बीपीओ क्या है और इसमें क्या काम होता है

अपने कहीं ना कहीं तो जरूर सुना होगा कि बीपीओ क्या है (What is BPO in Hindi) क्योंकि आज के समय में शहरों में आउटसोर्सिंग का काम काफी ज्यादा हो रहा है पर यह खासकर आईटी कंपनियों द्वारा किया जाता है. इस पोस्ट के माध्यम से हम जानेंगे कि इस का फुल फॉर्म क्या है. इसमें कई नाम शामिल है जो दूसरी कंपनियों के लिए दिए गए काम को करते हैं. आपके नेटवर्क संबंधित जब कोई समस्या पैदा होती होगी तो आप कस्टमर केयर को फोन लगाते हैं और फिर कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव हमारी मदद करते हैं और हमारे समस्याओं का समाधान भी करके देते हैं. इस तरह के कामों को भी बीपीओ के अंतर्गत ही किया जाता है .

आपको यह सुनकर हैरानी होगी कि अमेरिका के लोग कॉल संबंधित समस्याओं के लिए कस्टमर केयर एयरटेल से बात करते हैं उसका सेंटर भी हमारे देश भारत में हीं होता है और यहां के लड़के ही एग्जीक्यूटिव के रूप में उन्हीं के एक्सीडेंट यानी कि उनकी जुबान में बात करते हैं जिससे उनको पता नहीं चलता है कि वह जो कस्टमर केयर बैठा हुआ है अमेरिका में है या फिर भारत में. इसका पता मुझे तब चला जब मैं एक डिस्कवरी का प्रोग्राम देख रहा था और जिसमें एक विदेशी बैठा हुआ था और कुछ लड़कों से बातचीत करते हुए पता चला कि वह लड़के अमेरिकन कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव के रूप में काम करते हैं और वहां के उपभोक्ताओं की मदद करते हैं.

इसके अलावा बीपीओ में और भी कई तरह के कामों को लिया जाता है जैसे की डिजाइनिंग के फील्ड में होने वाले रिवर्स इंजीनियरिंग वाले काम. मेरे कई दोस्त इसके अंतर्गत काम कर चुके हैं जो थर्ड पार्टी के रूप में काम करने के लिए बीपीओ के अंतर्गत भेजे जाते हैं और उनसे रिवर्स इंजीनियरिंग के लिए काम किया जाता है. इस पोस्ट के माध्यम से हम जानेंगे कि बीपीओ का जॉब कैसे पाए और इसके लिए कितनी क्वालिफिकेशन चाहिए. तो यह जानने के पहले चलिए पहले यह जान लेते हैं कि आखिर बीपीओ क्या होता है (What is BPO in Hindi) .

बीपीओ क्या है – What is BPO in Hindi

BPO kya hai hindi

अगर हम आम भाषा में बात करें तो बीपीओ एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कॉन्ट्रैक्ट देकर किसी थर्ड पार्टी के द्वारा बिजनेस वर्क कराए जाते हैं जैसे Human Resouces, Accounting, Customer Care/Call Centre की सेवाएं इत्यादि.

बीपीओ को इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी इनेबल्ड सर्विसेज (ITES) के नाम में भी जाना जाता है. बीपीओ एक बिजनेस प्रैक्टिस है जिसमें एक संगठन किसी अन्य कंपनी को काम करने के लिए काम पर रखता है जिसे काम पर रखने वाले संगठन को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए अपने खुद के बिजनेस की आवश्यकता होती है. बीपीओ की खुद की जड़े मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री ही है जिसमें मैन्युफैक्चरिंग कंपनी या दूसरे कंपनियों को हायर करते हैं और प्रोडक्ट के अलग अलग पार्ट उनसे बनवाते हैं.

उदाहरण के लिए जान ले कि कोई एक बड़ी प्रोडक्ट है जिसमें कई छोटे-छोटे प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जाता है. इन सभी छोटे प्रोडक्ट्स को खुद कंपनी नहीं बनाते बल्कि दूसरे कंपनियों से बनवा कर इन्हें मांगाती हैं और इसके लिए उन्हें पैसे दिए जाते हैं. हालांकि दूसरे बिजनेस में संगठनों ने सालों से इसी तरीके को अपनाया है. अब बीपीओ के उपयोग में इतना विस्तार हो गया है कि सभी प्रकार के संगठन प्रॉफिट बिजनेस ओं चैनल प्रॉफिट बिजनेस हो यहां तक कि सरकारी कार्यालय और एजेंसियां संयुक्त राज्य अमेरिका में बीपीओ सेवा प्रदाताओं के साथ उत्तरी अमेरिका और दुनिया भर में कॉन्ट्रैक्ट करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं.

मई 2018 में जारी बीपीओ सर्विस ग्लोबल इंडस्ट्री अलमानार 2013-2022 के अनुसार बीपीओ सेवा क्षेत्र ने 2017 में 144.9 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू जनरेट किया.

बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग के अंतर्गत जो संस्थाएं काम करते हैं वह 2 तरीके से काम करते हैं.

  • Back office Function
  • Front Office Function

Back office Function : बैक ऑफिस फंक्शन को इंटरनल बिजनेस फंक्शन के नाम से भी जाना जाता है जिसके अंतर्गत अकाउंटिंग, आईटी सर्विसेज, ह्यूमन रिसोर्सेज(HR), क्वालिटी एश्योरेंस(QA), और पेमेंट प्रोसेसिंग आते हैं.

Front Office Function : इसी तरह से फ्रंट ऑफिस फंक्शन के अंतर्गत कस्टमर रिलेशन सर्विसेज, मार्केटिंग और सेल्स इत्यादि आते हैं. यह संगठन कुछ खास फंक्शन को भी और सर्च कर सकते हैं जैसे पेरोल और ह्यूमन रिसोर्सेज को भी पूरा का पूरा आउटसोर्स कर सकते हैं.

बीपीओ का फुल फॉर्म क्या है – Full form of BPO in Hindi & English

Business Process Outsourcing

व्यावसायिक प्रक्रिया आउटसोर्सिंग

बीपीओ का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?

बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग यानी कि बीपीओ छोटे और मीडियम बिजनेस के लिए बहुत अधिक लाभ दिलाती है. क्योंकि बड़े कॉरपोरेट अपने गैर प्रमुख बिजनेस फंक्शन का मैनेजमेंट करने के लिए इफेक्टिव सॉल्यूशन की तलाश करते हैं. BPO बड़े बिजनेस संगठनों के लिए कम कीमत पर अधिक कुशलता से रोजमर्रा के बिजनेस रिकॉर्ड का मैनेजमेंट करने के लिए मदद करता है. यह डाटा बैकलॉग बचाता है और उनकी डिसीजन लेने की प्रोसेस के अनुसार प्रभाव से बचने में मदद करता है.

अतिरिक्त नौकरियों की दूसरी कंपनियों को आउटसोर्सिंग करना बहुत फायदेमंद ऑप्शन है. इसकी वजह से गैर प्रमुख बिजनेस डाटा प्रोसेसिंग तरीके और बैक ऑफिस task प्रोफेशनली तरीके से पूरे कर लिए जाते हैं. जिससे कि बिजनेस रिकॉर्ड एक्यूरेट तरीके से मैनेज और अपडेट हो जाते हैं.

बीपीओ के प्रकार – types of BPO in Hindi

पूरी दुनिया में बीपीओ कंपनियां अपनी सेवाएं अलग-अलग संगठनों को देती है इसलिए उनके सर्विस प्रोवाइडर लोकेशन के अनुसार अलग-अलग भागों में विभाजित किया गया. जिससे हम इस प्रकार से जानते हैं.

Offshore outsourcing

ऑफ सोर्स आउटसोर्सिंग उसे कहते हैं जब एक ऑर्गनाइजेशन किसी सेवा को प्राप्त करने के लिए किसी दूसरे देश की कंपनी के साथ में कॉन्ट्रैक्ट करती है.

Onshore outsourcing

इससे हम डॉमेस्टिक आउटसोर्सिंग के नाम से भी जानते हैं और यह तब कहलाता है जब एक ऑर्गनाइजेशन सेवा प्राप्त करने के लिए same कंट्री ऑर्गनाइजेशन को हायर करते हैं या फिर उसके साथ कॉन्ट्रैक्ट करती है.

Nearshore outsourcing

जब किसी संगठन के द्वारा पड़ोसी देशों की कंपनियों से सेवा प्राप्त करने के लिए कांटेक्ट साइन किया जाता है तो उसे Nearshore outsourcing कहते हैं.

बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग को कभी कभी इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी इनेबल्ड सर्विसेज ITES के नाम से भी जाना जाता है. ये एक ऐसा नाम जो पहचाना जाता है जो आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर आउटसोर्सिंग को करने में सक्षम बनाती है.

KPO, LPO और RPO

Knowledge process outsourcing (KPO):

KPO का फुल फॉर्म Knowledge Process outsourcing होती है.
नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग या केपीओ का एक प्रकार होता है. केपीओ में मूल कार्यों की और सोर्सिंग शामिल है जो मूल कंपनी को लागत में लाभ दे सकती है. लेकिन निश्चित रूप से वैल्यू एडिशन में मदद करती है. केपीओ को आउट सोर्स की जाने वाली प्रोसेस आमतौर पर बीपीओ की तुलना में अधिक स्पेसिफिक और नॉलेज पर आधारित होती हैं. केपीओ में शामिल सेवाएं रिसर्च एंड डेवलपमेंट, कैपिटल और बीमा बाजार सेवाएं, कानूनी सेवाएं बायो टेक्नोलॉजी, एनिमेशन और डिजाइन आदि से संबंधित है. जोकि केपीओ के लिए आउट सोर्स की जाने वाली सामान्य गतिविधियां है.

Legal Process outsourcing (LPO):

आउटसोर्सिंग भी एक प्रकार का KPO ही है जो हमने आपको पहले पॉइंट में बताया है. जैसा कि इसका नाम बताता है कानूनी सेवाओं के लिए विशेष है. कानूनी दस्तावेजों का मसौदा तैयार करने और सलाह देने के लिए कानूनी अनुसंधान करने में काम करता है.

Research Process outsourcing (RPO):

अनुसंधान प्रक्रिया और सर्चिंग या RPO भी KPO का एक अन्य प्रकार है. यह रिसर्च फॉर एनालिसिस वाले कामों के बारे में रिफर करता है. बायोटेक कंपनियां इन्वेस्टमेंट फर्म, और मार्केटिंग एजेंसी उन संगठन के प्रकार है जो सेवाओं के लिए RPO में इंगेज होती हैं.

बीपीओ के फायदे

जो भी संगठन बीपीओ लेती है वह नीचे दिए गए फायदे के लिए इनसे काम करवाती हैं.  आमतौर पर बीपीओ के समर्थकों द्वारा यह फायदे शामिल है.

Financial Benefit:

ऑर्गेनाइजेशंस अक्सर यह देखते हैं कि एक अवसर प्रोवाइडर कम लागत पर बिजनेस प्रोसेस को कर सकता है. अगर व्यक्ति यह पाते हैं कि एक आउटसोर्स प्रोवाइडर के साथ कॉन्ट्रैक्ट करके बहुत तरीके से परिणाम स्वरूप धन की बचत कर सकते हैं जैसे कि टैक्स सेविंग.

Flexibility:

बीपीओ कॉन्ट्रैक्ट अनुमति देता है की फ्लैक्सिबिलिटी के साथ में बिजनेस प्रोसेस को पूरा करे, जिससे उन्हें बदलते बाजार की गतिशीलता पर बेहतर रिएक्शन मिल सके.

Competitive advantage:

बीपीओ संगठनों को उन प्रोसेस को अवसर के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देता है जो उनकी बिजनेस और मिशन के लिए महत्वपूर्ण नहीं है, जैसे संगठनों को अपने संसाधनों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की अनुमति मिलती है जो उन्हें बाजार में अलग पहचान देते हैं.

Higher quality and better performance:

हाई क्वालिटी क्योंकि बीपीओ प्रोवाइडर का कोर बिजनेस विशिष्ट प्रोसेस का प्रदर्शन करते हैं जो भी करने के लिए काम पर रखे गए हैं. सिद्धांत को मद्देनजर रखते हुए हाई लेवल पर काम करने का यह हमेशा ध्यान रखते हैं और हमेशा एक्यूरेसी, एफिशिएंसी और स्पीड के साथ में काम करके देते हैं.

बीपीओ में जॉब कैसे करें

अगर आप सोच रहे हैं कि बीपीओ में जॉब मिलना मुश्किल काम है तो मैं आपको बता देता हूं कि वास्तव में इस में जॉब प्राप्त करना बहुत ही आसान होता है.

अगर आप बीपीओ में जॉब करना चाहते हैं तो यह जानकारी आपके लिए जरूरी है कि इसमें दो प्रकार से जॉब उपलब्ध होते हैं.

  • पहली जॉब होती है 12वीं Pass के लिए
  • ग्रेजुएशन किए हुए लोगों के लिए

12वीं पास बीपीओ की नौकरी बहुत आसान है और इसमें वेतन कम होता है. वेतन पैकेज के मामले में ग्रेजुएशन लेवल की बीपीओ जॉब बेहतर होती है. क्योंकि एक फ्रेशर को ऑर्गनाइजेशन और काम के आधार पर 150000 से 280000 तक मिल सकता है.

अगर आप भी बीपीओ में नौकरी पाना चाहते हैं तो आपको बस सभी प्रमुख जॉब पोर्टल्स में अपनी प्रोफाइल अपडेट करना होगा जैसे shine.com, naukri.com, Monsterjobs.com. आपको कई कंसलटेंट संपर्क करेंगे जो आपको एक पैसा भी नहीं लेंगे. आपको इंटरव्यू के लिए आमंत्रित किया जाएगा और अगर आप इंटरव्यू क्लियर कर लेते हैं तो फिर आप को जॉब दे दिया जाएगा.

बीपीओ की विशेषताएं

भारत में अपने बिजनेस प्रोसेस को करने वाली कंपनियां अब केवल लागत में कमी को नहीं देख रही हैं वे आम तौर पर क्वालिटी हासिल करना चाहते हैं:

  • प्रोसेस में इंप्रूवमेंट और एफिशिएंसी- तेजी से बदलाव और अधिक उत्पादक
  • लागत में बचत
  • कम से कम मैन पावर का इस्तेमाल
  • बेहतर क्वालिटी- कम error/rework
  • एक नई बाजार का निर्माण और उसमें मजबूती
  • मुख्य प्रोसेस पर बढ़ा हुआ ध्यान- नए सेवाओं और उत्पाद का विकसित करना
  • बिजनेस वैल्यू और रणनीति भेदभाव का निर्माण

बीपीओ कैंडिडेट बनने के लिए क्वालिटीज

बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग के लिए पदों को भरने के दौरान कुछ बहुत ही विशेष क्वालिटी और स्किल सेट है जो भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक व्यक्ति को आश्वस्त करना चाहिए. जिस व्यक्ति को हायर किया जाता है उसे एक विशेष कार्य दिवस के दौरान कम से कम 60 लोगों से बात करनी होगी. ताकि उनके पास फर्म के लिए कुशलता पूर्वक काम करने में सक्षम होने के लिए स्पेशल स्किल्स होने चाहिए.

1. Excellent Communication Skills

यह सबसे पहली शर्त होती है यानी कि अगर कोई भी बीपीओ में जॉब करना चाहता है उसके पास इंग्लिश भाषा में बहुत ही अच्छी कम्युनिकेशन स्किल होनी चाहिए. उन्हें इस भाषा को बोलने में फ्लूएंट होना चाहिए साथ ही बढ़िया राइटिंग, रीडिंग और लिसनिंग स्किल भी जरूरी है. रिक्रूटमेंट करने वाले लोग किसी कैंडिडेट की परख उसके भाषा से ही कर लेते हैं कि इसमें कितनी क्वालिटी है और उसके अनुसार वह एलिमिनेशन करते हैं और अच्छा कैंडिडेट मिलने पर उसका सिलेक्शन भी कर लेते हैं.

2. Work efficiency

सबसे इफेक्टिव तरीके से काम पूरा करने के बारे में सोचते समय दो महत्वपूर्ण चीजें ध्यान में आती हैं. यह है ऑर्गनाइजेशन और स्पीड. जब कॉल सेंटर में काम काफी ज्यादा बढ़ जाता है तो यह कैंडिडेट पर निर्भर करता है कि वह किस तरीके से इन को मैनेज करता है और मल्टीटास्क के रूप में काम करके सभी को समय के साथ पूरा करता हो. यह ऑर्गेनाइजेशन के लिए जरुरी स्किल एंप्लोई को कम गलतियां करने में मदद करता है इस तरीके से उनकी गति भी बढ़ जाती है. इसीलिए आखिर में कम समय में अच्छी क्वालिटी वाले काम किए जा सकते हैं.

3. Interpersonal skills

जो आइडियल कैंडिडेट होते हैं वह सामाजिक रूप से अजीब नहीं होने चाहिए. उनका नेचर वह फ्रेंडली होना चाहिए और उनके कम्युनिकेशन स्किल में इतना अट्रैक्शन होना चाहिए कि कोई भी बात करें तो वह उस पर फिदा हो जाए और बात करके ही दूसरों की परेशानी को हल करने में माहिर होने चाहिए. सपोर्ट टीम जो होती है किसी कंपनी की फ्रंटलाइन होते हैं यानी उन्ही का चेहरा सबसे सामने होता है. यही लोग कस्टमर से सीधे तौर पर बात करते हैं पर कंपनी के गुणवत्ता को दूसरों के सामने दिखाने का मौका इन्हीं के पास होता है. जब किसी कस्टमर से बात करें तो उन पर कंपनी की अच्छी इंप्रेशन पड़े इन्हीं पर निर्भर करता है.

4. Ability to think on the spot

हाजिर जवाबी एक ऐसी क्वालिटी है जो हर किसी के पास नहीं होती है. जिसके पास होती है उसके व्यक्तित्व की हमेशा चर्चा की जाती है कि यह इंसान किसी भी बात का जवाब देने में माहिर है. बीपीओ में काम करने वाला इंसान एक कठिन और ऐसे सवाल का सामना उसे करना पड़ सकता है जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी ना हो. जब इस तरह की स्थिति उत्पन्न होती है तो उन्हें एक तेज, टॉपिक से जुड़ा हुआ और सही जवाब देने की जरूरत होती है. इसकी जरूरत तभी पड़ती है जब कोई कस्टमर बहुत ही ज्यादा गुस्से में हो और उसे गुस्से में से बाहर निकाल कर उसके समस्याओं को भी हल करना होता है.

5. Knowledge Retention

कॉल सेंटर में काम कर रहे कैंडिडेट के पास ज्ञान का होना जरूरी है. जिसमें कॉल सेंटर में जिसकी कंपनी के लिए काम कर रहे हो उसके प्रोसेस के बारे में नॉलेज काफी जरूरी है क्योंकि जो कस्टमर होते हैं वह किसी भी वक्त कोई भी सवाल कर सकते हैं और उनकी संतुष्टि ग्राहक सेवा प्रतिनिधि का पहला कर्तव्य होता है. इस कौशल के बिना एक कैंडिडेट को काम पर रखना जल्दी से सीखना और जानकारी बनाए रखना है फिर मेन काम पर नेगेटिव इफेक्ट डाल सकते हैं.

संक्षेप में

आज के पोस्ट में अपने जाना की बीपीओ क्या है (What is BPO in hindi). इसके अलावा अपने यह भी जाना कि बीपीओ में जॉब कैसे करें. आज के समय में इस ऑर्गनाइजेशन में जॉब पाना और काम करना काफी आसान काम है. इसके अलावा हमने इस पोस्ट के माध्यम से यह भी बताया कि इसमें जॉब प्राप्त करने के लिए कितनी क्वालिफिकेशन होनी चाहिए. अगर आप 10th पास या फिर ग्रेजुएशन कर चुके हैं तो आपको अपने लेवल के लिए इसमें एक जॉब मिल सकता है. इसके लिए जो सबसे जरूरी चीज होती है वह होती है कम्युनिकेशन स्किल.

केपीओ क्या होती है और यह बीपीओ से किस प्रकार अलग है इसके बारे में भी हमने यहां पर जानकारी दी है. बीपीओ की विशेषताएं और फायदे क्या होते हैं यह भी आप अच्छे से समझ ही गए होंगे. किसी पढ़ाई कर रहे हैं स्टूडेंट के लिए बीपीओ में जॉब करना बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि इससे उनका कम्युनिकेशन स्किल बहुत ही इंप्रूव हो जाता है जो भविष्य में करियर बनाने में फायदेमंद होता है. हमें कमेंट करके जरूर बताएं कि यह पोस्ट आपको कैसी लगी? अगर आपको यह पोस्ट फायदेमंद लगी हो तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम, और व्हाट्सएप में अधिक से अधिक शेयर करें.

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