ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध – Global warming essay in hindi

पृथ्वी गर्म हो रही है और यह बात हमें समाचार पत्रों न्यूज़ चैनलों और कई लोगों से सुनने को मिलता है. आखिर यह ग्लोबल वार्मिंग क्या है और इसके कारण क्या हो सकते हैं यह अक्सर हर किसी को नहीं मालूम होता. इसी विषय पर हम आपके लिए आज ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (Global warming essay in hindi) लेकर आए हैं जो वास्तव में आपको इससे संबंधित अनेकों प्रकार की जानकारी देगी.

आज पूरा विश्व यातायात के साधनों से भरा हुआ है जिसके कारण प्रदूषण की समस्या बहुत आम हो गई है. जहां देखो धुआँ ही धुआँ है. जिसकी वजह से हमारा पर्यावरण काफी प्रदूषित हो चुका है और तेजी से इस समस्या की वृद्धि भी हो रही है.

पृथ्वी के धरातल के औसतन तापमान में वृद्धि होना ग्लोबल वार्मिंग कहलाता है. इसके मुख्य कारण पृथ्वी पर रहने वाले मनुष्य ही हैं. मनुष्यों के अनेक प्रकार के औद्योगिक विकास की वजह से ग्रीन हाउस गैसों का नियंत्रण खत्म हो चुका है और अधिक प्रदूषण ग्लोबल वार्मिंग के कारण है.

स्कूल और कॉलेजों में इस विषय पर लेख के आयोजन किए जाते हैं और परीक्षाओं में भी इस विषय पर सवाल पूछे जाते हैं. तो स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों जैसे 6, 7, 8, 9 इत्यादि वर्ग के बच्चों के लिए यह निबंध काफी महत्वपूर्ण हो सकता है जिसे वह अपने गृह कार्य या फिर वर्ग कार्य के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.

ग्लोबल वार्मिंग पर छोटे एवं बड़े निबंध (Short and Long Essay on Global Warming in Hindi)

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ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध

निबंध – 1 (300 words)

परिचय

वृक्षों को मानव जनजीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह हमारे पर्यावरण में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड गैस को ग्रहण करते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं. इस प्रकार हमारे वातावरण में एक संतुलन बना हुआ रहता है.

लेकिन जब पेड़ों की कटाई ज्यादा होने लगी और प्रदूषण की मात्रा भी बढ़ने लगी तो ऐसे में कार्बन डाइऑक्साइड गैस के अधिक वृद्धि होने के कारण पृथ्वी निरंतर गर्म होती जा रही है. इसी प्रक्रिया को हम ग्लोबल वार्मिंग के नाम से जानते हैं.

ग्लोबल वार्मिंग के कारण

वैश्विक तापमान एक बहुत बड़ी समस्या बनकर उभरी है जिसने काफी लोगों का आकर्षण अपनी और किया है और हो भी क्यों ना यह एक समस्या सभी समस्याओं के ऊपर है.

इस समस्या के दोनों कारण है पहले तो प्राकृतिक और दूसरी मनुष्य द्वारा किए जाने वाले कार्य. देखा जाए तो मनुष्यों की भागीदारी इसमें सबसे ज्यादा है जिन्होंने प्रदूषण पैदा करने के कई रास्ते खोल दिए.

जब तक यह समझ में आया कि यह काफी बड़ा नुकसान हो रहा है तब जाकर आज पूरी दुनिया में सभी देशों ने इसके लिए अधिक से अधिक वृक्षों को लगाने का निर्णय और कार्यक्रम भी शुरू कर दिया. भारत में इस मामले में किसी दूसरे देश से पीछे नहीं है. यहां भी प्रत्येक राज्य में वृक्षारोपण के कार्यक्रम चलाए गए हैं और व्यक्तिगत तौर पर लोगों को इसके लिए प्रोत्साहित भी किया जाता रहा है.

निष्कर्ष

ग्लोबल वार्मिंग पूरी मानव सभ्यता के लिए बहुत बड़ा खतरा है. ऐसा कोई छोटा मोटा यह कारण नहीं है जिसे हम अनदेखा कर दें. अगर इसे सही समय पर नियंत्रण में नहीं कर लिया गया तो फिर पूरी मानव सभ्यता खत्म भी हो सकती है. इसकी रोकथाम के कई तरीके हैं जिसमें सबसे बड़ा पेड़ों का अधिक से अधिक लगाना है जिसे हम व्यक्तिगत तौर पर अपना सकते हैं.

निबंध – 2 (400 words)

परिचय

इंसान भले ही लापरवाह हो जाए और प्रदूषण पर रोक ना लगाए लेकिन प्रकृति अगर बुरी स्थिति में जा रहे हैं तो इसके जिम्मेदार इंसान ही हैं. पृथ्वी के लगातार गर्म होने के कारण ग्लोबल वार्मिंग की समस्या उत्पन्न हो गई है.

यह किसी एक देश की गलती नहीं है बल्कि पूरी दुनिया में रहने वाले इंसानों के द्वारा किए जाने वाले क्रियाकलापों की वजह से ही यह समस्या उत्पन्न हुई है. पिछले एक दशक में पृथ्वी का तापमान में 1.8 डिग्री फॉरेनहाइट की बढ़ोतरी हो चुकी है जो काफी चिंताजनक है.

पूरी दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग की वजह से होने वाले दुष्प्रभाव के अनेक प्रमाण देखने को मिलते हैं. यह दुष्प्रभाव और भी बुरे ना हो जाए इससे पहले समझने की जरूरत है और पूरी दुनिया में जागरूकता इसके लिए काफी तेजी से फैलाई जा रही है.

ग्लोबल वार्मिंग के कारण

वाहनों से निकलने वाले गैसों की वजह से प्रदूषण काफी तेजी से बढ़ी है. जैसे-जैसे विकास की गति बढ़ रही है वैसे वैसे लोगों जीवन जीने की प्रक्रिया में भी बदलाव देखने को मिला है.

जिसकी वजह से कई उत्पादों के उत्पादन की प्रक्रिया में भी तेजी की गई है और इसने उद्योगों को और अधिक चलाने की वजह दी है. कारखानों और संगठनों में उपयोग होने वाली मशीनों के द्वारा निकलने वाली हानिकारक गैस और कचरे हवा और पानी दोनों को ही दूषित करते हैं. यह जहरीली कैसे वातावरण में उपस्थित ओजोन परत को काफी प्रभावित कर रही है.

ओजोन परत के कमजोर होने की वजह से ग्रीन हाउस गैसें पृथ्वी की सतह पर ही रुक जा रही हैं और ऊपर नहीं जा रही. पृथ्वी का तापमान इसकी वजह से बढ़ता जा रहा है. ग्रीन हाउस प्रभाव क्या है इस के बारे में समझने के लिए हमारा लिखा आर्टिकल जरूर पढ़ें.

ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के उपाय

इको फ्रेंडली यातायात के साधनों का उपयोग करके प्रदूषण को आसानी से कम किया जा सकता है.

जमीनी स्तर पर हर जगह पूरे देश में वृक्षारोपण के कार्यक्रम चलाए जाएं और लोगों को इसके प्रति जागरूक की जरूरत है.

अगर हर इंसान अपनी संख्या के अनुसार चरखी एक पेड़ भी लगा देता है तो पूरी दुनिया में कितने पेड़ हो जाएंगे कि पर्यावरण प्रदूषित होने से बच जाएगा।

निष्कर्ष

पृथ्वी के तापमान में होने वाले विरोधियों को अगर सही समय पर ना रोका गया तो इसके परिणाम इतने बुरे होंगे की पूरी मानव सभ्यता के मिटने के खतरे पैदा हो सकते हैं. वैसे तो प्रकृति अपना रखरखाव खुद ही कर लेती है लेकिन मनुष्य ने इसमें प्रदूषण की मात्रा में इतनी बढ़ोतरी कर दी है जिसे संभालना कब से कठिन हो गया है.

समय रहते अगर लोग इसके प्रति जागरूक होकर अपने क्रियाकलापों पर नियंत्रण कर लेते हैं तो इस समस्या का समाधान हो सकता है.

निबंध – 3 (600 words)

परिचय

पर्यावरण का प्रदूषण आज की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है इसके लिए सभी देशों की सरकारों ने रोकथाम के कई उपाय अपनाएं. बढ़ते प्रदूषण की वजह से ही पृथ्वी के तापमान में काफी तेजी से वृद्धि हुई है जिसके कारण ग्लोबल वार्मिंग की समस्या उत्पन्न हो गई है.

सरल शब्दों में कहें तो पृथ्वी के गर्म होने की प्रक्रिया को ही ग्लोबल वार्मिंग कहा जाता है. पृथ्वी काफी पुरानी है और इसमें कई प्रकार के प्राकृतिक रूप बताएं भी निरंतर आती रहती है लेकिन फिर भी संतुलित तरीके से चलती रहती है.

मनुष्य के प्रदूषण के प्रति लापरवाही और नए औद्योगिक विकास की वजह से ग्लोबल वार्मिंग की प्रक्रिया में काफी बढ़ोतरी हुई है. पृथ्वी का तापमान प्रतिवर्ष बढ़ता जा रहा है और इसका एकमात्र कारण है पेड़ों की कटाई और गाड़ियों एवं कारखानों से निकलने वाला धुंआ.

ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण

वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी के कई कारण है. इन कारणों की वजह पता होने के बावजूद भी अधिकतर यह जानते हुए भी कि यह बहुत हानिकारक है कोई कदम नहीं उठाते. यह सबसे बड़ी लापरवाही ग्लोबल वार्मिंग की वजह है.

इंसानों द्वारा किया जाने वाला औद्योगिकरण, उत्पादों का तेजी से कारखाने में उत्पादन, विकास के नाम पर किए जाने वाले प्रकृति के साथ दुर्व्यवहार, खनन की प्रक्रिया, महासागर के जल को प्रदूषित करना ऐसे कारण है जो ग्लोबल वार्मिंग होने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं.

ग्रीन हाउस गैस में वृद्धि होना जो वातावरण लिए काफी हानिकारक होते हैं. इनके संतुलन बिगड़ना कार्बन डाइऑक्साइड में बढ़ोतरी का कारण है. जो पृथ्वी को गर्म और गर्म करता जा रहा है.

प्रकृति एक चक्र के रूप में काम करती है जिसमें कई प्रक्रिया शामिल है. मनुष्यों ने प्रक्रिया को काफी प्रभावित किया है जिसकी वजह से नियंत्रित चक्र से बाहर निकल चुकी है.

मनुष्य द्वारा इसे नियंत्रित करना कोई आसान बात नहीं. इसे प्रकृति नियंत्रित कर सकती है.

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव काफी बुरे होंगे जिसकी कल्पना हम नहीं कर सकते हैं. लेकिन धीरे-धीरे होने वाली प्रक्रिया है जिसे हम आपसे अनुभव कर सकते हैं. बात करते हैं इसके प्रमुख दुष्प्रभाव जो मानव जीवन पर बुरा असर डालेंगे वह कहते हैं.

ग्लोबल वार्मिंग से होने वाला जो सबसे जल्दी और प्रभावित करने वाला दुष्परिणाम है पूरी दुनिया के तापमान में बढ़ोतरी होना. जो सामान्य वैश्विक तापमान है उसमें 1.4 डिग्री फॉरेनहाइट (0.8 डिग्री सेल्सियस) की वृद्धि हो चुकी है.

राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय व्यवस्थापन (NOA) के द्वारा यह वृद्धि पिछले 100 सालों में अंकित की गई है. जैसा कि तापमान में वृद्धि लगातार होती जा रही है और यह 1895 से शुरू है जिसमें 2016 ईस्वी को पूरी दुनिया में सबसे गर्म वर्ग रिकॉर्ड किया गया.

मौसम में बदलाव

बचपन से यह मालूम होता है कि 1 साल तीन अलग-अलग मौसमों में विभाजित है जो चार चार महीने के होते हैं. वैसे तो प्रत्येक देश में मौसम अलग अलग होता है जो वहां पर सामान्य माना जाता है.

लेकिन अब यह देखा गया है कि मौसम के बदलाव में काफी गड़बड़ी हो चुकी है. कभी भी बारिश हो जाती है और जब बारिश की जरूरत होती है उस वक्त बरसात नहीं होती. कभी-कभी ठंडी के मौसम में भी उतनी सर्दी नहीं पड़ती.

अमेरिका में ही गर्मियों का मौसम बहुत ही सुंदर और सर्दियों का मौसम बहुत ही अधिक सर्दी के साथ अंकित किया गया है जो एक रिकॉर्ड है.

निष्कर्ष

आज प्रत्येक इंसान को व्यक्तिगत तौर पर जागरूक करने की जरूरत है इससे पहले कि दे रहे हो जाए और हमारा वातावरण पूरी तरह से बिगड़ जाए. एक दूसरे को प्रेरित करना चाहिए कि हर व्यक्ति अपनी जिंदगी में जितना अधिक हो सके उतना पेड़ लगाए जिससे कि ग्लोबल वार्मिंग के नियंत्रण को जल्दी ना खोजा जाए और पृथ्वी के तापमान को कम किया जाए.

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