विरोधी अभी से ही दहशत में टीम इंडिया खिलाड़ी बड़े टूर्नामेंट का प्लेयर, 

रांची से लखनऊ तक तीन रेलवे जाेन ने रांची से बनारस जानेवाली ट्रेन काे लखनऊ तक विस्तार देने पर सहमति दे दी है। यह प्रस्ताव रांची रेल डिवीजन की ओर से भेजा गया था। 

इसकी पुष्टि रांची रेल डिवीजन ने भी की है। लेकिन, अब तक रेल मंत्रालय से हरी झंडी नहीं मिली है। क्याेंकि, अब रांची से बनारस केिलए ट्रेन का परिचालन शुरू हाे चुका है।

इसलिए, डिवीजन ने नई ट्रेन की जगह इस ट्रेन काे लखनऊ तक विस्तार देने की मांग की थी, जिसे लखनऊ तक चलाने में किसी काे आपत्ति नहीं है।अब निगाहें रेल मंत्रालय पर है, जहां से अभी तक हरी झंडी नहीं मिली है। क्याेंकि हरी झंडी की फाइल मंत्रालय में अटकी पड़ी है। अभी तक रांची से लखनऊ तक सीधी ट्रेन नहीं है।

इसकी मांग लंबे समय है। ज्ञात हो कि रांची रेल डिवीजन ने रांची से लखनऊ तक सीधी ट्रेन चलाने के लिए ट्राॅयल किया था, लेकिन यह ट्राॅयल फेल हाे गया। 

इस रूट पर सीधी ट्रेन चलाने पर रेलवे काे यात्री नहीं मिले थे। ट्रेनें खाली रही। रेलवे ने पूरी एसी ट्रेन चलाई थी। ट्रायल में पता चला कि इस ट्रेन का ऑपरेटिंग काॅस्ट भी नहीं निकल पा रहा था। 

इसलिए, रेलवे ने इस ट्रेन काे बंद कर दिया। रांची से बनारस चलने वाली ट्रेन बनारस स्टेशन पर सात से आठ घंटे तक यार्ड में खड़ी रहती है। इसलिए, रांची डिवीजन इसे लखनऊ तक चलाने के लिए प्रस्ताव भेजा था, जिस पर सबकी सहमति मिल गई।

ट्रेन के परिचालन से वाराणसी जाने वाले यात्रियों को भी फायदा होगा, क्योंकि एक और अतिरिक्त ट्रेन बनारस के लिए रांची से खुलेगी। ट्रेन के परिचालन शुरू होने से यात्री 15-16 घंटे के बीच लखनऊ पहुंच सकेंगे। इससे यात्रियों को काफी फायदा होगा। इसके लिए रांची रेल डिवीजन और दक्षिण-पूर्व रेलवे मुख्यालय की सहमति मिल गई है।

ट्रेन नहीं होने से रांची से खुलती हैं कई बसें भी मालूम हो क‍ि झारखंड में बड़ी संख्‍या में उत्‍तरप्रदेश के लोग रहते हैं। इन लोगों को बनारस, लखनऊ और अन्‍य शहरों तक जाने में काफी परेशानी होती थी। 

बड़ी संख्‍या में लोग बस से सफर करने को मजबूर नजर आते हैं। दर्जनभर बसें हर द‍िन शाम में यहां से बनारस और अन्‍य शहरों के ल‍िए रवाना होती हैं। ऐसे में इस ट्रेन के पर‍िचालन से इन यात्र‍ियों को काफी सुव‍िधा होगी।