Nasa क्या है और इसका हेडक्वार्टर कहाँ है?

आखिर ये NASA क्या है (What is NASA in Hindi) और इसका हेडक्वार्टर कहाँ है जो हमे अंतरिक्ष से जुड़ी ऐसी जानकारी देते हैं जिसके बारे में हमे कुछ भी मालूम नहीं होता है. इसके अलावा हम ये भी जानेंगे की NASA का चेयरमैन कौन है और इसका इतिहास क्या है.

वैसे तो हर देश ने अपना अंतरिक्ष संसथान स्थापित कर रखा है लेकिन जहाँ सबसे अधिक सफलता की बात आती है तो इसमें नासा का ही नाम सबसे ऊपर आता है.

अंतरिक्ष में जितनी दूरी तक का सफर नासा ने तय किया उतना अभी तक किसी ने भी नहीं किया है जिसके बारे में हम इस पोस्ट में आगे जानेंगे. नासा की फुल फॉर्म क्या है ये भी जानेंगे.

NASA Full Form

अभी हाल में ही इसके द्वारा भेजा गया कार के आकर का अंतरिक्ष यान पार्कर सोलर प्रोब सूर्य के सबसे नज़दीक पहुँचने वाला है जो सूर्य के रहस्य से पर्दा हटाएगा.

इसी तरह की बहुत सारी बातें हम यहाँ करेंगे तो उसके पहले चलिए जान लेते हैं की नासा की जानकारी और ये किस देश में है.

नासा क्या है – What is NASA in Hindi?

NASA एक अमरीकी सरकारी संस्थान है जो अंतरिक्ष से जुड़े विज्ञान और टेक्नोलॉजी के लिए काम करती है. अंतरिक्ष युग की शुरुआत तब हुई जब सोवियत संघ ने अपना उपग्रह Sputnik का प्रक्षेपण कर अंतरिक्ष में भेजा.

नासा की शुरुआत 1 अक्टूबर 1958 में President Eisenhower के द्वारा किया गया था.

इस संस्थान के गठन करने के पीछे का मुख्य उद्देश्य था अमेरिका को अंतरिक्ष exploration में आगे बढ़ाना साथ ही Aeronotics research के क्षेत्र में अमेरिका को विकसित किया जा सके.

नासा का कमान एक administrator के हाथों में होता है जिसका नाम president के द्वारा दिया जाता है और फिर वहां के senate के द्वारा इलेक्शन कर के confirm किया जाता है.

नासा की स्थापना के बाद से इसने अधिकतर अमेरिकी अंतरिक्ष अन्वेषण का नेतृत्व  किया है.

सबसे प्रमुख अपोलो चन्द्रमा लैंडिंग मिशन है इसके अलावा space shuttle भी प्रमुख है. अपोलो मिशन को अमेरिका ने तब किया जब उसे लगा की वो सोवियत संघ से अंतरिक्ष के क्षेत्र में पिछड़ रहा है.

उस वक़्त के राष्ट्रपति केन्नेडी ने मून लैंडिंग के मिशन द्वारा बता दिया वो किसी देश किसी भी क्षेत्र पीछे नहीं है.

इस मिशन के लिए करीब 20 बिलियन डॉलर खर्च किया गए जो 1960 के दशक के सबसे महंगे कार्य्रकमों में से एक था जिसका लक्ष्य मनुष्य के क़दमों को चाँद पर उतरना था.

Full Form of Nasa in English 

National Aeronautics and Space Administration

Full Form of Nasa in Hindi 

 राष्ट्रीय वैमानिकी और अंतरिक्ष प्रबंधन

नासा क्या करता है ये बहुत से लोगों को मालूम होता है लेकिन ज़्यादातर लोगों को मालूम नहीं होता है की ये संस्थान क्या क्या काम करती है.

एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष में जाकर ऑर्बिट में अनेक वैज्ञानिक रिसर्च करते रहते हैं. इनके द्वारा पृथ्वी के ऑर्बिट में छोड़े गए satellite हमारी पृथ्वी की ढेर सारी जानकारी हमे देती है.

साथ ही ये अंतरिक्ष के अनेक पहलुओं के बारे में हमे रोज़ाना नयी नयी जानकारी देती है. और सौर मंडल बेहतर तरीके से समझने में मदद करती है.

नासा का हेडडक्वार्टर कहाँ है?

नासा के काम के बारे में जानने के आलावा लोगों को ये भी जानना चाहिए की ये कहाँ पर है यानी नासा किस देश में स्थित है इसका हेडक्वार्टर कहाँ है तो मैं दूँ की ये संयुक्त राज्य अमेरिका के वाशिंगटन डीसी (Washington DC.) में स्थित है.

नासा का इतिहास?

नासा की स्थापना 1 अक्टूबर 1958 में की गई थी और तब से ये संस्थान लगातार कई सफलताएं हासिल कर चूका है और अंतरिक्ष में कई ग्रह और उपग्रह इंसानों को मुहैया कर चूका है.

इसके स्थापना हुए 60 साल बीत चूका है और इन 6 दशकों में मानव क्षमता और इसकी आकांक्षाओं की उड़ान की ऊंचाई काफी दूर पहुँच चुकी है.

नासा के गठन की शुरुआत तब हुई जब 1957 में सोवियत संघ ने अपने संस्थान से sputnik नामक satellite को अंतरिक्ष में भेजा.

उस वक़्त अमेरिका और रूस में कॉम्पिटेशन बहुत कड़ा था और विश्व युद्ध के बाद से दोनों देशों बीच शीत युद्ध चल रहा था.

इधर रूस ने इस satellite को अंतरिक्ष में भेजा वैसे ही अमेरिका भी अंतरिक्ष संस्थान बनाने की दिशा में काम करने लगा.

अंतरिक्ष और वैमानिक क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए अमेरिका ने अक्टूबर 1958 में नासा का गठन किया.

1961 ईस्वीं में Alan B. Shepherd Junior अंतरिक्ष में  वाले पहले इंसान बने. इसी साल प्रेसिडेंट केनेडी ने चाँद मिशन के बारे सबसे फेमस भाषण दिया.

John H. Glenn पहले इंसान बने जिन्होंने पृथ्वी के ऑर्बिट में पहुँचने का कारनामा किया.

इसके बाद 1963 में नासा ने bodies और aircraft को बिना wings के ऊपर lift करने के लिए रिसर्च करने लगा. ये रिसर्च 1978 तक जारी रहा.

2 साल बाद Edward H. White Junior वो पहले अमेरिकी इंसान बने जिन्होंने अंतरिक्ष वाक (space walk) किया.

इसके बाद  वो दिन आया जब मानव इतिहास का सबसे अनोखा मिशन पुरा किया गया.

10 जुलाई 1969 को इंटरनेशनल समय के अनुसार 20:17 बजे चाँद पर अपोलो 11 अंतरिक्ष यान को चाँद के सतह पर उतरा.

इस मिशन को पूरा कर के अमेरिका के नील आर्मस्ट्रांग और बज्ज एल्ड्रिन वो इंसान बने जिन्होंने चाँद उतर कर एक सुनहरा इतिहास रच दिया जिसके बारे हम आज भी चर्चा कर रहे हैं. इसने मानव इतिहास के महत्वकांक्षाओं को एक अलग ही दिशा में पहुंचा दिया.

इसके बाद लगातार नए नए आयाम स्थापित करने की दिशा में अंतरिक्ष में Skylab deploy किया गया. 1976 में Viking probes मंगल ग्रह पर पहुंचा.

इसके बाद आयी बारी Voyager 1 और 2 की जिन्हे अंतरिक्ष के लम्बे सफर में भेजा गया जो आज भी लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं. दोनों को अलग अलग दिशाओं में भेजा गया है.

पहले voyager 2 यान को लांच किया गया था और ठीक 16 दिन बाद इसके जुड़वे यान voyager 1 को अंतरिक्ष के अंतहीन सफर में भेज दिया गया. इन यानों को अंतरिक्ष  में भेजे हुए 42 साल गुजर गया है फिर भी आज ये Deep Space Network के माध्यम से पृथ्वी तक डाटा ट्रांसमिट करते हैं.

Voyager 1 वो पहला यान है जो हमारे सौर मंडल से बाहर निकलकर Search Results Interstellar space में जाने वाला पहला यान है जो पृथ्वी से करीब 22 अरब किलोमीटर दूर जा चूका है. ये यान अंतरिक्ष में 17किमी/सेकंड की रफ़्तार से आगे बढ़ रही है जो मानव निर्मित यानों में सबसे  से चलती है.

वायेजर 1 से डाटा पृथ्वी तक आने में करीब 20 घंटे लगते हैं और जैसे जैसे ये दूर जा रहा है वैसे ही समय भी बढ़ता जा रहा है. अनुमान है की अभी 5 साल तक ये यान ऐसे ही चलते रहेंगे.

 इसके बाद 1983 के साल में पहली बार अमेरिका ने पहली महिला को अंतरिक्ष में भेजा इस तरह Sally Kristen पहली अमेरिकन महिला अंतरिक्ष यात्री बनी.

24 अप्रैल 1990 को Hubble space telescope को लांच किया गया. इस टेलिस्कोप का नाम अमेरिकन अंतरिक्ष यात्री Edwin P. Hubble के नाम पर रखा गया है.

Dr Hubble ने big-bang theory के बारे  बताया और ये भी बताया था की ये अंतरिक्ष लगातार फैलता जा रहा है.

इसी साल ने नासा ने एक और अनोखे मिशन की शुरुआत की जिसका नाम रखा “Origins” जिसका काम दूसरे ग्रह में जीवन की और उसके  तलाश करना था.

आज भी इसके तहत कड़ी मेहनत से नासा जीवन की तलाश में लगे हैं.

इंटनेशनल स्पेस स्टेशन को पृथ्वी के नीचले ऑर्बिट में 1998 में लांच किया गया.

ये मानव निर्मित सबसे बड़ी प्रोजेक्ट है जो अंतरिक्ष में भेजा गया है. इसमें लगातार नए नए experiments और प्रोजेक्ट भी पुरे किये जाते है.

अभी तक करीब 18 देशों के 230 अंतरिक्ष यात्री इस  स्पेस स्टेशन पर जाकर वापस आ चुके हैं.

इसे multinational  प्रोजेक्ट के रूप में बनाया गया है. इसीलिए तो इसे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन बोला जाता है.

इसके बाद Mars Pathfinder को मंगल ग्रह में उतारा गया

नासा का क्यूरियोसिटी मार्स रोवर मंगल ग्रह पर पुरे 2000 दिन पुरे कर चूका है. इस में 6 पहिये लगे हुए हैं. ये 2012 से मंगल पर हैं और अब तक 18.7 किमी का सफर कर चूका है.

अभी 2 साल पहले ही रूस और अमेरिका ने मिलकर एक नए स्पेस स्टेशन के निर्माण का काम शुरू कर चूका है. इसी साल नासा ने spaceX के साथ काम कर के TESS spacecraft को deploy करने का announce किया.

पार्कर सोलर प्रोब सूरज  नज़दीक पहुँचने वाला पहला यान है और ये इसी साल सूरज के सबसे नज़दीक जाकर वहां की कई राज हम तक पहुंचाएगा.

नासा की स्थापना कब हुई थी?

नासा की स्थापना 1 अक्टूबर 1958 में हुई थी. अमेरिका में स्थित ये संस्थान अंतरिक्ष में सबसे अधिक मिशन भेजने वाला संस्थान है.

इसने पूरी दुनिया को अंतरिक्ष से जुड़े कई रहस्योंके बारे में जानकारी दी और इंसान का कदम पहली बार चाँद में रखने का श्रेय भी इसी संस्थान को जाता है.

इसने दुनिया को अनेक ग्रहों के बारे  भी बताया जिसके बारे में इंसान को कुछ भी मालूम नहीं था.

NASA का चेयरमैन कौन है?

नासा के अध्यक्ष जिम ब्रिडेंस्टाइन हैं. इनका नाम डोनाल्ड ट्रम्प ने नॉमिनेट किया था. इन को यूएस सीनेट ने कन्फर्म किया था.

NASA ki official website: https://www.nasa.gov/

नासा के 10 मिशन

नासा की सफलताओं के पीछे बहुत ही कड़ी मेहनत छिपी हुई है जो की इसकी स्थापना से होने के बाद से कई लोगों के योगदान से हासिल हुआ है.

हम यहाँ नासा द्वारा अचीव किये गए 10 सफ़लतों के बारे में जानेंगे जिसने दुनिया को कई नयी प्रगति की तरफ बढ़ने में मदद किया है.

Voyager 

वायेजर 1 और वायेजर 2 ने शनि और बृहस्पति ग्रहों के बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारी हमे दी कई नयी खोजें भी की. इसने बृहस्पति के चारों तरफ फैले छल्लों के बारे  दी है.

साथ ही इसके चन्द्रमा में मौजूद volacanos की भी जानकारी दी है. वायेजर ने यूरेनस तक पहुंचकर एक नया इतिहास बनाया और इसने वहां जाकर इसके 10 नए चंद्रमाओं  की भी खोज की है.

Neptune ग्रहके बारे में भी इसने बताया की इसका वजन अंदाज़े से कम था. दोनों वायेजर यानो की क्षमता  इतनी है की ये 2025 तक रेडियो सिग्नल भेजने  रखता है.

इन यानों की मदद से इंसान द्वारा निर्मित ये यान सोर मंडल के किनारे जा चूका है और intersteller स्पेस में प्रवेश कर चूका है.

Voyager 2 के बारे में मैंने पहले ही बताया है की ये मानव निर्मित ऐसा यान है जो पृथ्वी से सबसे दूर गया है. ये दूरी पृथ्वी और सूर्य के बिच की दूरी से 100 गुना अधिक दूरी तक जा पहुंचा है.

Pioneer 

Pioneer 10 और Pioneer 11 resp. 1972 और 1973 में लांच किये गए थे और पहले ऐसे यान थे जो सौरमंडल के सबसे बड़े फोटोजेनिक गैस निर्मित ग्रहों बृहस्पति और शनि पर पहुंचे थे.

Pioneer 10 पहला अंतरिक्ष यान था जिसने सौरमंडल के asteroid belt (मंगल और बृहस्पति के बीच का एक ऐसा क्षेत्र जिसमे चट्टानें परिक्रमा करती है)  तक पहुँचने में सफलता हासिल की.

डेढ़ साल बाद ही इस यान ने बृहस्पति ग्रह तक पहुंचकर वहां के great red spot की अद्भुत तस्वीरें भेजी. उसके लगभग एक साल बाद ही ये यान बृहस्पति से उड़ान भर कर शनि ग्रह चला गया.

जहाँ पहुंचकर इसने ग्रह के चारों ओर unknown छोटे चंद्रमाओं के जोड़े की खोज की साथ ही एक बड़ा ring भी खोजा. इन दोनों यानों ने अब डाटा बेहजना बंद कर दिया है.

Chandra 

Chandra X-ray Observatory 1999 के बाद से सबसे अधिक दूरी के खगोलीय घटनाओं की स्कैनिंग कर रहा है. हमारी पृथ्वी का atmosphere ऐसा है जो अधिकतर X-rays को ब्लॉक कर देता है.

जिसकी वजह खगोलशाष्त्री इस हाई एनर्जी की वजह से यूनिवर्स को ठीक से देख नहीं पाते थे. ये किसी भी एक्सरे टेलिस्कोप की तुलना में 100 गुना अधिक शक्तिशाली है.

Viking 

1976 में जब नासा की Viking 1 Probe ने मंगल ग्रह को छुआ तो ये पहली बार था जब पहली बार इंसानो द्वारा बनाया गया कोई यान इस लाल ग्रह के सतह पर soft landing की.

इसके पहले सोवियत संघ द्वारा भेजे गए Soviat 2 और 3 भी इसके सतह पर उतरे लेकिन landing में असफल हो गए थे.

Viking 1 Lander ने एक ऐसा रिकॉर्ड भी बनाया जिसमे  ग्रह पर लम्बे समय तक यानि 6 साल 116 दिन बिताये. इस अंतरिक्ष यान  मंगल गृह के सतह की रंगीन फोटो भी भेजी.

WMAP

WMAP यानि Wilkinson Microwave Anisotropy Probe को 2001 में लांच किया गया था.

ये मिशन इतना फेमस तो नहीं था लेकिन ये बहुत ही accuracy के साथ cosmic mirowave background radiation में होने वाले उतार चढ़ाव को मैप कर के big-bang से बचे विकिरण की तापमान को मापता है.

इस अंतरिक्ष यान ने universe की शुरुआत के बारे cosmological theories के क्षेत्र में एक छलांग आगे बढ़ा दी. इसकी भेजी हुयी डाटा ने ब्रह्माण्ड की उम्र का एक सटीक अनुमान दिया है.

Hubble 

नासा के सभी अंतरिक्ष यानों में से हबल अंतरिक्ष यान सबसे अधिक प्रसिद्ध है जिसे पूरी दुनिया में सभी जानते हैं.

इसके द्वारा रोज़ भेजे जाने वाले तस्वीरों की वजह से लोगों का नजरिया बदल दिया है.

नासा  उपकरण है जो सितारों, ग्रहों, आकाशगंगाओं के अनेक भेदों को खोलता है.

Apollo

ये नासा का अब तक सबसे बड़ा और महान अंतरिक्ष मिशन के रूप में फेमस है. जिसमे इसने Apollo की मदद से मानव को चाँद पर उतारा और इतिहास रच दिया.

ये पहला मौका था जब पृथ्वी के बाहर किसी अन्य जगह पर मनुष्य के कदम पड़े.

NASA Moon Landing

नील आर्मस्ट्रांग चाँद पर कदम रखने वाले पहले इंसान बने. मिशन में मानव को अंतरिक्ष में भेजकर फिर वापस पृथ्वी पर वापस लाया गया.

Spitzer

एक Spacecraft जो infrared की मदद से आसमान के रहस्य से पर्दा उठाया. इंफ्रारेड में सामान्य light की तुलना में अधिक wavelength होता है.

ये यान आकाशगंगाओं, सितारों और nebulae की तस्वीरों की क्वालिटी को और अच्छा बना दिया. Spitzer 2005 में एक्सट्रासोलर ग्रहों के प्रकाश का पता लगाने वाला पहला टेलिस्कोप बना.

Spirit and Opportunity 

ये मिशन सिर्फ 90 दिनों का सोच कर शुरू किया गया था. ये समय तो कब का गुजर गया और ये 5 साल बाद भी मंगल ग्रह पर घूमता फिर रहा है.

ये दोनों जुड़वाँ रोवर हैं जिन्हे 2004 के मिशन के लैंडिंग स्थान के opposite जगह में उतारा गया था. तब से वो मंगल ग्रह के क्रेटर, पहाड़ों में घूम रहे हैं. इसके खोज से वैज्ञानिको ने पाया है की मंगल ग्रह पर तरल पानी था.

Cassini-Huygens 

नासा और ESA (यूरोपीय स्पेस एसोसिएशन) ने मिलकर इस मिशन को करने का फैसला लिया और हाथ मिलाया. ये यान 2004 में अपने डेस्टिनेशन शनि ग्रह तक पहुंचा.

तब से वो orbit में घूम रहा है और एक के बाद एक ग्रहों, उसकी चंद्रमाओं, और वहां के मौसम के अद्भुत फोटो लेकर भेज रहा है.

इससे Hugyens यान अलग होकर Titan तक पहुंचा और वहां के ज़मीन पर 2005 में  उतरा. पहले के अंतरिक्ष यानों ने शनि ग्रह का बस दौरा किया लेकिन Cassiniपहला यान बना जो शनि गृह के ऑर्बिट में पहुंचा और वहां के अनेक पहलुओं का अध्ययन किया.

संक्षेप में

अंतरिक्ष इतना विशाल है की आज तक इसकी सीमा का किसी को भी पता नहीं है लेकिन कई देशों के अंतरिक्ष संस्थान इस दिशा में लगातार इसके रहस्यों से पर्दा उठाने में लगे हैं.

ऐसे ही काम करने वाले अंतरिक्ष संस्थान के बारे में बात की और नासा क्या है और इसकी जानकारी जानी और ये भी जाना इसकी स्थापना कब हुई थी. साथ ही ये भी जाना की इसका का इतिहास क्या है और ये किस देश में स्थित है.

दोस्तों उम्मीद करता हूँ की आपको ये पोस्ट अच्छी लगी होगी अगर ये पोस्ट आपको अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम में अधिक से अधिक शेयर करें.

10 COMMENTS

  1. “NASA” se related hame har rarah ki information aur latest update news chahiye
    Jankri k liye bahut bahut sukriya…💞
    “Many many thanks to you”

  2. Sir aap ka to sabse pahle tahe dil se dhanyawad NASA ka itihas v ishse sambandhi jankari aap ne rochatamak tarike se prastut kiya hai jo hamare adhyayan ke drithikod se kafi madadgar hai

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