BCCI पर उठे सवाल पंत से बड़ा था धोनी का अपराध,  फिर सजा अलग क्यों' 

नई दिल्ली: राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच में जमकर बवाल हुआ. अब ये मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है. रिषभ पंत द्वारा खिलाड़ियों को मैदान से ड्रेसिंग रूम बुलाने के इशारे पर फैंस जुदा राय व्यक्त कर रहे हैं. 

ऐसा ही एक वाकया साल 2019 में चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के मैच में हुआ था. तब CSK के कप्तान एमएस धोनी नाराज होकर मैदान पर आ गए थे और अंपायर से बहस करने लगे थे.

इस विवाद के बाद उन पर 50 फीसदी मैच फीस का जुर्माना लगा था. लेकिन दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान रिषभ पंत की 100 फीसदी मैच फीस काट ली गई.

जबकि पंत खुद मैदान पर भी नहीं गए. रिषभ पंत ने केवल डगआउट से रोवमेन पॉवेल की ओर वापस चले आने का इशारा कर रहे थे.

जबकि पंत खुद मैदान पर भी नहीं गए. रिषभ पंत ने केवल डगआउट से रोवमेन पॉवेल की ओर वापस चले आने का इशारा कर रहे थे.

चेन्नई को आखिरी ओवर में 18 रन की जरूरत थी और बेन स्टोक्स की पहली ही गेंद पर रवींद्र जडेजा ने छक्का लगा दिया. अगली गेंद नो बाल रही और तीसरी गेंद पर धोनी बोल्ड हो गए.

चौथी गेंद नो बाल करार दी गई जिसे बाद में वापस ले लिया गया और अप्रत्याशित रूप से धोनी  मैदान में उतरकर अंपायरों से बहस करने लगे. अगली गेंद पर दो रन बने और आखिरी गेंद पर मिशेल सैंटनर ने छक्का लगाकर CSK को जीत दिला दी थी.

धोनी के अमर्यादित रवैये के खिलाफ बीसीसीआई ने एक्शन तो लिया लेकिन उनकी केवल 50 फीसदी मैच फीस काटी गई. 

रिषभ पंत मैदान पर नहीं गए फिर भी काटी गई पूरी फीस BCCI के बयान में कहा गया कि कप्तान पंत और आमरे पर उनकी पूरी मैच फीस का जुर्माना लगाया गया है जबकि ठाकुर पर मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है. आमरे पर एक मैच का प्रतिबंध भी लगाया गया है.

 दरअसल नो बॉल विवाद में पंत ने रोवमेन पॉवेल और कुलदीप से वापस लौटने के लिये कहा. इस बीच दिल्ली के सहायक कोच प्रवीण आमरे मैदान पर चले गये थे. . रायुडू 47 गेंद में 57 रन बनाकर 18वें ओवर में आउट हुए.