IAS Motivation Story : एक कुली कैसे बना IAS Officer, बिना कोचिंग फ्री WiFi से की पढ़ाई

IAS Motivation Story : नमस्कार, आज क्या हमारे इस प्रेरणादायक आर्टिकल में हम आप सभी लोगों का तहे दिल से स्वागत करते हैं. हम उम्मीद करते हैं कि आप सभी सब कुशल प्रशासक तथा स्वस्थ होंगे और अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु निरंतर प्रयासरत तथा कार्यरत होंगे. 

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कोई ना कोई लक्ष्य तो अवश्य ही होता है क्योंकि बिना लक्ष्य के जीवन बिना पतवार के नाव के समान होती है उसकी दिशा निर्धारित नहीं होती है. उसे कहां जाना है किस ओर अपना रुख करना है इसकी कोई जानकारी नहीं होती है इस प्रकार से इस नाव के बवंडर में फंसने की संभावनाएं ज्यादा होती है.

इस वजह से प्रत्येक व्यक्ति को किस बात का ख्याल रखना चाहिए ही चाहिए कि उसे अपने जीवन में आखिर करना क्या है लेकिन ऐसे बहुत से लोग भी मौजूद है जिन्होंने अपने जीवन में क्या करना है इसके बारे में सोचते हैं लेकिन डरते हैं कि वह असफल हो जाएंगे और उसके परिणाम स्वरुप वह अपने लक्ष्य में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते.

जानिए आईएएस ऑफिसर श्रीनाथ की कहानी :-

ऐसे बहुत सारे लोग मौजूद थे जिन्होंने विपरीत परिस्थितियां होने के बावजूद भी अपने जीवन के लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए जी जान लगा दी. एक बार लक्ष्य की प्राप्ति हो जाने के पश्चात यह सब लोग संसार के समक्ष एक मिसाल बन कर के प्रस्तुत किए जाते हैं.

जिससे सभी लोगों को प्रेरणा होती है कि यदि वह इंसान इसलिए विपरीत परिस्थितियां होने के बावजूद भी सफलता प्राप्त कर सकता है तो भला हम क्यों नहीं कर सकते हैं इस प्रकार से लोगों में प्रेशर जगती है कि वह भी अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु अधिक कठिन परिश्रम करेंगे. सफलता प्राप्ति के पश्चात ही चैन की सांस लेंगे.

आज के आर्टिकल में हम आप सभी लोगों के साथ आईएएस ऑफिसर श्री नाथ के जीवन के विषय में आपसे आवश्यक जानकारियां साझा करने वाले हैं. आपको बता दें कि श्रीनाथ ने कभी भी अपने जीवन में संसाधनों की कमी को अपनी कामयाबी के रास्ते में नहीं आने दिया वह हमेशा आपदाओं को अवसर में परिवर्तन करने के विषय में सोचते रहते थे. इसके साथ ही इसी के परिणाम स्वरुप वह अपने जीवन में एक नया मुकाम हासिल करने में सफल हो पाए.

जानिए आईएएस ऑफिसर श्रीनाथ की विषय में और भी बातें :-

आईएएस ऑफिसर श्रीनाथ की यदि बात करें तो उन पर बहुत ये बात अच्छे से सूट करता है,” यदि कड़ा परिश्रम किया जाए तो कामयाबी अवश्य ही मिलती है” एर्नाकुलम स्टेशन पर कुली का कार्य करने वाले आईएएस ऑफीसर श्रीनाथ की कहानी बहुत ज्यादा संघर्षपूर्ण है.

आपको बता दें कि इन्होंने अपने घर की जिम्मेदारियों को उठाने के साथ साथ ही अपनी किस्मत को भी बखूबी बदलने का प्रयास किया. इनके प्रयास देर से ही सही लेकिन रंग अवश्य लगी और आखिर में हमारे देश भारत की सबसे ज्यादा कठिन परीक्षा माने जाने वाली यूपीएससी की परीक्षा को पास करके वह आईएएस अधिकारी बन गए.

कुछ वर्षों पहले तक कुली का कार्य करने वाले श्रीनाथ को आईएएस ऑफिसर बनना सफलता की एक मिसाल नहीं तो फिर क्या है.

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यूपीएससी की परीक्षा :-

श्रीनाथ में दो बार यूपीएससी की परीक्षा दी थी एग्जाम भी पास नहीं कर पाए थे इसलिए बाद में उन्होंने ऐसा रिकॉर्ड बनाया कि 8 साल से कोई भी नहीं तोड़ पाया है. देशभर में लाखों युवा यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करते हैं. वैसे तो उनमें से कुछ छात्र ही इस परीक्षा को पास कर पाते हैं और आईएस तथा आईपीएस जैसी पोस्ट पर नियुक्त किए जाते हैं.

श्रीनाथ जैसे कुछ अभ्यर्थी ऐसे भी होते हैं जो यूपीएससी की परीक्षा सेल्फ स्टडी के दम से ही पास करने का प्रयास करते हैं. आपको मेरी बात से अवगत करवा दे कि श्रीनाथ मूल रूप से केरल के एर्नाकुलम के रहने वाले हैं वह अर्नाकुलम रेलवे स्टेशन पर ही कुली का काम किया करते थे.

रेलवे WiFi साबित हुआ उपयोगी :-

श्रीनाथ के पास इतना पैसा तो थे नहीं कि यूपीएससी की परीक्षा के वास्ते तैयारी करने के लिए किसी भी कोचिंग सेंटर की फीस भर सके. ऐसे में उनके मन में यह बात अवश्य आई कि वह बिना कोचिंग के इस कठिन परीक्षा को पास नहीं कर सकते हैं.

इसी के परिणाम स्वरुप ही उन्होंने सबसे पहले केरल लोक सेवा आयोग की परीक्षा देने के विषय में सोचा उनकी इस का तिरंगा को रेलवे स्टेशन पर लगे फ्री वाईफाई ने आसान बनाने हेतु अपनी भूमिका अदा की उन्होंने स्टेशन पर लगे फ्री वाई-फाई से अपनी पढ़ाई प्रारंभ कर दी.

आईएस बनने तक का सफर :-

इसके पश्चात उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारियां प्रारंभ कर दी एवं इसके साथ ही केरल लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर ली थी. आपको हम इस बात से अवगत करवा दें कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के यूपीएससी की परीक्षा पास करके एक मिसाल सभी लोगों के समक्ष प्रस्तुत कर दी जो पैसों की कमी के कारण अपने इस सपने को त्यागने की विषय में सोच रहे हैं.

अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि लोग अपनी नाकामियों  की जिम्मेदारी अपने खराब परिस्थितियों पर थोप देते हैं ऐसे लोगों को खुद पर शर्मिंदा होना चाहिए क्योंकि जब श्रीनाथ जैसे युवक इतनी विपरीत परिस्थितियों होने के पश्चात भी अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्र कथा सैयामी है. तो फिर ऐसा शायद ही कोई युवक हुआ जिसकी परिस्थितियां इन से भी ज्यादा बुरी होगी.

निष्कर्ष :-

आज के इस आर्टिकल में हमने आप सभी लोगों के समक्ष आईएएस श्रीनाथ की कहानी साझा की है हम आशा करते हैं कि हमारा यह प्रयास आपको बहुत ही ज्यादा पसंद आया होगा अगर आप हमसे कोई सवाल पूछना चाहते हैं या फिर हमें अपनी कोई राय देना चाहते हैं तो आप यह काम आसानी से कमेंट के माध्यम से कर सकते हैं.

इसके साथ ही यदि आप हमारे साथ अपने लक्ष्य के विषय में भी जानकारी कमेंट के जरिए साझा करते हैं तो हमें अत्यंत प्रसन्नता होगी. इसके साथ ही हमारा उत्साह भी बढ़ा है जिससे कि हम और भी बेहतर आर्टिकल आपके वास्ते ला सकेंगे. हमारे आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ जरूर शेयर करें.

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Ahmed Ruhul Amin

हिंदी भाषा के माध्यम से सरकारी योजना, परीक्षा, नौकरी, तकनीक और ट्रेंडिंग जानकारी लिखना मुझे बहुत पसंद है.

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