बाल दिवस पर निबंध – Children’s Day Essay In Hindi

मेरे प्यारे बच्चों, आज हम आपके लिए सबसे खास दिन पर यानि बाल दिवस पर निबंध (Short & Long Essay on Children’s Day In Hindi) लेकर आये हैं। वह दिन जब सारे बच्चे कार्यक्रम में बढ़ चढ़ कर भाग लेते है, जिस दिन सारा भारत नेहरू जी को याद करता है।

सही पहचाना आपने, हम बात कर रहे है नवंबर महीने के 14 तारीख को मनाये जाने वाले बाल दिवस की, आ गई ना चेहरे पर ख़ुशी। आज इसी विषय पर हमने यह लेख लिखा है, बाल दिवस पर निबंध – Children’s Day Essay In Hindi. तो देर किस बात की है, जल्दी से पढ़े और करें अपनी परीक्षा की तैयारी।

बाल दिवस पर निबंध – Short & Long Essay on Children’s Day In Hindi For Class 6, 7, 8, 9 & 10 Students

जैसा की आपकी परीक्षा में अलग – अलग शब्द सीमा दिए रहते है, उसी को ध्यान में रखते हुए हमने आज 250 शब्दों से लेकर 600 शब्दों के चार तरह के निबंध लिखें है। जो आपकी परीक्षा में मदद करें, उसे आप पढ़ के याद कर सकते है।

निबंध-1 (250 शब्द)

कभी – कभी आपकी परीक्षा में आपसे 250 शब्दों में निबंध लिखने को बोला जाता है। ऐसा अधिकांश कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को दिया जाता है। आइये, देखते है कैसे लिखें इस निबंध को सीमित शब्दों में खूबसूरत रूप के साथ।

भूमिका

हर वर्ष बच्चों के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के जन्मदिन के अवसर पर बाल दिवस मनाया जाता है। पंडित जी का मानना था कि बच्चे ही किसी देश का भविष्य होते है, उनका जितना विकास होगा, उतना उस देश का आने वाला कल चमकदार होगा। उन्हें बच्चों से बहुत प्यार था और इसलिए अपने जन्मदिन को उन्होंने बच्चों के नाम कर दिया। वर्ष 1956 से ही नवंबर माह की 14 तारीख को बाल दिवस मनाया जाता है।

बाल दिवस का महत्व

हमारे देश के पहले प्रधानमंत्री का मानना था कि बच्चों के विकास के लिए एक दिन उनके नाम होना चाहिए। बाल दिवस के जरिये लोगों के बीच जागरूकता जगाया जा सकता है, इससे उनके बीच अपने- अपने बच्चों को आगे बढ़ाने की उत्सुकता जागेगी। हर साल बच्चों की कितनी प्रगति हुई है, उन्हें भविष्य में और कितनी सहारे की आवश्यकता है, यह सब हर साल होने वाले ऐसे ही कार्यक्रमों से पता चलता है। बाल दिवस सिर्फ विद्यालयों तक ही सीमित नहीं रहता, यह उत्सव उन बच्चों के लिए भी होता है जो इन सब सुविधाओं से वंचित है। ऐसे मौके पर अभिभावकों को अपने बच्चों की उज्ज्वल भविष्य के लिए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

निष्कर्ष

भारत एक विकासशील देश है, वर्तमान समय में बच्चों की स्थिति में काफी सुधार की आवश्यकता है। लगभग एक चौथाई भाग गरीबी रेखा के अन्तर्गत आता है, इस कारण से कई बच्चे बाल श्रम किया करते है। उनके आने वाले कल को सुखमय बनाने के हम सारे नागरिकों के साथ खड़ा होना होगा।

हालांकि सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में कई योजना बनाई है, पर समझ की अभाव से उन्नति पर रोक लगी हुई है। बाल दिवस पर इन्ही सब सुविधाओं के बारे में लोगों के बीच जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते है।

निबंध-2 (350 शब्द)

अब बारी है कुछ ज्यादा शब्दों में लिखे गए निबंध की, यहाँ आपको मिलेगा 350 शब्दों का बाल दिवस पर निबंध।

प्रस्तावना

हमारा भारत सबसे अलग और सबसे महान है, और इसलिए यहाँ बच्चों के नाम एक खास दिन बाल दिवस आयोजित किया जाता है। हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के जन्मदिन  14 नवंबर को यह दिन विशेष तौर से मनाया जाता है। हमारे देश के महापुरुषों में से एक पंडित जी को बच्चों से बहुत प्रेम और लगाव था, वह अक्सर बच्चों के साथ वक़्त गुजारा करते थे। बच्चे भी उन्हें प्यार से चाचा नेहरू बोलते थे, जो नाम आज भी प्रसिद्ध है। प्रथम प्रधानमंत्री के इस असीमित प्रेम की वजह से ही उनका जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

बाल दिवस का इतिहास

हमारे देश में सन 1956 से ही बच्चों के हित में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी के जन्मदिन पर बाल दिवस मनाया जाता रहा है। जब हमारा देश आज़ाद हुआ, उस समय आधा से ज्यादा आबादी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। ऐसे में बच्चे भी काम किया करते थे ताकि अपने परिवार की मदद कर सके। दूसरी तरफ हमारे नेहरू जी को यह कदापि पसंद नहीं था, उन्होंने इस क्षेत्र में काम करने की ठानी। इसका यह परिणाम निकला कि उनके जन्मदिन को ही बाल दिवस के तौर पर उत्सव की तरह मनाया जाने लगा। इस दिन लोगों के बीच बच्चों को शिक्षा की ओर अग्रसर करने को प्रेरित किया जाने लगा।

बाल दिवस पर कार्यक्रम

पूरे भारत में हर्षोल्लास से 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। हर विद्यालय में इस दिन पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते है, बच्चों चाचा नेहरू का रूप धारण करके फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में बढ़- चढ़ कर भाग लेते है। पूरा देश ऐसा लगता है जैसे नेहरू जी की याद में डूब गया है, हर तरफ उनके बाल रूप देखने को मिल जाते है। जो बच्चे विद्यालय जाने में असमर्थ होते है, उनके लिए भी जगह- जगह समितियों द्वारा प्रोग्राम करवाया जाता है, उनके ऐसे कदम से बच्चों में भी विद्यालय जाने की ललक जगती है। इस दिन पूरे देशवासी दिल से बच्चों के स्वर्ण समान भविष्य के लिए जागरूकता फैलाते है।

निष्कर्ष

बाल दिवस सिर्फ दिखावे के उद्देश्य से नहीं मनाया जाता है, इस दिन गरीब और पिछड़े बच्चों के लिए भी कार्यक्रम की व्यवस्था की जाती है। सबसे बड़ा लक्ष्य होता है कि कोई भी बच्चे अपने शिक्षा के अधिकार से अपेक्षित ना रह जाए। ऐसे ही देश के हर वासी को जिम्मेदार बनना चाहिए ताकि कल को हर लड़का- लड़की सक्षम और काबिल बने और तभी हमारा देश सही मायने में बाल दिवस को मना पाएगा।

निबंध-3 (450 शब्द)

अब हमारे शब्दों की सीमा बढ़ती जा रही है और अब आप पढ़ेंगे 450 शब्दों में बाल दिवस पर निबंध। बच्चों, आने वाले बोर्ड की परीक्षा में यह काफी मददगार होगा।

प्रस्तावना

हम सब अपने प्रथम और पूर्व प्रधानमंत्री से वाकिफ तो है ही, जी हां हमारे पंडित जवाहरलाल नेहरू जी, जिन्हें बच्चे चाचा नेहरू कहते है। उनके जन्मदिन को खास बनाने के लिए 14 नवंबर को बाल दिवस जैसे उत्सव मनाये जाते है। नेहरू जी के लिए बच्चे किसी वरदान से कम नहीं होते थे, उनका यही उद्देश्य होता था कि बच्चों के विकास में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। बच्चों के प्रति उनका प्यार ही है कि भारत में नेहरू जी को सम्मान देने और उनकी याद में हम सब उनका सबसे खास दिन बाल दिवस स्वरूप पूरे जोश से मनाते है।

चाचा नेहरू और बाल दिवस

भारत के सबसे अहम और जिम्मेदारी वाली पद में विराजमान होने के बावजूद चाचा नेहरू बच्चों के लिए समय निकाल ही लेते थे। उनके साथ समय व्यतीत करना और साथ में खेलना उन्हें बड़ा भाता था। बच्चों से अथाह लगाव और उनके प्रति अत्याधिक प्रेम होने की वजह से श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए हर वर्ष 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। नेहरू जी सबसे कहा करते थे कि बच्चों से प्यार से पेश आए, वो हमारे आने वाले कल का उज्ज्वल सितारा होंगे। उनके लिए बच्चे किसी अनमोल रत्न से कम नहीं है और हर बच्चे का भविष्य सुरक्षित हो इसका नेहरू से विशेष ध्यान रखते थे। बच्चों का सम्पूर्ण विकास हो इसके लिए बाल दिवस एक मुहिम की तरह शुरू की गई।

बाल दिवस की आवश्यकता

यह दिन सिर्फ मनोरंजन से संबंधित नहीं है, इसके पीछे अनेकों कारण है। भारत जैसे देश में आज भी कई राज्य शिक्षा के क्षेत्र में पीछे है, बाल दिवस हम सारे देशवासियों को जागरूकता फैलाने का एक अवसर प्रदान करता है। इस दिन विद्यालयों से इतर अन्य जगहों में भी ऐसे-ऐसे कार्यक्रम किए जाते है, जिससे उनके दिल में एक आस जगे जो अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित नहीं है। सरकार की योजनाओं से उन्हें अवगत करवाया जा सकता है। बाल दिवस हमें एक मौका देता है कि सब एकजुट होकर शिक्षा के दीप कोने-कोने तक जलाये, ताकि कल को कोई भी अनपढ़ ना रह जाए।

बाल दिवस पर स्कूली कार्यक्रम

विद्यालयों में शारीरिक, मानसिक और नैतिक तौर पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। हर बच्चा एक से बढ़कर एक प्रतियोगिता में भाग लेता है। कोई चाचा नेहरू बन जाता है तो कोई महात्मा गांधी। बाल दिवस के दिन स्कूल के फाटक खोल दिए जाते है ताकि हर बच्चा अपने पसंद के प्रतियोगिता में भाग ले सकते है। नेहरू जी को दिल से श्रद्धांजलि दी जाती है और फिर प्रोग्राम शुरू किया जाता है।

ऐसे कार्यक्रम सिर्फ स्कूल में ही नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए भी व्यवस्थित करने चाहिए जिन्हें शिक्षा की जरूरत है। कार्यक्रम के अंत में विजेताओं को पुरस्कार दिए जाते है, ऐसा करने से उनका मनोबल बना रहता है।

निष्कर्ष

बच्चे दिल के बहुत नाजुक होते है, उनका मार्गदर्शन करने हेतु बाल दिवस उत्सव मनाये जाते है। उनका सिर्फ शारीरिक विकास ही महत्व नहीं रखता बल्कि मानसिक दृष्टिकोण से भी उन्हें सक्षम बनाना जाना चाहिए। छोटे से मस्तिष्क पर अधिक बोझ से उनके विकास पर असर पड़ सकता है। बाल दिवस पर खेल, संगीत, नृत्य इत्यादि से उनका जुड़ाव हमेशा बना रहेगा।

निबंध-4 (600 शब्द )

बच्चों यह अब इस पोस्ट का अंतिम निबंध है, जिन्हें हमने 600 शब्दों में लिखा है। आप अपने अनुसार ऊपर लिखित निबंधों की मदद से भी और ज्यादा शब्दों में निबंध लिख सकते है।

प्रस्तावना

हमारे देश के अनमोल रत्न जो अपने हर योजना में आने वाले भविष्य की भलाई सोचते थे। उनके दिल में बच्चों के प्रति ढेर सारा प्रेम भरा हुआ था, और साथ में अपने व्यस्त जीवन में भी उन बच्चों के लिए समय निकालने वाले वो एक महान इंसान थे। हमारे और सबके प्यारे चाचा नेहरू जी के जन्मदिन पर ही 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। कहा जाता है कि नेहरू जी बच्चों से इतना लगाव रखते थे कि उनके साथ वह भी बच्चे बन जाया करते थे। सन 1956 से उनकी याद में हम सब जयंती के शुभ अवसर पर बाल दिवस उत्सव मनाते है।

विश्व में बाल दिवस आयोजन

हालांकि बाल दिवस भारत में अधिक चर्चित है, पर यह सारे विश्व में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1857 में की गई थी, अमेरिका के एक पादरी डॉ चार्ल्स लेनर्ड ने जून के माह में सर्वप्रथम इसका आयोजन किया था। इसी तरह दुनिया के कोने- कोने में इसी प्रकार अपने तरीके से लोगों द्वारा बाल दिवस मनाये जाते है। भले ही तरीका अलग हो, लोग अलग हो, देश अलग हो, पर उद्देश्य सबका एक है कि बच्चों का विकास हो। किसी- किसी देश में इस दिन राष्ट्रीय अवकाश भी रहता है तो कहीं सारे बच्चों को मुफ्त में आधारभूत सामग्री मुहैया कराई जाती है। बाल दिवस पूरे विश्व में प्रसिद्ध है जिनका मकसद बच्चों से ही जुड़ा रहता है।

भारत में बाल दिवस

हमारे देश में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है, उनके साथ प्यार से पेश आना और आगे बढ़ने में मदद करना ही हमारे देश में आयोजित होने वाले बाल दिवस का सबसे बड़ा लक्ष्य होता है। स्कूलों में हर कोई चाचा नेहरू का रूप लिए रहता है और भी अनेकों प्रतियोगिता करवाये जाते है। बाल दिवस के अवसर पर सुविधाहीन बच्चों को भौतिक सुविधा प्रदान की जाती है। सिर्फ आर्थिक रूप से अच्छे परिवार वाले बच्चे ही नहीं बल्कि असमर्थ भी बाल दिवस का हिस्सा होते है।

बाल दिवस उत्सव

अधिकांश जगहों या राज्यों में बाल दिवस स्कूलों तक ही अपनी सीमा में बंधा हुआ है। पर धीरे-धीरे बच्चों के विकास के लिए कार्यक्रम चलाये जा रहे ताकि अधिक लोग अपने बच्चों को बढ़ावा दे। स्कूलों में विभिन्न प्रकार के प्रतियोगिता कराये जाते है और अंत में विजेता को सम्मानित किया जाता है।

कुछ विद्यालयों में इसके अलावा मेला का भी आयोजन किया जाता है, जहां बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने की सुविधा मिलती है। इसके साथ ही बाल दिवस पर बाल श्रम, शोषण, शिक्षा से वंचित जैसे गंभीर मसले पर चर्चा भी की जाती है ताकि हर बालक-बालिका को उनका हक़ मिले।

हर नागरिक की जिम्मेदारी, बाल दिवस की तैयारी

यद्यपि देश में यह प्रथा जैसी है कि सिर्फ शिक्षण संस्थानों में ही बाल दिवस जैसे उत्सव मनाये जाते है। पर भारत देश का हर नागरिक इसे अपने तरीके से मना सकता है, जिससे हर बच्चे का भला हो और उनकी प्रगति में एक अहम भूमिका भी निभा सके। आप अपने आस-पास के बच्चों के लिए यह दिन विशेष बना सकते है।

  • गरीब बच्चों के बीच भौतिक चीजें जैसे- कपड़े, भोजन, शिक्षण सामग्री इत्यादि बाँट सकते है।
  • जो बच्चे विद्यालय नहीं जा सकते है, उनकी शिक्षा में मदद करके भी आप उनका भविष्य संवार सकते है।
  • बाल दिवस सिर्फ 14 नवंबर को ही ना मना कर आप पूरे साल मना सकते है। प्रतिदिन अपना थोड़ा सा वक़्त उन गरीब और पिछडे तबके के बच्चों के विकास में देकर उनकी मदद कर सकते है।
  • बाल दिवस के अवसर पर स्लम इलाकों में जाकर लोगों के बीच बच्चों के अधिकार को लेकर जागरूकता बढ़ा सकते है।
  • अपने पड़ोस में या कहीं नजदीक में बाल श्रम में लगे बच्चों की आर्थिक मदद करके उन्हें एक सुनहरा मौके दे सकते है।

निष्कर्ष

बाल दिवस सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं है, पूरा विश्व इसे बच्चों के नाम पर आयोजित करता है। विकसित देशों में इस दिन का जितना महत्व है उससे कई गुणा हमारे जैसे विकासशील देशों में इसकी आवश्यकता है। हमारे देश के महत्वपूर्ण मौलिक अधिकारों में से शिक्षा का भी अधिकार शामिल है जिससे हर बच्चा साक्षर हो और अपने देश को आगे बढ़ाने में कल को अपना योगदान दे। हमारे देश भारत में आज भी बाल-श्रम या उनके शोषण जैसी समस्या मौजूद है। इसके रोकथाम के लिए ही एक दिन बाल दिवस के नाम पर रखा गया है। हर बच्चे को उनका अधिकार मिले, यह उत्तरदायित्व हम सबका है।

अंतिम शब्द:-

हर साल 14 नवंबर को पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन के अवसर पर बच्चों के लिए खास प्रोग्राम आयोजित किए जाते है। हमारे आज के लेख में आपकी परीक्षा को ध्यान में रखते हुए बाल दिवस पर निबंध लिखा गया है।

बच्चों, मुझे उम्मीद है कि आज का यह पोस्ट, ” बाल दिवस पर निबंध” आपके लिए काफी मददगार साबित हुआ होगा। ऐसे ही और भी निबंध के लिए आप हमारे साथ जुड़े रह सकते है, जल्दी से हमारे साइट की न्यूज़लेटर को सब्सक्राइब करें। अगर आपको आज का निबंध पसंद आया हो तो कमेंट करके जरूर बताएं और अपने मित्रों से साझा करना ना भूलें।

Leave a Comment