चंद्रयान-2 पर निबंध – Essay on Chandrayaan 2 in hindi

चंद्रयान-2 भारत द्वारा भेजा गया दूसरा मिशन था जो पहली बार चांद के ऐसे हिस्से पर मानव रहित रोवर भेजने का प्रोग्राम था जहां पर अभी तक किसी ने प्रयास भी नहीं किया था. आज की पोस्ट में हम Chandrayaan-2 par nibandh (Essay on Chandrayaan2 in hindi) लेकर आए हैं.

आप भी कुछ काफी उत्साहित होंगे यह जानने के लिए आखिर चंद्रयान 2 मिशन क्या है इसके संपूर्ण जानकारी के बारे में इस निबंध के माध्यम से यहां आपको बताने जा रहे हैं.

Chandrayaan-2 या चंद्रयान द्वितीय भारत का चांद को भेजे जाने वाला दूसरा मिशन था इससे पहले जो मिशन था उसका नाम चंद्रयान-1 मिशन था. इस अभियान को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो द्वारा भेजा गया था. यह अभियान पूरी तरह से देशी था क्योंकि सभी चीजों का निर्माण भारत में ही किया गया था जिसमें एक रोवर और विक्रम लैंडर शामिल है.

chandrayaan 2  par nibandh (चंद्रयान-2 पर निबंध )
chandrayaan 2 par nibandh

जहां दूसरे देशों ने इस तरह के मिशन में बहुत बड़ी सफलता तो नहीं पाई और खर्च भी बहुत किया लेकिन भारत एक ऐसा देश है जो हर मिशन के साथ लोगों को एक नई प्रेरणा की दिशा की ओर ले जाता है. इसका कारण यह है कि भारत द्वारा चलाए गए सारे मिशन बहुत ही कम पैसे में किए जाते हैं.

मंगलयान भारत की तरफ से भेजा गया मंगल ग्रह तक जाने वाला बहुत कम खर्चे वाला मिशन था और इसने दूसरे देशों को भी यह दिखा दिया कि भारत कहीं भी किसी से कम नहीं था और ना रहेगा. इसके अलावा इतने कम पैसों के खर्च में इतने बड़े मिशन को अंजाम देना कोई बड़ी बात नहीं है.

निबंध – 1 (250 शब्द)

Chandrayaan-2 भारत के सबसे महत्वपूर्ण अभियानों में से एक अभियान है. यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो के रूप में जानते हैं द्वारा संचालित किया गया. इस अभियान से पूरे देश को यह महसूस हो गया कि भारत भी किसी से कम नहीं है.

यह सफलतापूर्वक चांद के ऑर्बिट में प्रवेश कर गया था और इसका रोवर चंद्रमा की परिक्रमा भी करने लगा था. इस कैलेंडर का नाम विक्रम था जो कि इसके सतह पर उतरने वाला था. सतह पर उतरने के करीब ही इस रोवर का क्रश हो गया लेकिन फिर भी यह मिशन काफी हद तक सफल रहा.

आज भी इसका रोवर चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है और वहां से चांद से जुड़ी कई प्रकार के डाटा को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को भेज रहा है. इस मिशन को पूरा करने में काफी लंबा वक्त लगा था. Chandrayaan-2 को 22 जुलाई को लांच की गई थी. ओसी लॉन्च पैड से लांच की गई थी जहां से चंद्रयान-1 को लांच किया गया था.

इस मिशन को पूरा करने में करीब 141 मिलियन डॉलर खर्च किए गए. इसके खर्च की बात करें तो यह हॉलीवुड में एक फिल्म बनती है उससे भी कम खर्च में इस मिशन को पूरा किया गया. इसेप अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारे भारत के वैज्ञानिक कितने कुशल हैं जो कम से कम खर्च में इतना बड़ा मिशन पूरा कर लेते हैं. इसी वजह से भारत का हर मिशन पूरी दुनिया की नजर में होता है और सभी देश को काफी अहमियत भी देते हैं.

निबंध – 2 (350 शब्द)

Chandrayaan-1 भारत द्वारा चलाया गया चंद्रमा पर पहला मिशन था जिसे 8 नवंबर 2008 को चांद की कक्षा में प्रवेश करके सफलतापूर्वक पूरा किया गया था. इस मिशन के बाद यह निर्णय लिया गया कि अब मानवरहित या इनको चंद्रमा की सतह पर उतारा जाए और वहां के वातावरण, पानी के अस्तित्व को पता लगाया जाए. इसके लिए सतह पर उतरना जरूरी था जो एक मानवरहित यान के द्वारा करने का निर्णय लिया गया. इसी वजह से chandrayaan-2 मिशन की योजना बनाई गई और 7 सितंबर 2019 को chandrayaan-2 के की चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग का कार्यक्रम रखा गया जो सुबह के 1:30 से 2:30 बजे के बीच में रखा गया था.

यह काफी जटिल मिशन था जिसमें तकनीकी बारीकियों का इस्तेमाल करना था इसमें एक और बेटा एक लैंडर और एक रोवर था जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव का अवलोकन करने के लिए तैयार किया गया. इस मिशन को कई कामों के लिए शुरू किया गया जिसमें प्रमुख काम भूकंप विज्ञान, खनिज की पहचान, सतह की रासायनिक संरचना मिट्टी की भौतिक विशेषताएं और वातावरण की रचना इसके अलावा यह बात भी समझने के लिए इस मिशन को भेजा गया कि चंद्रमा की उत्पत्ति और विकास कैसे हुई.

देखा जाए तो यह मिशन 100% सफल तो नहीं हो सकी लेकिन 90 से 95% इसने अपना काम पूरा कर लिया था. 1:52 बजे लैंडर लैंडिंग से लगभग 2.1 किलो दूरी पर अपने तय किए गए रास्ते से भटक गया और अंतरिक्ष यान से इसका संपर्क भी टूट गया जिससे इस पर नियंत्रण खत्म हो गया. 8 सितंबर को विक्रम लैंडर के बारे में पता तो चल गया लेकिन इस से संपर्क नहीं हो सका था.

इस मिशन की सबसे प्रमुख भूमिका लेंडर कोई निकली थी जो चंद्रमा के विभिन्न विशेषताओं के बारे में अपनी जानकारी रोवरको भेजता और फिर हमें रोवर के जरिए चांद के बारे में पता चलता. लेकिन लैंडर से संपर्क टूट जाने की वजह से यह काम पूरा नहीं हो सका. फिर भी 90-95% सफल होने के कारण इस मिशन से देश के लोग काफी खुश हुए क्योंकि पहली बार चांद के ऐसे धरातल पर उतरने की कोशिश की गई जहां पर अभी तक किसी देश ने सोचा भी नहीं था.

निबंध – 3 (660 शब्द)

Chandrayaan-2 जिसे चंद्रयान द्वितीय नाम से भी जानते हैं भारत का चांद पर भेजे जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा मिशन है जिसका नेतृत्व इसरो ने किया. यह अभियान पूरी तरह से देसी है क्योंकि भारतीय वैज्ञानिकों ने खुद ही सभी चीजों का निर्माण किया. इस मिशन में वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया एक चंद्र ऑर्बिटर, एक रोवर और एक लैंडर शामिल है.

इस मिशन के अंतर्गत सभी चीजों का निर्माण भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा इसी देश के अंतर्गत किया गया था इसीलिए यह मिशन पूरी तरह से एक देसी मिशन है. इस मिशन को उसी लांच पैड से लांच किया गया जिससे चंद्रयान-1 को लांच किया गया था.

इसको लॉन्च करने के लिए जियोसिंक्रोनस सैटलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क III का इस्तेमाल किया गया जिसे हम जीएसएलवी एमके III के नाम से भी जानते हैं. इस मिशन में अलग-अलग भागो को शामिल किया गया था जिससे पेलोड काफी अधिक हो गया था इसीलिए दूसरे देशों द्वारा किसी भी प्रकार के दूसरे पर लूट को ले जाने से मना कर दिया गया था.

बस नासा के एक लेजर रिट्रोफ्लेक्टर को इस पेलोड के साथ शामिल किया गया. इस मिशन की लागत करीबन 141 मिलियन डॉलर है सबसे खास बात इसमें यह है कि हॉलीवुड में बनने वाली फिल्म की लागत से भी कम की राशि में भारत ने अंतरिक्ष मिशन तैयार किया.

Chandrayaan-2 के विभिन्न भागों की जानकारी

चंद्रयान अलग-अलग भागों से मिलकर बनी हुई है.

ऑर्बिटर

ऑर्बिटर का काम है कि यह चंद्रमा से 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर इसकी परिक्रमा करेगा. इस अभियान के तहत ऑर्बिटर के साथ पांच पेलोड ले जाने का फैसला किया गया जिसमें से 3 पेलोड बिल्कुल नए है जबकि दो चंद्रयान-1 और भेजे गए पेलोड के अपडेटेड वर्जन है. इसका कुल वजन 1400 किलो था. इसके साथ ही हाई रेजोल्यूशन कैमरा ऑर्बिटर के साथ भेजा गया था जो समय समय की तस्वीर पृथ्वी भेजता. यह लैंडर विक्रम के और बेटर से अलग होने से पहले लैंडिंग साइट की हाई क्वालिटी रेजिलेशन फोटो देता यह मिशन 1 साल का है और इससे चंद्रमा के 17 से 100 किलोमीटर दूर दूरी कक्षा में रखा गया.

विक्रम लैंडर

इस लैंडर का नाम विक्रम इसलिए रखा गया ताकि इससे एक श्रद्धांजलि के रूप में जाना जा सके जो कि भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया था. इसका निर्माण किस प्रकार किया गया था कि यह एक चंद्र दिन के लिए काम कर सके. एक चंद्र दिन पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर है.

इसका काम है सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग करना जिससे कि रोवर सही सलामत चंद्रमा की सतह पर उतर जाए और सफलतापूर्वक काम कर सके.

लेकिन दुर्भाग्यवश लेंडर से हमारा संपर्क टूट गया और इस प्रकार इसका कार्य असंभव हो गया.

रोवर

रोवर की पावर उत्पन्न करने की क्षमता 50 वाट की है इसरो का नाम प्रज्ञान है जो 6 पहियों वाला रोबोटिक वाहन है. यह अपने पंजों से 5 किलोमीटर तक की यात्रा कर सकता है और इसके लिए यह सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करता है यह विक्रम लैंडर के साथ कम्युनिकेट कर सकता है एवं उसे भेजे जा रहे डेटा को एक्सेप्ट कर सकता है. इसका काम है पृथ्वी की सतह पर अपने पहियों के सहारे चलना और वहां की मिट्टी और चट्टानों के नमूने इकट्ठा करना उनका रासायनिक और भौगोलिक विश्लेषण करना इसके बाद इकट्ठा किए गए डाटा को और भीतर के पास भेज देना.

चंद्रयान 2 से जुड़ी रोचक बातें

यह भारत का पहला मिशन था जो पूरी तरह से देशी था क्योंकि इसमें सभी निर्माण कार्य भारत के अंदर ही किए गए थे.

चांद का दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र हमेशा से ही ऐसा भाग रहा है जो अंधेरे में रहता है और किसी भी देश में अभी तक उस वहां पर जाने की कोशिश नहीं कि है. लेकिन भारत ने सबसे पहले वहां पर जाने का निर्णय लिया और इससे एक हद तक पूरा भी किया.

पहली बार भारत ने सॉफ्ट लैंडिंग के लिए यान का निर्माण किया इसके अलावा इसे कई भागों में भी निर्मित किया जैसे ऑर्बिटर, रोवर और लैंडर.

भारत चौथा देश बना जिसने चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश की.

Leave a Comment