महात्मा गांधी पर निबंध – Essay on Mahatma Gandhi in Hindi for Class 5, 6, 7, 8, 9

“अहिंसा परमो धर्म:” यानी कि अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है और इसी रास्ते पर चलते हुए महात्मा गांधी ने इतिहास रचा और आज भी पूरी दुनिया उनके इस व्यक्तित्व की वजह से उन्हें पहचानती है. इसलिए आज की पोस्ट में हम महात्मा गांधी पर निबंध (Essay on Mahatma Gandhi in Hindi) के जरिए आपको उनकी पूरी जीवनी की गाथा सुनाएंगे.

महात्मा गांधी का का जन्म गुजरात के पोरबंदर नामक जगह में 2 अक्टूबर 1869 ईस्वी को हुआ था. उनके पिता का नाम करमचंद गांधी और यह अपने पिता के चौथी बीवी के अंतिम संतान थे. महात्मा गांधी को पूरा देश राष्ट्रपिता के रूप में जानता है क्योंकि उन्होंने ब्रिटिश शासन से अहिंसा के मार्ग को अपनाकर लड़ाई की और आजादी दिलाई.

आज के इस लेख में हमने राष्ट्रपिता की जीवनी को महात्मा गांधी पर निबंध (Essay on Mahatma Gandhi in Hindi for class 7, 8, 9) के रूप में संजोया है जो हमारे देश में पढ़ने वाले बच्चों के लिए जरूर काम आएगा. स्कूलों में बच्चों को महात्मा गांधी की जीवनी को उनके निबंध के रूप में लिखने को जरूर मिलता है इसीलिए यह पोस्ट हमारे बच्चों के लिए काफी महत्वपूर्ण है.

महात्मा गांधी पर छोटे और बड़े निबंध (Short and Long Essay on Mahatma Gandhi in Hindi)

mahatma gandhi par nibandh - महात्मा गांधी पर निबंध
महात्मा गांधी पर निबंध

निबंध – 1 (300 शब्द)

मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 18 सो 69 ईस्वी को भारत के गुजरात राज्य में प्रबंध नामक स्थान पर हुआ था. गांधी जी के पिता राजकोट के दीवान हुआ करते थे जिनका नाम मोहनदास करमचंद गांधी था. उनकी माता का नाम पुतलीबाई था. गांधीजी की शादी बहुत ही कम उम्र उम्र में हुई थी और उनकी बीवी का नाम कस्तूरबा गांधी था.

गांधीजी ने प्रारंभिक शिक्षा प्रबंधन और बाद में अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए अहमदाबाद. वकालत की पढ़ाई पूरी करने के लिए उन्हें इंग्लैंड में जाना पड़ा. वापस लौटने के कुछ दिनों बाद वे दक्षिण अफ्रीका के.

दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों की स्थिति काफी दयनीय थी इसलिए उनकी मदद करने के लिए वहां पर गए. वहां पर भारतीयों और काले लोगों के साथ बहुत ही बुरा व्यवहार किया जाता था. एक बार तो गांधीजी को चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया था.

इस घटना ने उनके जीवन को काफी प्रभावित किया और तब से वह गलत नीतियों का विरोध करना शुरू कर दिए. वापस लौटकर उन्होंने भारत को आजादी दिलाने के लिए अंग्रेजो के खिलाफ मुहिम की शुरुआत. उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन, योग आंदोलन, नमक सत्याग्रह आंदोलन का नेतृत्व किया. नमक सत्याग्रह आंदोलन के अंतर्गत उन्होंने दांडी मार्च की शुरुआत साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक 24 दिनों के पैदल यात्रा से की.

गांधी जी ने अपनी पूरी जिंदगी देश के नाम कर दी और अंग्रेजी वस्तुओं का विरोध भी किया. वह अपने पहनने वाले वस्त्रों को खुद ही चरखा चलाकर सूत काता करते थे. उनका चरखा आज भी उदाहरण के के तौर पर लोगों को प्रेरणा देती है.

उनके लगातार परिश्रम की वजह से भारत 15 अगस्त 1947 ईस्वी को आजाद हुआ और इस प्रकार देश स्वतंत्र देश के रूप में स्थापित हुआ. लेकिन 30 जनवरी 1948 ईस्वी को गांधी जी की हत्या कर दी गई जिस देश का महान संत परंपरा का पुजारी इस देश को छोड़ चला गया.

निबंध – 1 (400 शब्द)

प्रस्तावना

देश के स्वतंत्र सेनानियों में राष्ट्रपिता का नाम सर्वप्रथम आता है. पूरा देश में उन्हें बापू के नाम से भी जाना जाता है. महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा का मार्ग अपनाकर ही अंग्रेजों की नींव हिला कर रख दी.

आज पूरी दुनिया में सत्य और अहिंसा के सबसे बड़े व्यक्तित्व के रूप में पहचानती है.

गांधी जी का जीवन परिचय

मोहनदास करमचंद गांधी ने महात्मा गांधी कहते हैं उनका जन्म 2 अक्टूबर 18 तारीख को गुजरात के पोरबंदर नामक जगह में हुआ था. गांधी जी को प्यार से लोग राष्ट्रपिता भी कहते हैं.

गांधी जी को राष्ट्रपिता की उपाधि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के द्वारा दी गई थी.

गांधी जी के पिता राजकोट के दीवान हुआ करते थे और उनकी माता एक धार्मिक महिला थी. गांधीजी अपने प्रारंभिक शिक्षा समाप्त करने के बाद में वकालत करने के लिए इंग्लैंड गए.

वहां से वापस आकर वह दक्षिण अफ्रीका वकील के रूप में काम करने के लिए गए. जहां पर उन्हें पता चला कि अंग्रेजों की गलत नीतियां किस प्रकार लोगों पर अत्याचार के कारण बनती है.

महात्मा गांधी का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान

गांधी जी ने देश से आह्वान किया कि सभी अहिंसा के रास्ते पर चलें और अंग्रेजो के खिलाफ लड़े. उनके नेतृत्व में पूरे देश के लोगों ने उनका समर्थन किया. गांधी जी ने कई आंदोलन किए जिनमें से प्रमुख आंदोलन है असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह आंदोलन, अंग्रेज भारत छोड़ो आंदोलन और चंपारण आंदोलन.

राष्ट्रपिता देश की आजादी के लिए कई बार जेल भी गए. फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अंग्रेजों का जमकर विरोध किया.

महात्मा गांधी आजादी के बाद भी ऐसा देश चाहते थे जहां पर गरीबों को पूरा अधिकार मिले. क्योंकि उन्हें मालूम था कि आजादी के बाद भी ठेकेदार और जमीदार गरीबों पर अत्याचार करेंगे.

इसीलिए उन्होंने भारत की नींव रखने की योजना बनाई जिसमें हर गरीब को बराबर का अधिकार मिले और वह एक अच्छी जिंदगी जिए.

गांधी जी की मृत्यु 30 जनवरी 1948 ईस्वी को हुई थी.

निष्कर्ष

गांधी जी ने पूरी दुनिया को कई प्रकार की शिक्षा दी. उन्होंने बताया कि लड़ाई सिर्फ हथियारों से नहीं बल्कि और अहिंसा के रास्ते पर चल कर भी लड़ी जा सकती है.

उन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर रहकर अंग्रेजों से लड़के भी दिखाया. गांधी जी को इस रास्ते पर काफी संघर्ष भी करना पड़ा लेकिन उन्होंने सफल हो कर दिखाया. इन्हीं बातों की वजह से सभी उन्हें आदर्श मानते हैं और आज भी गांधीजी के आदर्शों पर लोग चलते हैं.

निबंध – 1 (500 शब्द)

प्रस्तावना

अहिंसा और सत्य बात होती है वही महात्मा गांधी का नाम सर्वप्रथम सबके दिमाग में आता है. उनकी जिंदगी एक मिसाल की तरह है और इनका उदाहरण हर प्रकार के लोगों को दिया जाता है. देश की आजादी में सबसे प्रमुख योगदान देने वाले व्यक्तियों में से एक व्यक्ति हैं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी.

उन्होंने अपनी जिंदगी राष्ट्र के नाम दीजिए और देश के लोगों को सही रास्ते पर चलकर दुश्मनों के खिलाफ लड़ना भी सिखाया. उन्होंने यह भी दिखाया कि हम किसी लड़ाई को बिना प्यार से भी लड़ सकते हैं अगर आप सच्चाई का रास्ता अपनाते हैं.

प्रारंभिक जीवन

गांधी जी के जन्मदिन के अवसर पर हर साल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती मनाई जाती है क्योंकि 2 अक्टूबर 1869 को महात्मा गांधी का जन्म दिवस है. महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी है.

उनके पिता का नाम करमचंद गांधी है जो एक दीवान के रूप में काम किया करते थे एवं माता का नाम पुतलीबाई है. गांधीजी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गुजरात के पोरबंदर में पूरी की थी उसके बाद अपनी ग्रेजुएशन पूरी करने के लिए वे अहमदाबाद चले गए.

गांधीजी ने वकालत पूरी करने के लिए इंग्लैंड गए. वकील के रूप में काम करने के लिए वह दक्षिण अफ्रीका भी गए जहां पर उन्होंने रंगभेद नीति को पहली बार महसूस किया.

वहीं से उन्होंने इसका विरोध करना शुरू कर दिया.

जब भारत वापस लौटे दो अंग्रेजों के खिलाफ उन्होंने अपना आंदोलन शुरू किया.

महात्मा गांधी का भारतीय स्वतंत्रता में योगदान

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भारत को आजादी दिलाने के लिए काफी बड़ा योगदान दिया. बिना हथियार का प्रयोग करते हुए उन्होंने देश को आजादी दिलाने की शपथ ली. उनके इस रास्ते को पूरे देश ने समर्थन दिया. भारत को आजादी दिलाने के लिए महात्मा गांधी ने कई बड़े आंदोलन किए. जिनमें से सबसे प्रमुख आंदोलन निम्नलिखित है:

असहयोग आंदोलन

फरवरी 1919 ईस्वी में गांधी नहीं है कि अगर ब्रिटिश शासन रोलेट एक्ट को बात करती है तो फिर वह इसका विरोध करेंगे लेकिन ब्रिटिश सरकार ने उनके इस बात को अनदेखा कर दिया और इस नियम को पास कर दिया इसके विरोध में 30 मार्च किसी को बेगुनाह लोगों पर गोलियां दागी गई जिसे हम जालियांवाला बाग कांड के रूप में जानते हैं.

अंग्रेजों ने निर्माता से भारतीयों का खून किया और गांधी जी को यह बात समझ में आ गई कि ब्रिटिश सरकार से दया की उम्मीद करना बेकार है इसलिए साल उन्नीस सौ 20 के सितंबर के महीने से फरवरी 1922 के बीच भारतीय राष्ट्र कांग्रेस की अगुवाई में असहयोग आंदोलन चलाया गया.

इस आंदोलन को एक साथ खड़ा कर दिया गया और ब्रिटिश सरकार की नीव हिला डाली.

नमक सत्याग्रह आंदोलन

अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा निकाली गई जो 24 दिनों का पैदल यात्रा था. इस यात्रा को 24 दिनों तक पैदल चलकर जाना था और दांडी नामक गांव तक पहुंचना था. इनको 12 मार्च फ्री में गांधी जी के द्वारा नेतृत्व किया गया था.

यह हमारी सरकार के नमक पर एकाधिकार के खिलाफ निकाला गया था. इस आंदोलन को दांडी मार्च के नाम से भी पहचाना जाता है.

भारत छोड़ो आंदोलन

गांधी जी ने 1942 ईस्वी के अगस्त महीने में भारत छोड़ो आंदोलन प्रारंभ किया. अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाने के लिए मजबूर करने का यह प्रयास एक सामूहिक नागरिक आंदोलन के नारे करो या मरो के साथ शुरू किया गया.

यह आंदोलन की शुरुआत होते ही कई जगहों जैसे रेलवे स्टेशन, सरकारी भवन, दूरभाष कार्यालय इत्यादि में बड़े स्तर पर हिंसा शुरू हो गई.

कई घटनाएं भी होने लगी जितने भी हिंसक गतिविधियों के लिए गांधीजी को दोष दिया गया. इसकी वजह से कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार भी कर लिया गया.

चंपारण सत्याग्रह आंदोलन

अंग्रेजों द्वारा भारतीय किसानों पर किए गए अत्याचार की वजह से गांधी जी ने चंपारण आंदोलन की शुरुआत की. इस आंदोलन को सन 1917 में बिहार के चंपारण जिले में शुरू किया गया.

निष्कर्ष

आज भारत के धर्मनिरपेक्ष देश होने की सबसे बड़ी वजह महात्मा गांधी ही हैं. भारत को एकजुट करने के लिए उन्होंने शुरुआत से पूरे देश को साथ लेकर चले.

यही वजह है कि भारत में अभी भी हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सभी मिलकर एक साथ रहते हैं.

निबंध – 1 (600 शब्द)

प्रस्तावना

अहिंसा का रास्ता अपनाकर भी सही तरीके से लड़ाई की जा सकती है यह हमें महात्मा गांधी ने सिखाया है. ब्रिटिश शासन के खिलाफ उन्होंने सत्य और अहिंसा का मार्ग अपनाकर कई बड़े आंदोलन किए और उन में कामयाबी हासिल की.

महात्मा गांधी ने ब्रिटिश शासन की नींव हिला कर रख दी लेकिन उन्होंने कभी भी कोई हथियार का प्रयोग नहीं किया बल्कि सिर्फ सच्चाई के रास्ते पर चलें और अपनों को देशवासियों के साथ मिलकर जारी रखें। अंततः उन्होंने भारत को इसी रास्ते पर चलकर आजादी दिलाई और देश को गुलामी की जंजीरों से बाहर निकाला.

महात्मा गांधी कि शुरुआती जीवन

महात्मा गांधी का जन्म सन 2 अक्टूबर 1869 ईस्वी को गुजरात के तटीय शहर पोरबंदर नामक जगह में हुआ था. यह एक बंदरगाह हुआ करता था. महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी है. इनके पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था.

महात्मा गांधी के पिता राजकोट के दीवान हुआ करते थे. महात्मा गांधी की शादी बहुत ही कम उम्र में कस्तूरबा गांधी से कर दिया गया था. इनकी जो विवाह हुई थी तब इनकी उम्र मात्र 13 साल थी कस्तूरबा गांधी की उम्र उस वक्त 14 साल थी.

गांधीजी पढ़ाई के समय से ही इससे दूर भागा करते थे. इन्होंने अपने शुरुआती शिक्षा पोरबंदर शहर में ही की. 18 वर्ष की उम्र में महात्मा गांधी ने अपना ग्रेजुएशन अहमदाबाद से पुरवा राजमहल राजीव कुमार मोबाइल ओग्गी के कार्टून पुरानी रिंगटोन नानी वाला गांव बहुत अच्छा कनिका कपूर का प्रधानमंत्री बढ़िया रहा तो बढ़िया-बढ़िया खलीफा बिपाशा अच्छा इंतजार मोटापा का इलाज आपके साथ काम करते हैं व्हाट्सएप बजट कहां हो अरे बाद में वकालत की पढ़ाई के लिए वे इंग्लैंड चले गए.

जब इंग्लैंड से पढ़ाई करके वापस आए तो कुछ समय के बाद वह वकील के रूप में साउथ अफ्रीका 1893 ईसवी में चले गए. वहां पर उन्होंने जातिवाद पर होने वाले भेदभाव को खुद अनुभव किया जब उन्हें ट्रेन के प्रथम श्रेणी कोच से बाहर उठा कर फेंक दिया गया.

इस कोच में सिर्फ गोरे लोगों को यात्रा करने के लिए अनुमति दी गई थी जिसमें भारतीय या फिर काले लोगों को अनुमति नहीं दी जाती थी.

इस घटना के बाद गांधी जी पर इसका काफी प्रभाव पड़ा और उन्होंने इस प्रकार के रंगभेद नीति के खिलाफ विद्रोह करना शुरू कर दिया.

महात्मा गांधी का भारतीय स्वतंत्रता में योगदान

गांधी जी ने देश को आजाद करने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. आजाद कराने के लिए उन्होंने कई आंदोलन का नेतृत्व किया. इन आंदोलनों में सबसे प्रमुख आंदोलन असहयोग आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, नमक सत्याग्रह आंदोलन, चंपारण आंदोलन इत्यादि शामिल है.

उन्होंने हिंसा का रास्ता अपनाकर इन सभी आंदोलनों का नेतृत्व किया और अंग्रेजों को नाक में दम कर के रखा. भारत को आजाद कराने के लिए गांधीजी कई बार जेल भी गए.

30 जनवरी 1948 ईस्वी को नाथूराम गोडसे व्यक्ति ने तीन गोलियां चलाई जिससे इस देश का महान संत, अहिंसा का पुजारी इस देश को रोता बिलखते छोड़ चला गया.

निष्कर्ष

गांधी ने किसी भी स्थिति में अपने अहिंसा के पद को नहीं छोड़ा. उनके नेतृत्व में चलने वाले लोगों ने भी कई बार हिंसक रास्तों को छोड़कर गांधीजी का मार्ग अपनाया. उनके इसी प्रकृति की वजह से लोगों से काफी प्रभावित हुआ करते थे.

देश के ही नहीं बल्कि विदेशी लोग भी महात्मा गांधी को अपना आदर्श माना करते हैं. आज के समय में भी उनके व्यक्तित्व को अहिंसा और सत्य के नाम से पहचाना जाता है.

गांधी जी ने हमेशा अपनी जिंदगी को एक ही रास्ते पर अपना कर अंग्रेजों को सबक सिखाया. उनके अनशन रास्ते की वजह से ही उन्हें आंदोलनों को करने की अनुमति भी मिल जाती थी. उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार शांति का मार्ग अपनाकर आप अपने दुश्मनों का विरोध कर सकते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here