती है.

हमने आपको ये भी बताया की सिविल इंजीनियरिंग के फायदे और नुक्सान क्या हैं. कई लोग अक्सर ये भी सोचते हैं की जो एक इंजीनियर बनते हैं तो उनको क्या क्या काम  करना पड़ता है. इन सभी सवालों के जवाब हमने इस पोस्ट के माध्यम से आपको देने की कोशिश की है. आपको कोई भी सवाल पूछना हो तो आप कमेंट बॉक्स में जाकर पूछ  सकते हैं. हम आपके सवालों का जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी फेसबुक, ट्विटर,इंस्टाग्राम में भी जरूर शेयर करें.

28 COMMENTS

    • Ji kar sakte hain lekin uske pehle aapko India me 3-5 saal ka working experience hona jaruri hai. Jab aap itna experience ho jate hain to Mumbai, Hyderabad ya Bangalore me consulties se contact kar sakte hain jo aapke liye interview arrange kara dete hain jahan bhi vacancy hoti hai.

  1. Bhai isme hme pahle to 2 semester milakar aapko basic chij jaise math, physics, chemistry , English computer, basically drawing, environmental atmoshphere aur finally technical math padaya jayega 1 semester me and second semester me 4-4 subject lagenge uske bad aapko 2nd year me aapke main subject drawing, technical math surveying material technology and building construction degine ye sab sikhaya jayega

  2. As slamu alaiqum wasim bhai
    बहुत अच्छा लिखा है सर आप ने मेरा भी शिक्षा ब्लॉग है मदद कि दरख्वास्त है
    ईमेल अड्रेस निचे दे रहा हू भाई
    मैंने बहुत सारे आर्टिकल लिखें हुए है अपने ब्लॉग पर
    जैसे
    इंजीनियरिंग क्या
    सिविल इंजीनियर कैसे बने
    कम्प्यूटर क्या है
    संज्ञा किसे कहते है
    प्रोनाउन किसे कहते है आदि तो कृपया मेरा ब्लॉग विजिट कीजिये बहुत useful आर्टिकल hai

  3. Sir diploma me mera lateral entry hai to kya government job ke liye vacancy km aati hai Lateral entry valo ke vo jo three years diploma hota hai usme apply nhi kr skte hai

  4. Wasim Akram भाई आपने सिविल इंजीनियरिंग के बारे में बहुत अच्छी जानकारी दी मुझे आपका ब्लॉग पढ़कर अच्छा लगा.

  5. Assalamu Alaykum
    Vasim Bhai mene is saal 12th arts exam me pass hua hu. me janna Chahta hu ki 12th arts ke bad civil engineering ho sakti ke please reply Dena Bhai mere career ka saval he khuda hafiz.
    Wassalm…..

    • Walekum Assalam

      Kisi bhi prakar ka engineering tabhi kar sakte hain jab aapne ISc. me padhai kiya ho. Aapko ISc. karne ke baad engineering ka rasta khulta hai. lekin aap abhi bhi diploma me admission me le sakte hain aur civil engg. karne ke liye diploma ka course kar sakte hain.

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