LED क्या है?

LED को की बात करे तो इसका हिंदी अर्थ प्रकाश उत्सर्जक डायोड होता है. अंग्रेजी में इसका पूरा नाम light emitting diode होता है. यह एक ऐसा उपकरण है जिससे विद्युत् प्रवाह करने पर प्रकाश का उत्सर्जन होता है. यह एक सेमीकंडक्टर यंत्र होता है.

आज के इस लेख में हम आपको बिजली से ही संबंधित बिजली के (LED) एलईडी क्या है यानि की आज के समय में सबसे ज्यादा इस्तेमल होने वाले रौशनी के श्रोत के बारे में बताएंगे.

तो क्या आपने कभी सोचा है, कि यह एलईडी बल्ब किस तरीके से कार्य करता होगा, इसकी खोज किसने और कब की थी, इसका इतिहास क्या है, यदि नहीं तो हम आपको इस लेख के माध्यम से बताएंगे यह एलईडी बल्ब किस सिद्धांत पर कार्य करता है.

हम सभी अपने दैनिक जीवन में ऐसी बहुत सी चीजों का उपयोग करते हैं, जो बिजली के द्वारा संचालित होती है. हम अपने दिनचर्या में सर्वाधिक उपयोग बिजली के ही सामानों का करते हैं, जैसे कि बल्ब, टीवी, कंप्यूटर, फ्रिज इत्यादि.

यदि आप इन सभी बातों को जानने के लिए इच्छुक हैं, तो कृपया आप हमारे द्वारा लिखे गए इस महत्वपूर्ण लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें, क्योंकि यह लेख आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होने वाला है.

LED की जानकारी

बिजली की खोज के बाद एलईडी बल्ब की खोज अब तक का सबसे अधिक तथा महत्वपूर्ण खोज है, क्योंकि यह एक ऐसी तकनीकी है, जिसके माध्यम से प्रकाश निकलता है. जब एलईडी बल्ब में बिजली प्रवाहित की जाती है.

तो इसमें प्रकाश तभी उत्पन्न होता है, जब इसके अंदर उपस्थित सभी तत्व (electron और अन्य गैसे) एक दूसरे के साथ मिले हुए होते हैं.

यह डिवाइस light solid semiconductor material से मिलकर बना होता है.

यही कारण है कि इस डिवाइस को solid device भी कहा जाता है.

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि LED इस युद्ध का सबसे महत्वपूर्ण एवं आवश्यक अविष्कार है, क्योंकि इस डिवाइस का उपयोग आज के समय में बहुत ही अधिक मात्रा में किया जाता है.

इसका उपयोग सर्वाधिक इसलिए हो रहा है, क्योंकि एक बल्ब को बनाने में बहुत ही छोटे छोटे LEDs का उपयोग किया जाता है तथा यह बहुत ही कम बिजली में अधिक प्रकाश उत्पन्न करता है.

इसकी सबसे खास बात यह होती है, यदि हम इस में स्थित एनोड कैथोड को जब हम किसी वोल्टेज के साथ जोड़कर बनाते हैं, तब यह सही मात्रा में अलग-अलग रंगों का प्रकाश उत्पन्न कर सकती हैं.

LED का पूरा नाम तथा अन्य नाम

“LED का पूरा नाम light emitting diode होता है.”

एलईडी के जलने पर जो प्रकाश उत्पन्न होता है, वह एक सीधे तरंग दैर्ध्य (wavelength ) की तरह ही होता है.

यह 3 रंगों से होकर अपने प्रकाश को उत्पन्न करता है, लाल से नीला (700 नैनोमीटर की तरंगदैर्ध्य से) तथा नीले रंग से जामुनी रंग (400 नैनोमीटर के तरंगदैर्ध्य से ) तक.

कुछ एलईडी बल्ब अविरत्त उर्जा ( infrared energy ) भी निष्कासित करते हैं , इसीलिए इन्हें IRED ( infrared emitting diode ) भी कहा जाता है.

एलईडी बल्ब किस सिद्धांत पर कार्य करता है :-

एलईडी बल्ब में प्रयोग होने वाले पदार्थ सामान्यतया aluminium, gallium and arsenide होते हैं. यह अपनी मूल अवस्था में ही इस पदार्थ के सभी परमाणु के साथ सघनता से आपस में जुड़े होते हैं.

ये बल्ब इसी सिद्धांत पर कार्य करता है और इसमें बिजली प्रवाहित करते ही, यह बल्ब प्रकाश उत्पन्न करने लगता है.

एलईडी बल्ब की मार्केट प्राइस क्या होती है?

पूरे देश भर में एलईडी बल्ब बनाने की अनेकों कंपनियां है, प्रत्येक कंपनी अपने बल्बों में उपयोग किए जानेवाले पदार्थों के आधार पर अपने बल्ब की प्राइस को निर्धारित करते हैं.

कंपनियों में बनाए जाने वाले बल्ब के प्राइस को उनके बिजली की खपत के अनुसार और प्रकाश के अनुसार भी रखा जाता है. बल्ब की मार्केट प्राइस ₹ 100 से शुरू हो जाती हैं और यह बहुत ऊंचे दामों तक भी बेची जाती है.

इनके दामों का निर्धारण इनके आकार के आधार पर भी किया जाता है.

एलईडी बल्ब बनाने की कुछ कंपनियां

पूरे विश्व में एलईडी बल्ब बनाने की अनेकों कंपनियां है, जिनमें से कुछ बहुत ही विकसित अर्थात मानी जानेवाली कंपनियों के नाम नीचे निम्न वत बताया गया है.

अपने भारत में सर्वाधिक विकसित तथा अच्छी एलईडी की कंपनियां जैसे सूर्या, आर के लाइट, बजाज इत्यादि है. अपने भारत में विदेशी कंपनियों के एलईडी बल्ब भी बेचे जाते हैं, जो कि बहुत ही ज्यादा मान्य होती हैं अर्थात

इन कंपनियों के बल्ब बहुत ही अच्छे माने जाते हैं.

एलईडी बल्ब का आविष्कार किसने और कब किया था?

एलईडी बल्ब का आविष्कार इन वैज्ञानिकों ने मिलकर किया था, इन वैज्ञानिकों का नाम शूजी नाकामुरा, निक होलोनिक, ओलेग लोसेव है.

एलईडी बल्ब करने की प्रक्रिया सन् 1927 से ही शुरू हो गई थी इस बल्ब को बनाने में सफलता सन् 1968 में मिली थी.

जैसा कि हम सभी जानते हैं , कि बल्ब का आविष्कार सबसे पहले थॉमस अल्वा एडिसन ने सन् 1879 में किया था, परंतु उनके द्वारा बनाया गया बल्ब बहुत ही अधिक बिजली की खपत करता था.

इसलिए इन वैज्ञानिकों ने यदि सन के ही सिद्धांतों पर एलईडी बल्ब का आविष्कार किया जो कि कम बिजली की खपत में ही अधिक प्रकाश उत्पन्न करता है.

एलईडी बल्ब का जनक निक होलोनीक (Nick holonyak is the father of LED) को कहा जाता है.

बल्ब का आविष्कार से संबंधित छोटा सा इतिहास

जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया की बल्ब का आविष्कार थॉमस अल्वा एडिसन ने सन् 1879 में अमेरिका में किया था.

इसके लिए थॉमस अल्वा एडिसन को अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा व्हाइट हाउस में नियंत्रित किया गया और उन्हें सम्मानित भी किया गया. एडिसन के द्वारा बनाए गए बल्ब को बिजली की बहुत ही अधिक जरूरत पड़ती थी.

इसलिए तीन वैज्ञानिकों ने एलईडी बल्ब का आविष्कार किया जिसको बहुत ही कम बिजली की आवश्यकता पड़ती है.

जॉर्ज क्राफर्ड ने सन् 1972 में पीले रंग की एलईडी का आविष्कार किया. George Craford निक होलोनिक के विद्यार्थी थे जिस समय इन्होंने पीले रंग की एलईडी बल्ब का आविष्कार किया था, उस समय इनकी बहुत उपलब्धि हुई.

थॉमस अल्वा एडिसन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां

थॉमस अल्वा एडिसन का जन्म 11 फरवरी 1847 को अमेरिका के एक छोटे से शहर मिलन में हुआ था. यह बचपन में थोड़ी पागल थे , इसीलिए वहां के लोग उन्हें पागल कह करके उनकी खिल्ली उड़ाते थे.

थॉमस अल्वा एडिसन को प्रयोग करने का बहुत ही ज्यादा शौक था. वह अपने किसी भी कार्य को प्रयोगों के द्वारा ही सिद्ध करना चाहते थे.

उनके स्कूल के प्रधानाचार्य के द्वारा उनकी माता को एक पत्र लिखा गया, जिसमें प्रधानाचार्य द्वारा लिखा गया था कि थॉमस अल्वा एडिसन पागल है और उन्हें उस विद्यालय में नहीं पढ़ाया जा सकता, क्योंकि वह सभी को परेशान कर देते थे, इसीलिए आप इन्हें घर पर ही पढ़ाएं.

एक बार थॉमस अल्वा एडिसन अपनी माता के साथ मुर्गी फॉर्म में गए, वहां पर उन्होंने एक मुर्गी को अंडे के ऊपर बैठा हुआ देखा और उस अंडे में से छोटे-छोटे चूजे निकल आए.

उन्होंने घर जाने के बाद एक दर्जन अंडे लिए और उस पर बैठ गए उस में से चूजे तो नहीं निकले, परंतु अंडे फूट गए और उनका पेंट खराब हो गया. इसके लिए उनके मां द्वारा उन्हें डांट भी पड़ी.

एलईडी बल्ब के लाभ

जैसा कि हम सभी जानते हैं , एलईडी बल्ब हमारे दैनिक जीवन में बहुत ही ज्यादा उपयोगी व लाभदायक है.

एलईडी बल्ब से हमें अनेकों प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं, जैसे कि; यह कम बिजली की खपत में अधिक प्रकाश उत्पन्न करता है. एलईडी बल्ब को किसी भी प्रकार की गर्मी नहीं निकलती.

इसकी संपूर्ण आउटपुट शक्ति 150 मिलीवॉट से भी कम होती है, इस कारण बिजली की खबर बहुत ही कम होती है. यह बहुत ही तीव्र होता है, अर्थात इस में बिजली प्रवाहित करने के 10 नैनो सेकंड के अंदर ही यहां प्रकाश उत्पन्न करने लगता है.

एक अच्छे एलईडी का जीवनकाल 20 वर्ष तक का होता है. इसमें अनेकों प्रकार की सर्किट से लगी होती हैं, जिससे यहां बिजली की कमियां अधिकता को आसानी से सहन कर सकता है.

एलईडी बल्ब के नुकसान

हम सभी इस बातों को जानते हैं कि जिन वस्तुओं के लाभ होते हैं , उनके कुछ ना कुछ हानियां अवश्य होती हैं, तो ऐसे में नीचे एलईडी बल्ब के हानियों के बारे में बताया गया है.

यदि इस बल्ब में बिजली की अधिकता कर दी जाए तो यह बल बहुत ही जल्द खराब हो जाता है. यह एलईडी बल्ब बाहरी तापमान पर निर्भर करता है, अर्थात यह तरंग दैर्ध्य के ऊपर निर्भर करता है.

निष्कर्ष

आज हम से हर कोई जनता है की रौशनी हमारे लिए कितना जरुरी है. रात हो या दिन घर के अंदर में रौशनी जरूर करते हैं. जिसके लिए विभिन्न प्रकार के बल्ब का उपयोग करते हैं.

इस लेख में बताया गया कि एलईडी क्या है और इसका आविष्कार किसने किया, इसका सिद्धांत किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया, एलईडी बल्ब का जनक किसे कहा जाता है.

हमें उम्मीद है, कि आपको यह लेख अवश्य पसंद आया होगा, तो कृपया आप इसे अपने मित्र गणों के साथ अवश्य साझा करें.

Wasim Akram

वसीम अकरम WTechni के मुख्य लेखक और संस्थापक हैं. इन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है लेकिन इन्हें ब्लॉगिंग और कैरियर एवं जॉब से जुड़े लेख लिखना काफी पसंद है.

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