बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ पर निबंध – Beti Padhao Beti Bachao Essay in Hindi

हमारे देश में स्त्रियों को अपनी अवकाश महत्व दिया जाता है और उन्हें भी समाज में स्थान दिया जाता है. यही वजह है कि शुरू से ही बच्चों को चाहे वह छात्र हो या छात्रा औरतों के समाज में स्थिति महत्व के बारे में बताया जाता है इसीलिए इस पोस्ट में हमने बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ पर निबंध ( Beti Padhao Beti Bachao Essay in Hindi) तैयार किया है..

बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का अर्थ है समाज में बेटियों को अच्छी शिक्षा देना और उन्हें समाज में पुरुषों के समान एक जैसा अधिकार प्राप्त करना. स्त्रियों को आत्मनिर्भर बनाना ताकि वह समाज में किसी से पीछे ना रहे. बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ ऐसा अभियान है जो भारत में बेटियों की स्थिति को सुधारने के लिए और उन्हें आत्मनिर्भर करने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को शुरू किया.

इस पोस्ट के माध्यम से हमने आपके लिए ऐसे ही तथ्यों को रखा है जो कि आपको स्त्रियों की पहले की दशा और आज की आधुनिक युग में अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए शिक्षा के महत्व के बारे में निबंध के माध्यम से बताएं हैं जो स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले हर प्रकार के छात्र के लिए उपयोगी हैं.

Beti Padhao Beti Bachao par nibandh
बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ पर निबंध

निबंध – 1 (450 शब्द)

भारतीय संस्कृति काफी पुरानी है और यहां पर शुरू से ही महिलाओं को काफी महत्व दिया जाता रहा है. भारत के कई ऐसे राज्य हैं जहां आज भी मातृसत्तात्मक रीति रिवाज पर चला जाता है.

मातृसत्तात्मक ऐसी व्यवस्था होती है जहां पर घर का स्वामित्व स्त्री के पास होता है. घर के लिए दिए जाने वाले सारे फैसलों का जिम्मेदार एक औरत होती है. वही पूरे घर को नियंत्रित करती है यानी कि इसमें पुरुष का दायित्व स्त्री से कम होता है.

ऐसे देश में बदलते समय के साथ में और औरतों के अधिकारों में भी काफी बदलाव आ गया. जहां एक तरफ औरतों के कई प्रकार के अधिकार होते थे बदलते समय ने लोगों के विचार भी बदल दिए. स्त्री सिर्फ घर के अंदर रहने वाली एक गृहिणी बन गई.

यहां तक कि औरतों पर तरह-तरह के अत्याचार भी होने लगे. एक समय तो ऐसा था कि किसी के घर में जब बच्चा पैदा होता था तो यही उम्मीद लगाया जाता था कि लड़का पैदा हो लड़की पैदा ना हो. लड़कियों को पैदा होते ही मार दिया जाता था.

यहां तक कि आज के समय में भी आपने सुना होगा जून हत्या के बारे में. वैसे तो भारत सरकार ने भ्रूण हत्या को कानूनी अपराध करार दे दिया है और किसी भी प्रकार के मेडिकल टेस्ट पर पाबंदी लगा दी है जिससे कि ग्रुप के लिंक का पता चलता है.

हमारे भारत में भ्रूण हत्या के साथ-साथ स्त्रियों का बलात्कार भी काफी बढ़ गया. जिस कारण औरतों की स्थिति और भी खराब हो गई. यहां तक कि स्त्रियों को बाहर निकलने के लिए भी सोचना पड़ता है.

आज के खेत विकसित होते समाज में भी स्थिति कई शहरों में ऐसी ही है जहां रात में लड़कियां बाहर निकलने से कतराती हैं. यहां तक कि परिवार के लोग भी इस पर एतराज करते हैं.

इस प्रकार के अपराध दुनिया के हर एक कोने में होते हैं लेकिन भारत एक घनी आबादी वाला देश होने के नाते यह संख्या काफी ज्यादा होती है.

दूसरी तरफ भारत का इतिहास काफी स्वर्णिम रहा है और इस प्रकार के इतिहास वाला देश जहां की संस्कृति और सभ्यता इतनी फली फूली हुई थी और इस प्रकार के अत्याचार अगर इस देश में यह सुनकर किसी को भी काफी बुरा लगता है.

यह कुरीतियों एवं औरतों पर होने वाले अपराध तभी कम हो सकते हैं जब हमारी बेटियां पढ़ लिखकर इस काबिल बनती हैं कि वह खुद एक आत्मनिर्भर बन सके और अपने आत्म सम्मान के लिए लड़ सके. हम अपनी बेटियों को तभी बचा सकते हैं जब उन्हें पढ़ा कर हम शिक्षित कर सकें.

एक पढ़ी लिखी हुई बेटी खुद अपने बारे में समझ सकते हैं और अपने अधिकारों को भी अच्छे से जान सकती है और अपने हक के लिए लड़ सकती है.

निबंध – 2 (350 शब्द)

बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ भारत की एक मुख्य बहुत ही महत्वकांक्षी परियोजना है जिसकी शुरुआत भारतीय सरकार ने की है ताकि भारत की बेटियों को पढ़ा लिखा कर योग्य बनाया जाए.

जब नारी शिक्षित होगी तो परिवार देश शिक्षित होगा और आने वाले पीढ़ी भी विकसित होगी. यहां पर इस योजना की शुरुआत करने का मुख्य उद्देश्य यही है कि समाज में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध और कुरीतियों को खत्म की जाए.

आखिर कब तक महिलाओं पर अत्याचार सिर्फ इस वजह से होता रहेगा क्योंकि वह नारी है. बॉलीवुड फिल्मों के माध्यम से स्त्रियों की दशा को पर्दे पर उतारा जाता रहा है. नारी सशक्तिकरण की भी बात हमेशा की जाती है.

लेकिन धरातल पर यह कितना सच है सभी को पता है. आज भी परिवार के लोग लड़कियों को इस बात से बाहर नहीं निकलने देते कि उनके साथ कोई गलत घटना ना हो जाए. यहां तक कि जब बेटियां स्कूल या कॉलेज पढ़ने भी जाती है तो उसे ऐसी निगाह से देखा जाता है कि वह अपना नजर तक उठा नहीं पाती.

इसकी वजह क्या है? क्या हमने कभी यह जानने की कोशिश की है कि इस भीड़ का हिस्सा हम खुद ही हैं जिसकी वजह से समस्त स्त्री जाति को समस्या होती है. घर के बाहर तो खतरा सबको पता ही होता है लेकिन औरतों के खिलाफ घरेलू हिंसा भी काफी ज्यादा होती है जो कहीं रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होती. लेकिन यह सच्चाई है.

जब एक बेटी की शादी होती है तो उसके ससुराल वाले दहेज की मांग करते हैं. अगर लड़की के मां-बाप के पैसे ना हुए तो उन्हें अच्छा घर भी नसीब नहीं होता. समाज की कुरीतियों को तभी जड़ से खत्म किया जा सकता है जब हमारी बेटियां आत्मनिर्भर बनेगी. जब बेटियां खुद इन समस्याओं के खिलाफ खड़ी होकर लड़ेंगे तो भला किसकी मजाल है कि वह बेटियों पर अत्याचार करें.

शिक्षा इंसान को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वास ही बनाता है और किसी भी प्रकार के लक्ष्य को प्राप्त करने में हिम्मत देता है.

समाज के इस प्रकार के विचार रखने वाले लोगों और रीति-रिवाजों से तभी छुटकारा मिल सकता है जब हम इसकी शुरुआत करें और यही शुरुआत है बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ यानी कि हर बेटी शिक्षित हो.

निबंध – 3 (250 शब्द)

भारत शुरुआत से ही एक पुरुष प्रधान देश रहा है. स्त्रियों का मात्र एक स्थान ही समझा जाता है कि वह सिर्फ रसोई नहीं काम कर सकते हैं. घर में बाहर निकालना उनके लिए वर्जित होता है. बहुत जरूरी काम होने पर ही उन्हें घर से बाहर जाने की अनुमति दी जाती है.

यह कोई पुरानी बात नहीं है बल्कि आज भी कई घरों में यही प्रचलन है. वैसे भारत की संस्कृति काफी समृद्ध है और यहां की सभ्यता काफी विकसित है जो बहुत पुरानी है. लेकिन यह भी सत्य है कि जहां पर स्त्रियों का दर्जा बहुत ऊंचा है वही समय के साथ लोगों के विचार में भी बदलाव आए और आज भी स्थिति आ चुकी है.

जब पैदा होता है तो लोगों की यही कामना होती है कि बेटा पैदा हो. आखिर क्यों बेटी की कामना नहीं करते जबकि किसी भी धर्म में बेटियों का स्थान काम नहीं है. हमारे देश में रानी लक्ष्मीबाई भी पैदा हो चुकी है जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत की.

सदियां बीतने के बावजूद लोगों के विचार नहीं बदले बल्कि और संकुचित हो गए. जहां लोगों को स्त्रियों को आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए वहीं लोगों ने उन्हें घर के अंदर तक ही सीमित कर दिया.

लेकिन इस समस्या का समाधान तभी हो सकता है जब स्त्रियों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके. इसकी शुरुआत एक कदम बढ़ा कर की जा चुकी है जो कि बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान के साथ शुरुआत हुई है. भारत के प्रधानमंत्री ने इस योजना की शुरुआत कर बेटियों को आगे बढ़ने का मौका दिया है.

निबंध – 4 (200 शब्द)

शुरुआत से ही भारत की सभ्यता और संस्कृति काफी समृद्ध रही है और औरतों का स्थान भी काफी शुभ माना जाता रहा है. लेकिन समय के साथ-साथ लोगों के विचारों में भी बदलाव आया और उन्हीं बदलाव के कारण यह है कि आज भारत के कई हिस्सों में स्त्रियों को वह अधिकार नहीं मिल पाता जो एक पुरुष को मिलता है.

वापस उसी अधिकार को दिलाने के लिए भारतीय सरकार ने बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का अभियान शुरू किया. जब तक बेटी शिक्षित नहीं होगी तब तक वह अपने अधिकारों को नहीं समझ सकेगी और इसके लिए संघर्ष भी नहीं कर सकते.

समाज में हमेशा से ही स्त्रियों के खिलाफ काफी अत्याचार होते रहे हैं और अक्सर हमें समाचार पत्रों में बलात्कार, बाल शोषण इत्यादि के अपराध सुनने को मिलते हैं. आखिर ऐसा क्यों है? क्या समाज में सिर्फ पुरुषों का अधिकार है स्त्रियों का नहीं?

स्त्रियों को भी भारत सरकार ने उतना ही अधिकार दे रखा है जितना एक पुरुष को दिया जाता है. लेकिन उस अधिकार का सही उपयोग कर पाएगी उसे अच्छे से मालूम होगा और इसके लिए उच्च शिक्षित होना जरूरी. तभी वह आत्मविश्वास के साथ संघर्ष कर सकती है.

निष्कर्ष

इस विकसित हो रहे समाज में भी कई कुरीतियां समाज में आज भी मौजूद हैं जिन्हें जड़ से खत्म करना जरूरी है. लोगों की मानसिकता की वजह से ही इस प्रकार की कुरीतियां लंबे समय तक समाज में फैली रहती है.

जब तक लोगों के विचार नहीं बदलेंगे तब तक इन्हें जड़ से खत्म करना मुश्किल है. हमारे देश भारत में स्त्रियों के साथ हमेशा से ही अत्याचार होते रहे हैं और इन्हें समाज में दर्जा तो दिया गया है लेकिन पालन नहीं किया जाता.

एक शिक्षित समाज ही इस समस्या का समाधान कर सकते हैं और इसीलिए भारत में बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान की शुरुआत की गई है. इसी विषय पर हमने इस पोस्ट को तैयार किया है जिसमें क्लास 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 के छात्र निबंध के रूप अपने शिक्षा के लिए प्रयोग कर सकते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here