डीएम की तैयारी कैसे करें

डीएम की तैयारी करना मतलब यूपीएससी क्लियर करना होता है. डीएम देश का सबसे बड़ा तथा सर्वश्रेष्ठ सरकारी नौकरी है जिसे बनना आजकल के विद्यार्थियों का सपना होता है. 

उम्मीदवार कई वेबसाइट से इस परीक्षा की सारी जानकारी लेते हैं तथा इन्हें कुछ अन्य लोगों से  सलाह भी दी जाती है लेकिन आज हम अपने इस आर्टिकल के माध्यम से आपको सटीक रूप से बताएंगे कि डीएम की तैयारी कैसे करें?

डीएम के पद में नियुक्त होने के लिए यूपीएससी जैसे कठिन परीक्षा को पास करना होता है, यूपीएससी का फुल फॉर्म यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन तथा हिंदी में इसे संघ लोक सेवा आयोग कहा जाता है. 

कंपटीशन के इस युग में इतना कठिन एग्जाम को क्लियर करना आम बात नहीं है. अभी के जनरेशन में लगभग विद्यार्थियों कि सपना आईएएस बनने की होती है.

डीएम क्या होता है?

डीएम का फुल फॉर्म डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट होता है तथा इसे डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर भी कहा जाता है. डीएम का पद उस अधिकारी को नियुक्त किया जाता है जो यूपीएससी एग्जाम को क्लियर करके सिविल सर्विस के किसी पद में कार्य कर रहे होते हैं. 

इन विद्यार्थियों के प्रमोशन के दौरान इन्हें डीएम अर्थात डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट पद प्रदान किए जाते हैं.

डीएम अधिकारी अपने जिले का एक मुखिया होता है जिसे जिला न्यायाधीश के नाम से भी जाना जाता है, डीएम पद पर नियुक्त व्यक्ति अपने जिले का अधिकारी होता है जो पूरे जिले का कारोबार संभालता है.

इनका कर्तव्य होता है कि यह अपने जिले की सारी समस्याओं का समाधान निकाल कर जहां तक संभव हो अपने क्षेत्र को विकसित करने का प्रयास करते हैं.

एक जिला अधिकारी अपने जिले के अंतर्गत आए हर एक क्षेत्र में शिक्षा से लेकर कृषि विभाग, व्यापार, हर एक कार्य को अच्छी सुविधा प्रदान करते हैं ताकि उनके जिले के सभी लोग आगे बढ़ सके.

हर जिले के विद्यार्थी जो अपने डीएम साहब को देखते हैं तो उनकी पावर और उनके अधिकार बच्चों को उनके पद की ओर अग्रसित करता है. 

इसी अधिकार को पाने के लिए बहुत से विद्यार्थी इस परीक्षा की तैयारी ईमानदारी पूर्वक करते हैं ताकि उनका भी सिलेक्शन इस पोस्ट में हो सके.

सरकारी नौकरी के अंतर्गत सिविल सर्विस के पद को हासिल करना आज के दौर में सभी विद्यार्थियों का लक्ष्य बन चुका है. बहुत से ऐसे विद्यार्थी हैं जिन्हें आईएस का पद उनके कार्य और उन्हें मिले अधिकार उनको अपनी और आकर्षित करता है. 

यूपीएससी एग्जाम सुनने में जितना गर्व महसूस होता है उतना ही कठिन इसके एग्जाम की प्रक्रिया है जिसमें सफल होना हर एक बच्चे की बस की बात नहीं है. 

सबसे कठिन एग्जाम यूपीएससी एग्जाम होता है इस एग्जाम में वही बच्चा सफल हो पाता है जो कड़ी मेहनत और लगन के साथ-साथ दृढ़ संकल्प करके इसकी तैयारी करते हैं. 

क्योंकि इस एग्जाम की तैयारी के लिए धैर्य और संयम रखने के साथ-साथ तैयारी करने की जुनून भी विद्यार्थी के अंदर रहनी चाहिए तभी वे दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा अर्थात यूपीएससी के एग्जाम को क्लियर करने में सक्षम हो पाएंगे.

डीएम के कार्य क्या होते हैं?

डीएम जिसे भारतीय प्रशासनिक सेवा का एक सदस्य माना जाता है जो अपने राज्य सरकार के लिए विभिन्न प्रकार के चुनौतीपूर्ण कार्य को करते हैं. भारतीय प्रशासनिक प्रणाली के अंतर्गत एक डीएम अपनी जिम्मेदारियों को बहुत ही महत्वपूर्ण तरीके से निभाते हैं.

डीएम को राज्य सरकार के हथियार भी माने जाते हैं क्योंकि एक डीएम राज्य सरकार के हथियार के रूप में कार्य करते हुए अपने क्षेत्र को विकसित करने का प्रयास करते हैं.

जिला के उपायुक्त जनता के सीधे संपर्क में होता है इसका कारण यह है की डीएम राज्य सरकार का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि होता है. 

डीएम के पास जाने के लिए किसी पावर की जरूरत नहीं होती कोई भी वर्ग के लोग अपने जिले के डीएम के साथ आसानी पूर्वक बात कर सकते हैं, डीएम उनके बातों को सुनता है और उनके परेशानियों का निवारण अपने उच्च विचार के साथ करता है.

एक डीएम की जिम्मेदारी अपने जिला के कानून व्यवस्था को बनाए रखने का होता है जिसमें किसी भी प्रकार की कानून का उल्लंघन ना हो सके, हर एक कार्य को कानूनी तरीके से करना एक जिला अधिकारी का कार्य होता है.

हर जिले में  एक कार्यालय होता है जिसमें जिला अधिकारी अपने कार्य को करते हैं, इसे भारतीय प्रशासनिक प्रणाली का राजस्व भी कहा जाता है जो स्थानीय निकायों, पंचायत, विकास तथा नागरिक प्रशासन में अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभाते हुए कार्य करते हैं.

एक जिला अधिकारी अपने कार्यालय में हो रहे विभिन्न प्रकार के कार्यों में निगरानी रखते हैं, अपने पद से नीचे के पद में कार्य कर रहे अधिकारियों का हर एक कार्य का निरीक्षक भी इन्हीं के द्वारा किया जाता है .

भूमि राजस्व, अन्य प्रकार के सरकारी करो तथा देश राशि में अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं.

सभी प्रकार के कार्यों का रिकॉर्ड राज्य सरकार को देना एक जिला अधिकारी का कार्य होता है.

इस प्रकार भारतीय प्रशासनिक प्रणाली के अंतर्गत एक जिला अधिकारी का कार्य बहुत ही चुनौतीपूर्ण तथा कठिन होता है जिसे हर एक डीएम अपनी जिम्मेदारियों के साथ अपने कार्य को अच्छी तरीके से करते हैं.

डीएम बनने के लिए योग्यता क्या होनी चाहिए?

डीएम अपने जिले का एक उपायुक्त होता है जिसमें पूरे जिले के कारोबार को संभालने की क्षमता होती है इसके साथ-साथ इन्हें कई प्रकार की अधिकार तथा पावर सरकार के द्वारा प्रदान किए जाते हैं.

इन सभी जानकारियों को जब विद्यार्थी जानते हैं तो उनके मन में भी इस पद को हासिल करने की इच्छा जागृत होती है.

यदि आप भी आईएएस ऑफिसर बनने की चाहत रखते हैं तो इसके लिए इसकी योग्यता की जानकारी रखना आवश्यक है.

जो उम्मीदवार यूपीएससी एग्जाम के लिए आवेदन करना चाहते हैं उन्हें किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री प्राप्त करनी होगी,.

वे स्नातक डिग्री किसी भी स्ट्रीम से प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि यूपीएससी के एग्जाम में स्नातक डिग्री होना आवश्यक है चाहे उम्मीदवार बीए या बीएससी या बीकॉम से ग्रेजुएट हो .

यूपीएससी एग्जाम के लिए आयु सीमा कितनी होनी चाहिए?

जो अभ्यर्थी यूपीएससी एग्जाम के लिए आवेदन करना चाहते हैं उनकी आयु सीमा विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग होती है.

जनरल वर्गीय उम्मीदवार के लिए आयु सीमा 21 से 32 साल होती है. वही ओबीसी के विद्यार्थियों के लिए 21 से 35 साल होती है.

एससी एसटी वर्गीय उम्मीदवारों के लिए सरकार द्वारा 3 साल की छूट दी जाती है जिसमें उसकी आयु इस परीक्षा के लिए 21 वर्ष से 37 वर्ष के बीच होनी चाहिए तभी परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं.

सिलेबस की जानकारी रखे:-

यूपीएससी की परीक्षा दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा होती है जिसकी सिलेबस सभी प्रकार के परीक्षाओं से ज्यादा बड़ा होता है यूपीएससी के सिलेबस के अंतर्गत बहुत सारे विषयों की जानकारी गहराई पूर्वक पढ़नी होती है.

विद्यार्थी चाहे किसी भी एग्जाम की तैयारी कर रहे हो सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि हर एक विद्यार्थी को अपनी सिलेबस की जानकारी रखना आवश्यक है.

क्योंकि जब तक हम सिलेबस को देखेंगे नहीं तब तक हमें यह नहीं पता चलेगा कि हमें किस विषय में किस टॉपिक को पढ़ना है, और यूपीएससी का सिलेबस बहुत ही बड़ा होता है.

इसलिए इसलिए बस की जानकारी रखना इस परीक्षा की सफलता का सबसे पहला सीढ़ी है. जब विद्यार्थी अपने सिलेबस को जान लेते हैं तो उनके लिए एग्जाम की तैयारी करना थोड़ा आसान हो जाता है.

यूपीएससी के कोर्स क्या होता है?

यूपीएससी एग्जाम जितना कठिन होता है उतना लॉन्ग इस एग्जाम की सिलेबस होती है जिसमें हमें विभिन्न प्रकार के विषयों का अध्ययन करना होता है.

लेकिन खासकर एनसीईआरटी की जानकारी रखना हमारे एग्जाम के लिए बहुत ही लाभदायक साबित होता है इसलिए हर एक कैंडिडेट को सिक्स क्लास की एनसीईआरटी बुक्स जैसे हिस्ट्री इकोनॉमिक्स मैथ केमिस्ट्री सोशल साइंस इन सभी विषयों का अध्ययन करना अनिवार्य है.

क्योंकि यदि आप  एनसीईआरटी बुक्स को पढ़ते हैं तो उससे आपको भरपूर जानकारी मिलती है जिससे आपका एग्जाम आसानी से क्लियर हो सकता है.

इसके साथ-साथ जनरल नॉलेज मैं अच्छी पकड़ होना बहुत जरूरी है क्योंकि जनरल नॉलेज के अंतर्गत बहुत सारे प्रश्न आते हैं, करंट अफेयर्स की भी जानकारी रखना जरूरी है.

इस देश दुनिया में हो रहे हर एक क्रियाकलाप की जानकारी हम करंट अफेयर के माध्यम से रख सकते हैं इसके साथ साथ प्रतिदिन न्यूजपेपर विभिन्न प्रकार के मैगजीन इत्यादि भी पढ़ना आवश्यक है.

प्रत्येक दिन के न्यूज़ न्यूज़ पेपर से पढ़ने के बाद आप अपने टीवी में भी आज तक चैनल या एबीपी न्यूज़ जैसे चैनलों में से देख सकते हैं.

स्मार्ट तरीके से करें यूपीएससी की तैयारी

कई लोग ऐसे होते हैं जो यूपीएससी का नाम सुनते ही बोलते हैं यह बहुत ही कठिन एग्जाम है, कई ऐसे विद्यार्थी हैं जो यह वाक्य सुनकर यूपीएससी एग्जाम से दूर भागते हैं उन्हें लगता है कि इतना सिलेबस कवर कर पाना मुमकिन नहीं है.

कुछ विद्यार्थी धैर्य और संयम नहीं रख पाते लेकिन जो इस एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं उन्हें जुनून के साथ इसकी तैयारी करनी होगी और इसके साथ साथ उन्हें धैर्य भी रखना होगा.

यदि हम किसी परीक्षा को स्मार्ट तरीके से पढ़ें और एक अच्छी स्ट्रेटजी बनाए तो हम वह परीक्षा में सफल हो सकते हैं क्योंकि जो विद्यार्थी सफल होता है वह भी एक मनुष्य है इसलिए नकारात्मक सोच को नजरअंदाज करते हुए अपने अंदर सकारात्मक विचारों को रखें और परीक्षा की तैयारी पूरे लगन और ईमानदारी पूर्वक.

इस परीक्षा में सफल होने के लिए विद्यार्थियों को अपनी स्ट्रेटजी नए तरीके से स्मार्ट वे में करनी होगी तभी उनका एग्जाम क्लियर हो पाएंगे.

टाइम टेबल से पढ़ें:-

यदि आप यूपीएससी एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं तो इसके लिए आपको अपने सिलेबस की जानकारी रखते हुए उन सभी विषयों के अनुसार टाइम टेबल बना ले क्योंकि टाइम टेबल पढ़ाई करने का सबसे अच्छा तरीका है.

टाइम टेबल बनाने से टाइम मैनेजमेंट होता है और जो विद्यार्थी टाइम टेबल के अनुसार अपने विषय की तैयारी करते हैं उनका सिलेबस बहुत जल्द पूरा होता है इसलिए जहां तक संभव हो अपने हर एक विषय में निश्चित समय देकर पढ़ाई करें.

यूपीएससी एग्जाम की चयन प्रक्रिया

यूपीएससी एग्जाम तीन चरणों में ली जाती है प्रीलिम्स, मेंस तथा इंटरव्यू.

प्रीलिम्स परीक्षा:-

यह परीक्षा यूपीएससी का सर्वप्रथम परीक्षा मानी जाती है. जिसका अंक मेरिट लिस्ट में नहीं जोड़ा जाता लेकिन जब तक आप बैलेंस परीक्षा में पास नहीं होते तब तक आप मेंस एग्जाम नहीं दे सकते इसलिए मेंस  परीक्षा को देने के लिए प्रीलिम्स में पास होना अनिवार्य होता है.

मेंस परीक्षा:-

जो उम्मीदवार प्रीलिम्स में पास होते हैं उन्हीं को मैंस एग्जाम में बैठने दिया जाता है मेंस एक लिखित परीक्षा होती है .

इंटरव्यू:-

इंटरव्यू जिसे हिंदी में साक्षात्कार कहा जाता है, जो उम्मीदवार मेंस एग्जाम में उत्तीर्ण होते हैं उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है जिसमें उनकी पर्सनालिटी एवं आई कॉन्टैक्ट इन सभी क्रियाकलापों को अधिकारियों द्वारा देखा जाता है. 

इसके साथ साथ अधिकारियों के द्वारा बहुत से प्रश्न कैंडिडेट से पूछे जाते हैं.

कैंडिडेट के द्वारा डॉक्यूमेंट में लिखे गए हॉबीज एवं वे कौन-कौन से सब्जेक्ट को ऑनर्स पेपर में रखे है  इन सभी सब्जेक्ट  के अनुसार भी अधिकारियों द्वारा प्रश्न किए जाते हैं.

जब कैंडीडेट्स का इंटरव्यू हो जाता है तब उनकी मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है मार्क्स के अनुसार उनका सिलेक्शन होता है.

डीएम की सैलेरी कितनी होती है?

डीएम जो अपने जिले का उपायुक्त होता है जिसे सरकार द्वारा कई तरह के अधिकार और पावर भी दिए जाते हैं वह अपने पावर का इस्तेमाल करके अपने कर्तव्य को इमानदारी पूर्वक पूरा करते हैं.

एक जिला अधिकारी की सैलरी 78000 प्रतिमा दी जाती है.

इसके साथ-साथ इन्हें सरकार के द्वारा अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाती है जैसे बड़ा सा मकान के साथ-साथ नौकर चाकर एवं सरकार द्वारा एक जिला अधिकारी का एक असिस्टेंट भी होता है जो उनके छोटे-छोटे कार्य जैसे फाइल को देना एवं उसे रखना इन सभी कार्य को उनके असिस्टेंट द्वारा किया जाता.

इन सभी के साथ साथ एक डीएम को सरकार के द्वारा गाड़ी प्रदान की जाती है.

यदि डीएम की पोस्टिंग ऐसे जगह है जहां की स्थिति सेंसिटिव है तो उस जगह में उनके लिए बॉडीगार्ड्स दी दिए जाते हैं.

निष्कर्ष

डीएम का पद जितना ऊंचा होता है उतना उनका कार्य भी कठिन होता है जिसे उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए करना होता है. 

आज आपने जाना की डीएम की तैयारी कैसे करें? आशा है आपको यह आर्टिकल पढ़कर डीएम की तैयारी की सारी जानकारी मिली होगी.

Wasim Akram

वसीम अकरम WTechni के मुख्य लेखक और संस्थापक हैं. इन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है लेकिन इन्हें ब्लॉगिंग और कैरियर एवं जॉब से जुड़े लेख लिखना काफी पसंद है.

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